रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

एक और प्रेम कविता

image

पल्लवी त्रिवेदी

जब भी देखो किसी चिड़िया को चहकते , फुदकते

बस उसी को देखना एकटक

यूं नहीं कि पढ़ते , लिखते, मोबाईल पे बात करते एक उड़ती निगाह डाली

और मुस्कुरा दिए

सारा काम परे रख ...देखना बस उस चिड़िया को

आँख में भर लेना उसे उसके पूरे चिड़ियापन के साथ

जीना उस पल को सिर्फ उस चिड़िया के साथ

और ऐसे ही करना प्रेम

जब भी करना

---------------------------------------------------------------------

सारे ब्रांड उतार कर देहरी पर छोड़ देना

क्लच को एक झटका देना और सुबह दस बजे से कसे जूड़े को खोल देना

निकाल देना साड़ी के पल्ले की सारी पिनें

आना नीली बद्दी वाली हवाई चप्पल सी बेफिक्री लिए

हमेशा अपने प्रेमी के पास

--------------------------------------------------------------------------

आज उसे चाँद की बिंदी न लगाना

आँचल में सितारे भी न टांकना

उसकी देह के लिए नयी उपमाएं तो बिलकुल न खोजना

मार्च एंड के बोझ की मारी वो

जब लौटे ऑफिस से

प्यार से लिटा लेना अपनी गोद में

मलना बालों में जैतून के तेल को अपनी पोरों से

और बच्चों सी गहरी नींद सुला देना

बस्स ...

----------------------------------------------------------------------------------

जब लड़ना तो आसमान सर पे उठा लेना

कहना उसे

" जल्दी टिकट कटा ले बे ऊपर का "

और जब उसके इंतज़ार का काँटा

दस मिनिट भी ऊपर होने लगे तो

वो दस मिनिट दस युगों की तरह गुजारना

-----------------------------------------------------------------------------------

उसे यूं ही बाहों में मत भर लेना

सुनो ..आज एक काम करना

खाने की मेज़ पर प्लेटें सजा देना

काट कर रखना खीरा और टमाटर

झटपट बना देना सब्ज़ पुलाव और पुदीने कैरी की चटनी

और जब वो नहाकर ऊपर बाल बांधती हुई

जाने लगे रसोईघर में

उसे बाहों में भरकर

बेतहाशा चूम लेना

और उसकी आँखों से सुख बरसा देना

--

पल्लवी त्रिवेदी के ब्लॉग - http://kuchehsaas.blogspot.in से साभार

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget