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अच्छाइयों की मार्केंटिंग करें

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- डॉ. दीपक आचार्य

नकारात्मक अणु-परमाणुओं की तादाद निरन्तर बढ़ती ही जा रही है। हर तरफ नकारात्मक सोच वाले और कुढ़ने वालों की संख्या में इजाफा होता दिखाई दे रहा है।

नकारात्मकता की धुंध का प्रसार इतना अधिक हो चला है कि जिधर देखें, उधर विकृत मानसिकता भरे कोहरे की चादर ढंकी हुई नज़र आने लगी है।

इंसान की सोच रोशनी की बजाय अंधकार भर मार्गों की ओर अधिक बढ़ती जा रही है जहाँ उसे वह सब कुछ देखने, जानने और समझने की  भूख जगी हुई है जो नहीं देखना चाहिए।

समाज और परिवेश में सर्वत्र नकारात्मक छवियों और माहौल का मूल कारण यह है कि हम उन लोगों से घिरे हुए हैं जो कम समय और न्यून मेहनत में सब कुछ हासिल करना और रातों रात अमीर हो जाना चाहते हैं।

इन लोगों को यह अच्छी तरह मालूम होता है कि यह सब कुछ रोशनी में नहीं पाया जा सकता बल्कि इसके लिए अंधेरों की आवश्यकता होती है। यह अंधेरे ही हैं जो मन के कोनों से बाहर निकल कर अंधेरों के गीत गाते और गुनगुनाते हैं।

चौतरफा माहौल कुछ अलग ही अलग दिखाई देने लगा है। उन लोगों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है जो नकारात्मक देखने, सुनने और जानने के आदी हैं और जहां कहीं जाएंगे वहाँ उनकी निगाह नकारात्मक बिन्दुओं पर ही खिंची चली जाती है। 

लोगों को जानें क्या ऎसा हो गया है कि हर तरफ नकारात्मकता की बदबू उन्हें खींच ही लेती है और अधिकतर लोगों की निगाह उस तरफ जाने लगी है जिस तरफ कभी नहीं जानी चाहिए।

इसका खामियाजा समाज को यह उठाना पड़ रहा है कि हर तरफ नकारात्मक ही नकारात्मक माहौल हावी दिखाई देता है जो सर्वत्र निराशा फैलाता है और अंधकार का सृजन करता है।

हाल ही बचपन से शैशवावस्था पाने वाले बच्चे भी जब समझदार होने की स्थिति में अपने आपको पाते हैं तब ऎसे माहौल को देखकर अपने भाग्य और भगवान को कोसते हैं कि आखिर उसने ऎसे समय उन्हें क्यों पैदा किया।

अच्छे और बुरे लोग, अच्छी और बुरी स्थितियां हर युग में रही हैं लेकिन बीते जमाने में सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म करने वाले लोगों की पूछ होती थी, उन्हीं के बारे में चर्चाएं होती थी, लेकिन आज ठीक इसका उलट हो रहा है।

आज बुरी बातों का प्रचार-प्रसार ज्यादा हो रहा है और अच्छी बातें गौण होती चली जा रही हैं। नकारात्मकता को तवज्जो देना न हमारे लिए अच्छा है, न समाज और देश के लिए। इससे हमारी भी बदनामी हो रही है और संदेश भी गलत जा रहे हैं कि सब जगह नकारात्मकता ही नकारात्मकता है।

क्यों न हम इस माहौल को ठीक करने का बीड़ा उठायें और यह तय करें कि नकारात्मकता भले कहीं हो, वहीं पड़ी रहे, हम सारे लोग सिर्फ सकारात्मकता को ही देखेंंगे, जानेंगे और इसी का प्रचार-प्रसार करते रहेंगे। 

समाज में खूब सारे अच्छे लोग हैं, अच्छे से अच्छे काम हो रहे हैं लेकिन हमें दिखाई नहीं देते। सारे श्रेष्ठ व्यक्तित्व और कर्म इसीलिए हाशिये पर हैं। 

वर्तमान पीढ़ी की यह जिम्मेदारी है कि अच्छी बातों और श्रेष्ठ चिंतन को अपनाए तथा अच्छाइयों को देखे, इनके बारे में दूसरों को बताए तथा अधिक से अधिक लोगों तक अच्छाइयों की मार्केटिंग करें।

ऎसा होने पर सामाजिक परिवर्तन का बेहतर माहौल भी खड़ा होगा और अच्छे लोगों का आदर-सम्मान बढ़ेगा। इसका फायदा समाज को ही होगा और आने वाली पीढ़ियों में सकारात्मक चिन्तन और श्रेष्ठ कर्मों के अनुकरण की भावनाओं का संचार भी होगा।

आज सर्वत्र सकारात्मक चिन्तन और अच्छाइयों को देखकर उनकी मार्केटिंग के सारे अवसरों का भरपूर लाभ लिया जाना चाहिए तभी हम सुनहरे भविष्य के स्वप्नों को साकार कर पाएंगे।

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- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

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(ऊपर का चित्र - धर्मेंद्र मेवाड़ी की कोलाज कलाकृति)

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