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हास्य-व्यंग्य : सीजन ट्रांसफर का

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- हनुमान मुक्त

 

आकाश में मेघों के छा जाते ही दादुर, मोर, पपीहा चहकना शुरू कर देते हैं और उनकी मीठी-मीठी आवाज सुनकर इन्द्र देवता भी प्रसन्न होकर उन्हें बरसने का आदेश दे देते हैं। सरकार ने भी अपने दादुर, मोर, पपीहा की चहचाहट सुनकर ट्रांसफर (स्थानान्तरण) से बैन (रोक) हटा लिया है और अब ट्रांसफर का सीजन (मौसम) शुरू हो गया है।

देवउठनी एकादशी के बाद से ही जैसे शादी विवाह का सीजन शुरू हो जाता है हलवाई, मैरिज होम आदि की बुकिंग में अचानक तेजी आ जाती है, गर्मी आते ही रेल, बस, हवाईजहाज की रेट्स उछलकर दुगुनी हो जाती है।

सभी होटल और धर्मशालाओं के किराए में वृद्धि हो जाती है। स्कूल, कॉलेज खुलते ही बुकसेलर्स का सीजन शुरू हो जाता है। बरसात आते ही किसानों का सीजन शुरू हो जाता है। चुनाव की घोषणा होते ही छोटे-मोटे नेताओं और अखबारों का सीजन शुरू हो जाता है।

वैसे ही अब नेताजी चौखेलाल जी का सीजन शुरू हो गया है। हर ट्रांसफर कराने वाले अधिकारी कर्मचारी उनके बंगले के चक्कर लगा रहा है। मेला सा रहता है आजकल उनके यहां।

हाईकमान ने भी सरकारी सेवा नियमों को धता बताते हुए, नेताजी की तोंद का ध्यान रखते हुए ट्रांसफर नीति बनाई है जिसमें स्पष्ट उल्लेख है। सरकार की पार्टी से संबंद्ध नेताजी की डिजायर (इच्छा) पर ही ट्रांसफर होंगे।

सीजन में हर आदमी व्यस्त होता है। नेताजी चौखेलाल जी भी अत्यन्त व्यस्त हैं और उनका पी.ए.सक्सेना...। उसकी तो कहो ही मत, बेचारे को खाने-पीने और सोने की भी फुरसत नहीं है।

सक्सेना साहब में अच्छे सहायक के समस्त गुण विद्यमान है। कमाऊ डिपार्टमेन्टों (विभागों) की मासिक रेट इन्होंने वहां होने वाली कमाई के आधार पर ही तय कर रखी है, प्रत्येक कार्यालय से निश्चित तिथि को तय रकम इन तक आ जाती है। पूरी ईमानदारी से उसका हिसाब किताब रखते हुए ये चौखेलाल जी के सामने रखते हैं। विगत पन्द्रह-बीस वर्षों से ये नेताजी के पी.ए. पद पर आसीन हैं।

अभी कुछ दिन पहले मेरी मोटरसाइकिल चोरी हो गई। चोरी की रिपोर्ट लिखवाने मैं थाने गया था। वहाँ देखा कालू, इन्सपेक्टर रामसिंह के सामने गिड़गिड़ा रहा था। कालू की बीबी कच्चे कुएं से पानी निकालते समय फिसलकर गिर गई थी। पंचनामा करने पुलिस पहुंची। मौका रिपोर्ट तैयार की। कालू को जीप में डालकर थाने ले आई, पंचनामा करने।

क्यों वे अपनी बीबी को बहुत परेशान करता था, मारता पीटता था आत्महत्या करने को उकसाने के जुर्म में अभी अंदर करता हूँ। बेचारा कालू! उसे मालूम तक नहीं कभी वह और उसकी पत्नी लड़े हों। हतप्रभ रहकर गिड़गिड़ा रहा था। पांच हजार रुपए निकाल नहीं तो केस यही बनेगा। आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास, अपनी रिपोर्ट लिखवाना तो मैं भूल गया, लगा करने उसकी पैरवी।

तुम्हें पता नहीं यह थाना 50 हजारी है। हर महीने पचास हजार रुपए पहुंचाने पड़ते हैं फिर हमारे भी बीबी बच्चे हैं। अन्य किसी दूसरे बीट (क्षेत्र) में गिरकर मरती तो कम रुपए में काम हो जाता। बेचारी को गिरने से पहले पता नहीं था। चुपचाप खिसक आया बिना रिपोर्ट दर्ज करवाए।

वैसे भी गाड़ी का बीमा खत्म हो चुका था। बीमा कंपनी से रुपए मिलने की आस भी नहीं थी।

कालू ने पैसे दिए या नहीं, मुझे नहीं पता लेकिन वह अपनी दो बीघा जमीन बेचकर बच्चों को लेकर शहर चला गया है, रिक्शा चलाता है आजकल वहाँ।

हम सीजन की बात कर रहे थे। चौखेलाल जी के सामने ट्रांसफर आवेदकों की सूची पड़ी थी। किसने कितने दिए? किसको कहां लगाना है? जिसको हटा कर लगाना है उसकी स्थिति क्या है? सबकी जन्मपत्री सक्सेना साब पढ़ रहे थे। नए अफसर जो ज्यादा बोली लगाकर यहाँ आना-चाहते थे, उनका ब्यौरा भी उनके पास था।

परिवहन, आबकारी, सेल्सटैक्स, इनकम टैक्स, थाना, पी.डब्लयू.डी. कितना दे रहा है, अन्य विभागों के अफसरों की क्या स्थिति है सबका चिट्ठा वे सुना रहे थे। अब महंगाई बहुत बढ़ गई है। माहवारी भी दुगुनी करने का ऐलान नेताजी ने कर दिया। ट्रांसफर सूची में जिनके नियमानुसार पैसे आ गए है उनकी सी.डी बनाकर अभिशंषा करने का आदेश ऑपरेटर को दे दिया।

बाहर बैठक में नगर के व्यापारियों का शिष्टमंडल पूर्ण शिष्टता से उनका इन्तजार कर रहा था। सेल्सटैक्स, इनकम टैक्स और फुड इन्सपेक्टर उन्हें परेशान करते हैं, हर महीने रकम देने के बावजूद भी काम नहीं करने देते। माल पकड़ लेते हैं। इनका तबादला कराओ। आखिर हमारी भी कोई इज्जत है। व्यापारी कह रहे थे।

नेताजी पी.ए.सक्सेना की ओर मुस्कराते हुए व्यापारियों को भरोसा दिला रहे थे कि उनका काम अवश्य हो जाएगा। ट्रांसफर्स का सीजन है।

 

Hanuman Mukt

93, Kanti Nagar

Behind head post office

Gangapur City(Raj.)

Pin-322201

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