मंगलवार, 23 जून 2015

हास्य-व्यंग्य : जातीय-चरित्र

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- हनुमान मुक्त

 

जातियों की उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं। कोई इसे कर्म से मानता है तो कोई इसे वंश से। इतने सारे ऋषि-मुनि, राजा-महाराजा हुए हैं, सब लोग इन्हीं में से किसी को अपना वंशज मानते हैं। सभी को अपनी जाति व वंश पर गर्व है।

अपनी जाति पर गर्व करना अच्छी बात है। इससे व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास का उदय होता है। हालांकि ज्यादातर लोगों का जाति-पांति में विश्वास कम होता है। कहने को उनके लिए सभी जाति के लोग समान होते हैं फिर भी मन के किसी कोने में पड़ा हुआ यह जाति का फैक्टर अपना काम करता ही है।

मेरा भी जाति-पांति में विश्वास कम है। फिर भी अपनी जाति बताना मैं अपना धर्म समझता हूँ। कुछ लोग अपनी दिखावटी प्रतिष्ठा अथवा अन्य किसी हिडन कारण से अपनी जाति छिपा लेते हैं। उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। अपनी जात को छिपाना एक तरह से अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। मैं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने की बेवकूफी नहीं करता और ना ही आपको ऐसी बेवकूफी करने की सलाह दूंगा।

मेरे ऑफिस में एक कर्मचारी है। वह लोगों को मनोविज्ञान को अच्छी तरह पहचानता है। हाथी के दांत दिखाने के अलग और खाने के अलग होते हैं। जब भी कोई नया अफसर वहां आता है या अन्य कोई व्यक्ति किसी काम से ऑफिस में आता है तो वह उन्हें अपनी जात बताना नहीं भूलता। वह कहता है, ‘साब, जात का ‘फलां’ हूँ। अगर आप ‘फलां’ के हाथ का पानी पी सको तो लाऊं। मैं किसी का धर्म भ्रष्ट नहीं करना चाहता। जाने कैसे-कैसे लोग अपना धर्म भ्रष्ट होने से बचाते हैं।’

उसके ऐसा कहने से वह बहुत से झंझटों से बच जाता है और इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम होता है लोगों का धर्म भ्रष्ट होने से बच जाना। किसी को धर्म भ्रष्ट होने से बचाए रखना परमात्मा का सबसे बड़ा उपकार होता है।

एक दिन उसकी लड़की किसी अन्य जात वाले के साथ चली गई। उसने ऑफिस में चर्चा की। हमने पुलिस में रपट लिखाने को कहा। उसने दो-चार दिन इंतजार किया। लड़की वापिस आ गई। हमने पूछा, ‘लड़की किसके साथ गई थी, कहां गई थी?’ उसने कहा, ‘मोहल्ले के बाबूजी के लड़के के साथ घूमने गई थी। घूमकर वापिस आ गई। लड़का और लड़की दोनों ही कागजी नाबालिग है।’

मैंने कहा इससे तो बाबूजी का धर्म भ्रष्ट हो गया होगा। वह बोला, ‘साब, ऐसे कोई धर्म भ्रष्ट होता है क्या? धर्म तो उनका गुलाम है। जब भी ऐसे काम पर जाते हैं धर्म की गठरी को घर की खूंटी पर लटका कर जाते हैं। इस गठरी का वे चाहे जैसे इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र है। कभी भी किसी के भी ऊपर वे इसे उठालें या इसे लात मारे, उनकी मर्जी।’

जात बताने का एक फायदा ओर है। कुछ भी अच्छा करो या बुरा, आपकी जात वाले लोग आपके समर्थन में खड़े हो ही जाते हैं। यदि अपनी जाति के कुछ लोग खड़े होने का विरोध करते हैं तो जातीय संगठनों के पुरोधा कहते हैं कि ‘साला अपनी जात दिखा रहा है।’

हालांकि जात कौन दिखा रहा होता है, यह अलग बात है।

मेरी जाति के एक बड़े अफसर रिश्वत के आरोप में पकड़े गए। जाति के लोगों ने हंगामा खड़ा कर दिया। यह आरोप सरासर मिथ्या है। हमारी जाति के लोग इतनी कम रिश्वत ले ही नहीं सकते। या तो आरोप मिथ्या है या अफसर की जाति मिथ्या है। यह हमारी जाति को बदनाम करने की अन्य जाति वालों की घिनौनी चाल है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। काफी समझाइश से अफसर का आनुवांशिक परीक्षण कर जाति के बारे में सही-सही जानकारी आने के बाद हंगामा शांत हुआ। अफसर हाईब्रिड था, जिस जाति का वह बन रहा था उसमें उस जाति के जींसों की संख्या काफी कम थी। जाति वालों का कहना बिल्कुल ठीक था। उन्हें राहत महसूस हुई। साथ ही यह भी डर सताने लगा कि उनकी जाति को बदनाम करने के लिए गलत लोग उनकी जाति का अपने नाम के पीछे उल्लेख कर रहे हैं और जातीय लाभ उठा रहे हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि हमारी जाति के लोगों को जाति प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले आनुवांशिक परीक्षण किया जाए और सही सिद्ध होने के बाद ही उन्हें जाति प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। इससे हमारी जाति की होती बदनामी पर अंकुश लग सकेगा।

सरकार ने उनकी इस मांग पर गौर करने का आश्वासन दिया है। इसके लिए उन्होंने अन्य जातीय संगठनों को भी पत्र लिख दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि यदि वे भी अपनी जाति के चरित्र के बारे में किसी प्रकार से शंकित हो तो अपनी जाति के पूर्वजों के आनुवांशिक नमूने जमा करवा दें और जातीय परीक्षण करवाने के लिए अपनी जाति के लोगों को तैयार करें, जिससे जातीय संगठनों को बार-बार होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके। अपनी जाति के चरित्र के आधार पर ही व्यक्ति के समर्थन या विरोध का निर्णय कर सके। सरकार ने इसके लिए अलग विभाग बना दिया है। सारी तैयारी पुता है। चुनावों के बाद इस पर अमल शुरू कर दिया जाएगा।

 

Hanuman Mukt

93, Kanti Nagar

Behind head post office

Gangapur City(Raj.)

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