विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

वर्तन परिवर्तन - ९. किस्मतवाले

image

-हर्षद दवे

एक भक्त कड़ी तपस्या कर रहा था. उस के पास सब कुछ होते हुए भी वह इतनी कठोर तपस्या कर रहा था कि ईश्वर को प्रसन्न होना पडा. आखिरकार ईश्वर ने पूछा: ‘हे वत्स, तू ने मुझे क्यों याद किया? मैंने तो तुझे सबकुछ दे रखा है फिर मुझे याद करने का कारण?’

‘अरे प्रभु ! मुझे आपकी आवाज सुनाई दे रही है पर आप कहीं नजर नहीं आ रहे?’ भक्त ने इधर उधर देखते हुए कहा. पर प्रभु प्रकट नहीं हुए. फिर से आकाशवाणी हुइ: ‘मुझे देखने की बात छोड़, मुझ से क्या चाहिए यह बता वत्स. मैं तुझे दूंगा.’

‘न मैं कुछ मांगना चाहता हूँ, न ही मुझे कुछ चाहिए!’ भक्त ने कहा.

‘फिर इतनी कठोर तपस्या क्यों?’ वही देववाणी सी आवाज फिर से सुनाई दी.

‘केवल आप के दर्शन के लिए प्रभु,’ भक्त ने कहा, ‘मैं आप को मेरी अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ. आप को छू कर आपकी ऊर्जा और चेतना का अनुभव करना चाहता हूँ!’

कुछ समय तक चुप्पी बनी रही. फिर किसी गहन गुफा से आ रहे हो ऐसे शब्द सुनाई दिए: ‘ठीक है. किन्तु मैं तेरे पास नहीं आऊंगा! तुझे आँखें बंद कर के बगलवाले कमरे में आना होगा! मैं स्वयं वहां मौजूद हूँ.’

भक्त आँखें बंद कर के जल्दी से पासवाले कमरे में गया. उस की धडकनें तेज हो रही थीं, उस ने आँखें खोलीं.

कमरे में उसके माँ-बाप बैठे थे!

माँ-बाप ही ईश्वर है यह दर्शाने के लिए ही इस बोध कथा की रचना हुई होगी यह मान लेते हैं. यदि इस कथा नहीं रची गई होती तो क्या माता-पिता का महत्व कम हो जाता? बिलकुल नहीं. वे ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तरह हमारे सर्जक हैं. हमारा अस्तित्व उनकी बदौलत है.

माँ-बाप के लिए बच्चे क्या कुछ नहीं होते. इस का एहसास हमें तब होता है जब हम स्वयं माता या पिता बनते हैं. हम अपने बच्चे के बारे में हमेशा अच्छा ही सोचेंगे. परन्तु जब बच्चे सयाने हो जाते हैं तब वे अपने माता-पिता को फालतू मानने लगते हैं. इस बात पर वे अपना जी छोटा नहीं करते क्योंकि उनकी नजर में बच्चे कभी बड़े होते ही नहीं. और छोटे बच्चे से कोई नाराज कैसे हो सकता है भला! हम अपने माँ-बाप के लिए सदैव बच्चे रहते हैं पर इसका मतलब यह नहीं कि हम उन्हें अपना बचपना दिखाएँ! बच्चे बड़े हो जाए तब उन्हें अपना बड़प्पन दिखाना चाहिए! प्रेम, स्नेह, सम्मान, आदर, लिहाज, अदब, उम्र जैसे शब्दों के अर्थ सिर्फ शब्दकोष तक सीमित नहीं रहने चाहिए. बच्चों की जिंदगी से जुड़े हुए होने चाहिए, विशेष रूप से अपने माता-पिता के संदर्भ में! वो होते हैं किस्मतवाले जिनके माँ होती है.

-----------------------------------------------------------------------------------------

हर्षद दवे

संपर्क - hdjkdave@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव

अति सुन्दर विचार बहुत सुन्दर और सरल ढंग से प्रस्तुत सचमुच माँ बाप तो इश्वर से भी ऊपर हैं क्योकि उनके बिना ईश्वर हमारी पहुँच के बाहर ही रहता है .....

प्रेरणादायक ।

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget