शुक्रवार, 26 जून 2015

एक लेखक के स्थापित होने की आत्म-कहानी

वैसे तो यह एक स्थापित और प्रसिद्ध, फ़ेसबुकिया लेखक की आत्मकहानी है, मगर लेखन, लेखन ही होता है. एक लेखक के जन्मने और स्थापित होने तक के सिलसिले की एकदम सच्ची, सीधी, सपाट बयानी आपको अचंभित कर सकती है, प्रेरित कर सकती है.
और, यह कहानी इस बात को फिर से स्थापित करती है कि - भविष्य के सूर, तुलसी सोशल मीडिया के रास्ते ही आएंगे.
--
बहरहाल, अजीत सिंह 'करप्ट' का यह आत्मकथ्य पढ़ें जिसे उनके फ़ेसबुक स्टेटस https://www.facebook.com/SinghCorpt/posts/1590475701217609 से साभार लिया गया है -

image

आज से कोई 4 साल पहले जब मैं लिखता नहीं था , एक दिन दिल्ली में अपनी छोटी बहन Arundhati rajpal के घर बैठे गपोड़े मार रहे थे । वो बोली , भैया आप लिखते क्यों नहीं ?
मैंने पूछा , क्या लिखूँ ।
अरे इतनी ढेर सारी गप्पें मारते हो , किस्से सुनाते हो ....... वही लिख मारो ।
लिख पाउँगा ? कभी लिखा तो है नहीं ।
अरे क्यों नहीं लिख पाओगे ।
अच्छा लिख तो दूंगा । पढ़ेगा कौन ?

अरे ब्लॉग पढ़ते हैं आजकल लोग ।
ब्लॉग ? वो क्या होता है ? उसने समझाने की कोशिश की । कुछ समझ न आया । google किया । पर अपन लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर ।
खैर जैसे तैसे बहना ने blog बना दिया ।
अब हमने google पे खोजना चालू किया । How to make your blog popular ?
उसमे एक से एक धुरंधर मठाधीश थे । लगे समझाने । दूसरों के blog पे जाइए । hallo hi कीजिये । उनको पढ़िए । like comment कीजिये ।
फिर एक दिन बड़ी नफासत से अर्ज़ कीजिये ...... हुज़ूर कभी हमारे blog पे भी तशरीफ़ लाइए । बन्दा भी थोडा बहुत कुछ लिख लेता है । अब ये तो उर्दू जुबां में हुई नफासत की बात । हमारे इहाँ भोजपुरी में इसको कुछ ऐसे कहेंगे । आप उसकी पीठ खुजाइये वो आपका खुजायेगा ।

हमको लगा कि ई तो बहुत *तियापे का काम है । हमसे नहीं होगा । और इस तरह हमारे लेखन का सूर्य उदय होने से पहिलहीं अस्त हो गया । बहरहाल इस से ये हुआ कि blog पढ़ने का चस्का लग गया । लगे खोज खोज के पढ़ने । और लगे होने comment box में लोगों से ...... लट्ठम लट्ठा ।
इसी चस्के में एक दो पोस्ट लिख मारी ।
अब का करें ?
बहना बोली facebook account बनाओ ।
ऊ का होता है ?
उन ने हमारा facebook बना दिया । फिर बोली की पोस्ट ला link copy करके फेसबुक में paste कर दीजिये

link का होता है ? अरे वो पेज के ऊपर जो http लिखा है न वही link होता है । उसको copy कीजिये । copy कैसे करते हैं ?
उस बेचारी ने आधा घंटा हमको फोन पे ही tutorial दिया । पर कमबख्त हमसे copy paste न हुआ । खैर उसने खुद ही वहीं दिल्ली से मेरा ac खोल के paste किया ।
माँ कसम उस दिन जीवन में पहली बार मुझे हीन भावना हुई ....... अजीत सिंह ...... धिक्कार है ऐसे जीवन पे ...... जो कम्पूटर नहीं जानता ........
एक मित्र थे हिसार में ....... देवेन कालरा ...... ऊ कम्पूटर के बड़े प्रकांड बिद्वान थे । लोगों को पढ़ाते भी थे । हमने उनको फोन किया ..... मित्र , हम दो महिन्ना के लिए तुम्हारे पास आ जाता हूँ । तुम हमको copy paste जैसी basic चीज़ सीखा देना । ऊ कमबख्त भी दोस्ती के नाम पे कलंक निकला । हंस के टाल गया । खैर किसी तरह लिखते रहे । धीरे धीरे चिपकना चिपकाना सीख गए ।
blog लिखते और फेसबुक पे चिपका देते । 10 - 20 likes और 2- 4 कमेंट गाहे बगाहे मिल जाते थे । उन दिनों ई आशुतोष कुमार DU वाले जैसों की वाल बड़ी हसरत से तकते थे । इन सालों की पोस्ट पे जब देखो 100 - 150 likes होते । हम सोचते ..... ई साला है कौन ? कैसे इतने likes होते हैं इसके ।

खैर भैया इसी तरह करीब डेढ़ साल तक लिखते रहे । अब इक्का दुक्का फेसबुक पे भी status डालने लगे । हाँ लोगों के पोस्ट पे कमेंट बॉक्स में घुस लट्ठम लट्ठा खूब होती थी । ख़ास तौर पे कम्युनिस्टों से ....
अमरनाथ मधुर , आशुतोष कुमार जैसे कम्युनिस्टों की वाल पे मैं जा चढ़ता और कटहे कुक्कुर की माफिक दौड़ा दौड़ा के काटता । पर इन बेचारों की भी हिम्मत थी ..... इन ने मुझे कभी block नहीं किया ।
इस बीच बहना मेरा अकाउंट manage करती । लोगों के inbox में जा जा के चिरौरी करती ... please like my page ...... उस बेचारी को चिंता रहती थी । वो जानती थी की पार्थ कभी भी कलम दवात कूंच के भग जाएगा ।
खैर इसी तरह चलता रहा ।
एक दिन सुबह उठे तो देखा ....... 60 friend request ......
हमने कहा ई का माजरा है ? वाल पे गए तो देखा कि भाई Padm singh जी ने पोस्ट लिखी है ..... फेसबुक पे मेरे पसंदीदा लेखक ... अलग अलग विधा में ....
उसमे चुटीला लेखन में सबसे ऊपर हमारा नाम दिए । Ajit singh corrupt ......
अब उस लिस्ट में एक से एक धुरंधर थे । सुरेश भाई चिपलूनकर से लगायित रूचि शर्मा त्रिवेदी , सारिक दी , दयानंद पांडे , गौरव शर्मा जैसे बड़े नाम ...... उनमे हमको कोई जानता तक न था ....... बहरहाल ..... 3 दिन में आई कोई 200 friend request .... और देखते देखते likes हो गयो 100 ..... कमेंट बॉक्स में भी लट्ठ चलने लगे ।

हम फूल के कुप्पा । दीवाना मस्ताना हो के दिन रात facebook पे ही पड़े रहते । बीवी जैसे छोड़ के जाती सुबह शाम को वैसा ही पाती । न नहाये न ब्रश किया .......
एक दिन उन ने हमको हड़काया ...... साले कोढ़ी ..... तुमको हम तलाक दे दूँगी ...... हमने उनको खोल के अपनी friend list जो दिखाई ... ये देखो ..... सती तुलसी .....
य्य्ये लो...... दिव्यांशी बरनवाल क्रान्तिका ...... ऐसा ऐसा नाम और ऐसा ऐसा फोटो दिखाए कि मेहरारू हमारी हड़क गयी ....... अरे हेतना स्मार्ट स्मार्ट तुमरी फ्रेंड हैं ...... रूचि शर्मा जैसे ..... ऐसे देखेंगी तो का सोचेंगी ? नहा तो लिया करो कम से कम ......
फिर ऊ भी हमको धीरे धीरे पढ़ने लगी । उनको भी मज़ा आने लगा ।

एक दिन आफिस से लौटी तो पूछी आज का लिखे ? हम कहे आज कुछ नहीं लिखे ।
साले कोढ़ी ...... का करते रहे दिनवां भर ? हम तुमको छुट्टा छोड़े हैं दिनवा भर ...... लिखने पढ़ने के लिए न ? कुछ नहीं लिखे ?
हमने कहा ....... darling हम artist आदमी हूँ । लेखन को ठेले पे थोड़े न बिकता है की गए और ले आये 2 दर्जन post . अरे artist हैं । कुछ अंदर जाएगा तभी न कुछ बाहर आएगा । आज दिन भर पढ़ते रहे ।
तो भैया ......ऊ दिन और आज का दिन ...... तब से अब तक गंगा जी में बहुत पानी बह गया । मोदी PM बन गए ।
उदयन खुल गया । वो जो कभी 3 - 400 दोस्त हुआ करते थे अब 5000 हैं । 6000 follower भी हैं ।

इस बीच सैकड़ों लोग नए आ गए । एक से एक बेहतरीन लिखने वाले । सबकी अपनी अलग शैली । सबके अपने विषय । अक्सर नए लड़के इनबॉक्स में आ के पूछते हैं । भैया tips दीजिये ।
सबसे मैं एक ही बात कहता हूँ ।
अपनी मौलिक शैली अपनाइये । सीधी सरल भाषा में आम बोलचाल की भाषा में लिखिये । बात को सीधा सपाट रखो । उसकी जलेबी इमरती मत बनाओ । बतकही शैली में लिखो । यूँ मानो सामने वाले से बातें कर रहे हो ।
सामने वाले को ये बताने के लिए मत लिखो कि देखो मैं कितना विद्वान् हूँ ।

लेखन का उद्देश्य सीधी सरल भाषा में अपनी बात सामने वाले तक पहुंचाना है ।
likes के लिए मत लिखो ।
सामने वाले को खुश करने के लिए मत लिखो ।
ईमानदारी से लिखो । बेईमान लेखन नहीं होना चाहिए ।
दिल से निकली सच्ची बात ही सामने वाले को छूती है । दिल से दिल के तार तभी जुड़ते हैं ।
यदि आप पूरी ईमानदारी से लिखते हैं तो एक न एक दिन दुनिया आपको पहचान ही लेगी ।
हीरे बनो ....... जौहरी बहुत हैं ..... खोज लेंगे तुम्हें ।

फेसबुक के गर्भ से हज़ारों प्रेम चंद निकलेंगे ।
---

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------