रचनाकार में खोजें...

रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

साहित्य, मानव अधिकार और पंचायतें

SHARE:

डा0 कुमुद शर्मा वि श्व भर में 'लेखक के अंत' की घोषणाओं के साथ-साथ 'मनुष्य के अंत' की घोषणाएं भी हो चुकी हैं। मिशेल फूको की ...

डा0 कुमुद शर्मा

विश्व भर में 'लेखक के अंत' की घोषणाओं के साथ-साथ 'मनुष्य के अंत' की घोषणाएं भी हो चुकी हैं। मिशेल फूको की सोच है कि ' समुद्र के किनारे बनाए गए चेहरे की तरह मनुष्य का निशान मिट जायेगा। लुई आल्थ्युजर भी कह चुके हैं कि 'मानव प्राणी में विश्वास एक घोर ज्ञान-मीमांसीय अनर्थकारी और बुर्जुआ विचारधारा का एक मिथक है।' अपने-अपने बौद्धिक आग्रहों और विमर्शों में इस तरह मानववाद की आलोचनाओं के बावजूद मनुष्य की गरिमा का सवाल, उसकी स्वाधीनता का सवाल उसकी सुरक्षा का सवाल मौजूदा सदी के बड़े सवाल हैं।

आज मनुष्य के चारों और व्यापक हलचल है, शोरगुल है। हाईटेक संचार-माध्यमों की साम्राज्यवादी, वर्चस्ववादी आधुनिकता का प्रचार-प्रसार है। इन सबके बीच मनुष्य का मनुष्य पर से भरोसा उठ गया है। व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। राजनीति का तन्त्रिका तंत्र आम आदमी की अस्मिता को कुचल रहा है। संदेह, भय, असुरक्षा, दबाव और तनाव के चलते व्यक्ति भावात्मक स्तर पर ही नहीं शारीरिक रूप से भी असुरक्षित होता चला जा रहा है। व्यापार, राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मामलों में संघर्ष की स्थितियाँ बन रही हैं।

प्रेमचंद ने कभी कहा था कि 'साहित्य राजनीति के पीछे चलने वाली चीज नहीं हैं, जो उससे आगे चलने वाला एडवांस गार्ड है वह विद्रोह का नाम है जो मनुष्य के हृदय में अन्याय, अनीति और कुरीति से पैदा होता है।' इन पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए कहा जा सकता है कि अन्याय, अनीति, और कुरीति के प्रति विद्रोह का जन्म तभी होता है जब मनुष्य अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो, सचेत हो।

मानव अधिकारों के मूल में नैसार्गिक न्याय (Natural Justice) का दर्शन काम करता है। अरस्तु और सेंट एक्वीनास ने 'प्रकृति को मनुष्य की उच्चतम संभावनाओं' का नाम देते हुए कहा है कि मनुष्य पूर्णता की ओर आकर्षित होता है और उसके अंदर अपने को संपूर्ण रूप से विकसित करने की संभावनाएं होती है; और यदि इन संभावनाओं को कृत्रिम रूप से न रोका जाए तो निश्चित रूप से मनुष्य अपने गंतव्य तक पहुंचेगा।

इस नैसर्गिक न्याय या नैसर्गिक विधान के विरूद्ध कभी हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक संरचनाएँ तो कभी राजनैतिक दुरभिः संधियाँ मनुष्य की उच्चतम संभावनाओं के रास्ते में अवरोध पैदा करके उसकी पूर्णता को बाधित करती हैं। वर्चस्व की मानसिकता, स्वार्थपरता या अन्य कारणों से व्यक्ति के मौलिक अधिकारों, उसके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जाता है। यहीं से भूमिका बनती है न्याय युद्ध की। मानवाधिकार एक तरह से न्याय युद्ध ही है अन्याय के विरूद्ध न्याय का बिगुल। इसका एजेंडा है बेहतर जीवन स्तर के लिए आवश्यक संसाधनों तक मनुष्य की पहुँच हो, स्वस्थ और गरिमापूर्ण जीवन जीने की स्थितियाँ हो, 'स्व' की पहचान के साथ जीने का ऐसा अधिकार हो जहाँ मानवीय योग्यताओं और मानवीय सामर्थ्य का विकास हो सके।

आज हम जिस Humanistic Sociology मानववादी या मानवतावादी समाज शास्त्र की बात करते हैं वह मानव अधिकारों के निहितार्थ को लेकर ही आगे बढ़ता है।

केन प्लेयर ने मानवीय समाजशास्त्र के चार बिंदु गिनाए हैं :-

(1) मानवीय समाजशास्त्र मानवीय व्यक्तिपरकता तथा रचनात्मकता को पर्याप्त महत्व देता है और यह प्रदर्शित करता है कि व्यक्ति किस प्रकार सामाजिक अवरोधों का सामना करते हैं, सक्रिय रूप से सामजिक विश्वों का निर्माण करते हैं।

(2) यह मूर्त मानवीय अनुभवों जैसे वार्तालाप, भावनाओं, क्रियाओं को सामाजिक तथा विशेषतः आर्थिक संगठनों के माध्यम से अध्ययन करते हैं।

(3) यह उन अनुभवों के साथ स्वाभाविक घनिष्ठ संबंधों को प्रकट करते हैं।

(4) अंत में यह समाजशास्त्रियों के नैतिक और राजनैतिक दायित्वों के प्रति आत्म जागरूकता पैदा करता है ताकि वे एक ऐसी सामाजिक संरचना के निर्माण की ओर अग्रसर हों जिसमें न्यूनतम शोषण, दमन और अन्याय हो।

इस तरह मानववादी समाजशास्त्र इस बात पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया चलाने में विश्वास करता है जिससे समाज में परिवर्तन का रास्ता साफ हो सके। जो मानव की गरिमा, उसकी स्वाधीनता और सृजनात्मक क्षमता की रक्षा कर सके।

मानववादी समाज - शास्त्र से साहित्य जुड़ता है। मानववादी समाजशास्त्र से जुड़ा साहित्य मानवाधिकारों के संरक्षण की चेतना जगाता है।

आधुनिक साहित्य के परिदृश्य के मनुष्य की पहचान, गरिमापूर्ण जीवन जीने की आकांक्षा और उसकी मांग बराबर बनी हुई है। नया कवि इसी मांग को मुखरित करत है- 'मैं आदमी बनकर जीना चाहता हूँ/न कि एक क्रम संख्या/और जो कुछ चाहता हूँ कल नहीं/आज पीना चाहता हूँ।'

सामाजिक न्याय या नैसर्गिक न्याय का सूत्र पकड़कर शताब्दियों से पद दलित, शोषित, मजदूर, किसान और स्त्री के दुख दर्द को अभिव्यक्त करनेवाले साहित्य में मानव अधिकारों की चेतना के स्वर दिखाई देते हैं। साहित्यकार की चेतना ऐसे दबावों के प्रति झुकना नहीं चाहती जो मानवाधिकारों का हनन करते हों। जो मनुष्य को उसके मूलभूत अधिकारों और आवश्यकताओं से वंचित करते हों। इसलिए वह आक्रोशात्मक मुद्रा में कहता है- 'हर नंगे आदमी को/ शंकर बना दूँगा/हर अंगुली को त्रिशूल।'

लोकतंत्र की चर्चा हमें गर्व से भर देती है। हर अच्छा साहित्यकार लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के प्रति सचेत होता है। लोकतंत्र को समाज की अखिरी जड़ो तक पहुँचाने वाली सबसे निचली इकाई पंचायत है। इसलिए पंचाचत और गांव समाज हमेशा से ही साहित्य की रचनाधर्मिता का महत्पूर्ण हिस्सा रहे हैं।

पंचायती राज्य संस्थाएं स्थानीय स्तर पर आज भी ग्रामीण क्षेत्र की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं। ग्राम गणतंत्र, लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण सहभागी लोकतंत्र जैसी सैद्धान्तिक अवधारणाएँ पंचायती राज दर्शन के साथ स्थापित की जाती रही हैं। वर्ष 1992 में हुए 73 वें संविधान संशोधन में एक नए पंचायती राज अधिनियम की शुरूआत हुई। नए पंचायती राज के अनुभवो ने के गांव समाज में कौन-सी और कितनी जागृति पैदा की ? आज हिन्दुस्तानी गांव समाज किस बुनियाद पर खड़ा है ? सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मसलों और गांव वालों की सोच का दायरा क्या है ? इन सब सवालों ने हमारे साहित्यकारों को बेचैन किया है, उन्हें आंदोलित किया है। इसी उद्वेलन ने उन्हें गांव की पृष्ठभूमि में लाकर साहित्य सृजन के लिए विवश किया। प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु, मार्कण्डेय ऐसे ही रचनाकार हैं।

साहित्य, मानवाधिकार और पंचायत विषय पर सोच-विचार की प्रक्रिया में सबसे पहले कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी 'पंच परमेश्वर' की याद आती है और याद आते हैं उसके दो प्रमुख पात्र जुम्मन शेख और अलगू' चौधरी। यह कहानी दो भिन्न सम्प्रदायों के मित्रों की घनिष्ठ मित्रता की पृष्ठभूमि में रची गयी है।

पंच परमेश्वर कहानी में जुम्मन की खाला एक फरियाद लेकर पंचों के समक्ष प्रस्तुत होकर रहती है :- 'मुझे न पेट की रोटी मिलती है, न तन का कपड़ा, बेबस बेवा हूँ। कचहरी दरबार नहीं कर सकती। तुम्हारे सिवा और किसको अपना दुख सुनाऊँ ? तुम लोग जो राह निकाल दो उसी पर चलू।' खाला की ये पंक्तियाँ सामाजिक ढाँचे में न्याय स्थल के रूप में पंचाचत की परिकल्पना को परिभाषित करती हैं। न्याय के लिए, अपने अधिकार के लिए, सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए खाला पंचायत बिठाती है। और इस कहानी में यहीं पर मानवाधिकारों की नींव बनती है। पंच की कुर्सी पर विराजमान जुम्मन के घनिष्ठ मित्र अलगू चौधरी मित्रता को ताख पर रखकर न्याय के पक्षधर की भूमिका में जुम्मन के खिलाफ फैसला सुनाते हैं। क्योंकि 'पंच का न कोई मित्र होता है और न कोई दुश्मन।' जुम्मन की पंचायत के लगभग एक महीने बाद ही एक विवाद में अलगू चौधरी को पंचायत बुलाती पड़ती है। सरपंच के पद पर जुम्मन विराजमान हैं। अलगू भयभीत है। मगर पंच के स्थान पर बैठते ही जुम्मन का दायित्व बोध जगता है- 'मैं इस वक्त न्याय और धर्म के सर्वोच्च आसन पर बैठा हूँ। उन्होंने बैर भाव भुलाकर फैसला अलगू के पक्ष में किया क्योंकि 'पंच की जुबान में खुदा बोलता है।' प्रेमचंद की अन्य रचनाओं में हल्कू, घीसू, माधव, होरी, धनिया, सिलिया जैसे पात्रों के चरित्रांकन में मानवाधिकारों की मूल चेतना ही काम कर रही है। फणीश्वरनाथ रेणु के कथा साहित्य में बिहार के ग्रामांचल की प्रामाणिक तस्वीरों में पंचायत के क्रियाकलापों की वास्तविकताएँ उजागर हुई है। इन तस्वीरों में ऐसे पात्रों की कमी नहीं है जो मानवाधिकारों की चेतना से ऊर्जावान हैं।

प्रेमचंद की 'पंच परमेश्वर' कहानी के बाद इसी शीर्षक से रांगेय राघव की कहानी प्रकाशित हुई। प्रेमचंद की कहानी पंचायत प्रणाली की निष्पक्ष न्याय प्रणाली की कहानी हैं, तो रांगेय राघव की 'पंच परमेश्वर' पंचायत प्रणाली की विसंगतियों को चित्रित करती है। यह कहानी इस बात का संकेत है कि पंच भी भ्रष्ट और निकृष्ट वासनाओं में लिप्त हो सकते हैं। जो ठर्रे की बोतल के बदले अपना ईमान बेच सकते हैं। इस कहानी की प्रस्तुत पंक्तियाँ पंचायत प्रणाली में आयी भ्रष्टता का उत्कृष्ट नमूना है- चौधरी पंच ने कन्हाई के घर में प्रवेश किया। कन्हाई ने इधर-उधर की बातें की फिर उठाकर भीतर से एक चीज लाया। चौधरी ने देखा। हंसकर कहा- अरे इसका क्या होगा ?

किंतु कन्हाई ने कहा-तो बात ही क्या है दादा ? कौन पराए हो। और खोल दी ठर्रे की बोतल। अब तो चौधरी ने कुल्हड़ मुँह से लगाते हुए कहा दादा लड़ाई है जे। कौन मंहगा नही हो गया ? मैं नहीं हुआ ? कि तुम नहीं हुए ? अब तो मौत का इतना खरचा है जितना जिंदगी का।

दोनों ही पर हल्का नशा चढ़ चुका था और अब खोपड़ी में घोड़े की सी टाप लगने ही वाली थी। ठर्रे की महक में कन्हाई ने कहा- दादा तुम्हारा ही भरोसा है, चौधरी ने झूमते हुए कहा- अरे काहे की फिकर है तुझे ?

बीसवीं शताब्दी के अंतिम और इक्कीसवीं सदी के शुरूआती दौरे की हिंदी कहानी की परिदृश्य में ऐसी अनेक कहानियाँ हैं जो पंचायत के साथ-साथ नए पंचायती राज की दशा और दिशा के ऐसे यथार्थ को चित्रित करती हैं जो एक किस्म की मानवीयता की मांग पैदा करता है। पंचायती राज के सिद्धांत, विचार, दर्शन, संविधान तथा राज्य सरकारों द्वारा बनाए नए कानूनों और नियमों के बीच गहरी विसंगति है। आदर्श समझी जाने वाली ग्राम पंचायतों में जन-सहभागिता का स्तर न्यून है। आज ये पंचायते एक व्यक्ति या ग्राम प्रधान का अंग बनकर रह गयी हैं।

ग्राम पंचायतों की स्थिति एक सरकारी विभाग जैसी हो गयी है। महिला आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्रतिनिधि के आरक्षण संबंधी मसले गांव में बेचैनी पैदा कर रहे हैं। गांव पंचायतें भ्रष्टाचार का केंद्र बन गयी हैं। आज गांव समाज में जातीय स्तर पर, वर्गीय स्तर पर, संबंधों के स्तर पर, सामाजिक संरचना के स्तर पर, जो जटिलताएं हैं हिंदी के रचनाकार अपने कथा-साहित्य के पटल पर उन सब का साक्षात्कार करा रहे हैं।

लिंग, जाति, वर्ग आदि के संदर्भ में मनुष्य की गरिमा और संघर्ष को लेकर पंचायत के इर्द-गिर्द रचनाकारों ने कथा का ताना-बाना बुना है। इनमें रमणिका गुप्ता की 'दाग दिया सच; भवानी सिंह की 'एक एक कदम; विद्यासागर नौटियाल की 'फट जा पंचधार, सुभाष चंद्र कुशवाहा की 'हाकिम सराय का आखिरी आदमी', कमर मेवाड़ी की फैसला तथा रजत रानी 'मीनू' की 'फरमान' कहानी की जिक्र किया जा सकता है। विद्यासागर नौटियाल की कहानी 'पंचधार' भी पंचायत प्रणाली की विवेकपूर्ण प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लगाती है। यह कहानी दलित स्त्री के संदर्भ में मानवाधिकारों की मांग करती है। इस कहानी में कोल्टा स्त्री रक्खी की जिंदगी की मार्मिक दास्तान है। पंचायत के फरमान पर घर-गांव से बाहर कर दी गयी रक्खी जीवन के अखिरी दिनों में अपना हलफनामा भारत सरकार के एक हाकिम के पास भेजती है- मेरे पास वस्त्र के नाम पर सिर्फ ये चीथड़े है; जो मेरे तन पर हैं ये फट गए हैं और फटते जा रहे हैं। रहने के लिए ये खुली गुफा है। हजारों वर्षों से हमारी पीढ़ी की दो बालिश्त जमीन की तलाश जारी है............ खाने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है, कुछ भी नहीं।' यह दलित स्त्री कामना करती हैं पंचधार फट जाए।

आज दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंचायतों द्वारा भिन्न प्रांतीय तथा अन्तजातीय प्रेम युगलों की हत्याएं मानव अधिकारों के हनन की दर्दनाक कहानियों का परिणाम हैं। इन हत्याओं ने मीडिया के साथ-साथ हिंदी के रचनाकारों को भी आहत और आंदोलित किया है। रमणिका गुप्ता की 'दवा दिया सच' ऐसी ही प्रेम कहानी है। जिसमें गांव पंचायत द्वारा प्रेमी युगल पर हिंसा के ताण्डव का मार्मिक चित्रण हैं। प्रेमी युगल की सामाजिक वर्जनाओं के चलते बलि चढ़ा दी गयी। महावीर-मालती के प्रेम प्रसंग की खबर जब गांव में उड़ी तो मालती के पिता की चेतावनी गूंजी 'मालती का घर से निकलना बंद कर दो। फिर दोनों को साथ देखा तो जिंदा गाड़ देंगे जमीन में।' दोनों के संदर्भ में पंचायत बुलाई गयी। फैसला परम्परा के ठेकेदारों ने किया जलती हुई लुकाटी ली, मालती की साड़ी खींच नंगा कर उसकी जांघों में दाग दिया, दाग दी मालती को कोख, औरत का सच।

गांव समाज के वंचित वर्ग में महिलाएं भी शामिल हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राजनीतिक सत्ता में उनकी भागीदारी के लिए आरक्षण के माध्यम से रास्ता बनाया गया। संसद द्वारा वर्ष 1992 में पारित संविधान का 73 वाँ और 74 वाँ बिल भारतीय महिलाओं के लिए क्रांतिकारी घटना थी। इस नए पंचायती राज अधिनियम में बुनियादी स्तर पर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ आधार सौंपते हुए महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का महत्वपूर्ण काम किया। लेकिन पति, परिवार, सवर्ण, दबंग और संपन्न लोगों के वर्चस्व के चलते पंचायत के निर्णय में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर ही रही। कई राज्यों में महिला सरपंच की जगह पुरूष होने के नाते सचिव स्वयं को अधिक महत्वपूर्ण समझता है। वह महिला सरपंच को भ्रम में डालकर गलत काम करवा लेता। उल्टे-सीधे काम की जांच पर फसती है महिला सरपंच। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के एक गांव की सरपंच ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार तथा प्रशासन में असहयोगपूर्ण रवैये के कारण आत्मदाह कर लिया। इसी परिप्रेक्ष्य में भवानी सिंह की कहानी 'एक-एक कदम' सरपंच महिलाओं में अधिकारों के संरक्षण की कहानी है।

दलित महिला बसंती के सशक्तिकरण की यह कहानी इस बात की गवाही दे रही है कि किस तरह दलित महिलाएं विपरीत परिस्थितियों से टकराते हुए जूझते हुए पितृसत्ता और जाति आधारित संरचनात्मक ढांचे की वर्चस्ववादी मानसिकता के खिलाफ लड़ रही हैं।

साम्प्रदायिक राजनैतिक कारणों से गांव समाज में आ रहे बिखराव को सुभाष चंद्र कुशवाहा की कहानी 'हाकिम सराय का आखिरी आदमी' व्यंजित करती है। भारतीय गांव समाज के अंतर्विरोधों और विसंगतियों के चलते मानवीयता के खत्म हो जाने की पीड़ा इस कहानी में देखी जा सकती है।

वर्षों से गांव वालों को न्याय की दुहाई देती आ रही पंचायतें किस तरह अमानवीय और गैरकानूनी निर्णय देकर मानवाधिकारों का हनन कर रही हैं इसका उदाहरण ही रजत रानी 'मीनू' की कहानी 'फरमान'। चौधरी की भैंस खो जाने पर चरवाहे कर्मवीर को पंचायत द्वारा 'सजा-ए-मौत का फरमान' पंचायत की निरंकुशता की कहानी दर्ज वाला करता है।

इस तरह हिंदी के रचनाकार गांव समाज को अपनी कथात्मक परिधि में समेटकर गांव समाज की पंचायतों में मानवीय सरोकारों, संवेदनशीलता और निष्पक्ष न्याय की लौ को बचाए रखना चाहते हैं। वह गांव समाज की अन्तर्धारा में लिंग, जाति, वर्ग, सम्प्रदाय से संबंधित जहरीले कीटाणुओं को खत्म करके मानव अधिकारों के संरक्षण की भूमिका में बदलाव की तत्परता लाना चाहते हैं।

साहित्य निरंतर जटिल होती जा रही संरचना में खोये हुए मनुष्यत्व की तथा मनुष्यता की पुनर्रचना के लिए प्रयत्नशील दिखाई देता है। जहाँ मानवीयता की खोज का प्रयत्न भी है और मानवतावाद की अवरोधक शक्तियों से जूझने का हौसला और संकल्प भी। साहित्य के सार्थक हस्तक्षेप वहीं है जहाँ व्यक्ति और व्यवस्था तंत्र की अमानवीयता के बीच टकराहत की आवाजें साफ सुनाई देती हैं, जहाँ मानव विशिष्टता को नया आयाम देने की छटपटाहट है। मानवाधिकारों के संरक्षण की चेष्टा ही साहित्य को सार्थक बनाती है 

(मानवाधिकार संचयिका, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से साभार)

COMMENTS

BLOGGER
रचनाकार अब वेबसाइट के साथ साथ एंड्रायड ऐप पर भी.
अपने फ़ोन पर पढ़ने का बेहतर आनंद रचनाकार ऐप्प से लें. गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें.

 image

|ताज़ातरीन_$type=complex$count=8$com=0$page=1$va=0$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लोककथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|आलेख_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|संस्मरण_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=blogging$au=0$com=0$label=1$count=10$va=1$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3753,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,325,ईबुक,181,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,243,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2731,कहानी,2039,कहानी संग्रह,223,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,482,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,82,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,213,लघुकथा,793,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,16,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,302,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1865,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,618,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,668,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,49,साहित्यिक गतिविधियाँ,179,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: साहित्य, मानव अधिकार और पंचायतें
साहित्य, मानव अधिकार और पंचायतें
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2015/06/blog-post_385.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2015/06/blog-post_385.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ