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सीताराम पटेल की कविताएँ - उगाये हुये कुकुरमुत्ता

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आराध्या
जिसको मिलना होता है
मिल लेते हैं
हम चाहकर भी मिल नहीं पाते हैं
वृन्दावन तुम आई
फिर चली गई
कुछ समय पश्चात् मैं आया
मुझे कहते हैं जहाँ से मैं गया
फिर वहाँ वापस नहीं आया
झूठ कहते हैं लोग
झूठे हैं जो ऐसा कहते हैं
सच बताउँ मेरी आराध्या
मैं यहाँ से कभी गया ही नहीं था
क्या कभी तेरे मन से गया हूँ
अगर गया होउँगा तो कहना मेरी आराध्या
जब जब तुमने मुझे याद किया है
तब तब मैं तेरे पास आया हूँ
तुमने कहा था मेरा कान्हा
निहत्था महाभारत में क्या कर रहा है
सच बताउँ मेरी आराध्या
मैं महाभारत में तुम्हें याद कर रहा था
प्रेम क्या कभी भूलने की चीज है आराध्या
प्रेम ही शक्ति है
जिसे मैंने सारा जीवन
अपना तन मन धारण किया है
कोई भी अस्त्र शस्त्र मेरे पास से गुजरते
पर मुझे कुछ नहीं कर पाते थे
वे प्रेम के आगे झुक जाते थे
नमन करके चले जाते थे
मेरी आराध्या
प्रेम कहाँ निहत्था होता है
प्रेम की शक्ति अस्त्र शस्त्र की शक्ति को
शक्तिहीन कर देते हैं
लोग मेरे मुस्कुराते हुए चेहरे को देखते
और उनका शर झुक जाता था
तुम्हीं बताओ मेरी आराध्या
मुस्कुराते हुए चेहरे किसे अच्छे नहीं लगते
तुम्हारी मुस्कुराहट मेरे हृदय में अंकित है
तुम इतनी गोरी की पूनम की चाँद भी
तुम्हें देखकर लजा जाता है
उसमें पाटल रंग की साड़ी
खूब जँच रहा थ तुम्हें
तुम्हारी नयन मेरे नयन से मिले हुए थे
और तुम मुस्कुरा रही थी
तुम्हारी मुस्कुराहट मेरे तन बदन को
रोमांचित कर रहे थे
मेरे तन बदन रस से सराबोर हो रहे थे
एक बार फिर मेरी आराध्या
उस रस से सराबोर होना चाहता हूँ
यमुना के श्याम सलिल में 
जब तुम डुबकी लगाती
तो मेरा मन हरित हो जाता था
कदंब के डाली में छुपा बैठा रहता
तुझे स्नान करते बहुत गौर से देखता
तो मेरा हृदय बाग बाग हो जाता है
तुम्हारे संग जो छोटा सा पल जीया है
मेरी आराध्या वे मेरे जीवन के सबसे अनमोल पल है
उसे मैं अपनी मृत्यु तक भूल नहीं सकता
कैशोर्य के वो मधुर पल
कैसे अपने जीवन से जल्दी ही
गुजर गए मेरी आराध्या
क्या सुख के पल बहुत क्षणिक होता है
या फिर सुख के क्षण बहुत क्षणिक होता है
जब अपने को तिल तिल मरते देखता हूँ
ते मरते हुए प्राणियों के चित्र
मेरे सामने खड़े हो जाते हैं
कितने विवश, कितने लाचार
नहीं जाना चाहते
फिर भी जाते हैं उस पार
अंतिम पल तक ओ सब काम करना चाहते हैं
जो जीवन में कर नहीं पायें हैं
बृहद जीवन गुजार दी हमने
सिर्फ तुम्हारे अनमोल क्षण को समेटने में
लोग प्रेम कों जीवन से पलायन कहते हैं
पर इसी पलायन में सुख मिलता है
चाहे जीवन में कठिन से कठिन परिस्थिति
पर हम इस पल को कभी भुला न पाए
मेरी आराध्या तुम्हारे संग
रात भर रास खेलना चाहता हूं
ये मेरे जीवन के सबसे अनमोल पल है
तुम्हारी गगरिया को फोड़ना
गोरस से तुम्हारा तन बदन भीगना
तुम्हारे भीगे हुए बदन को चाटना
अद्भुत आनंद से तुम्हारा सिहरन
तुम्हारा मिलकर भी न मिलना
हमारा न मिलकर भी मिलना हो जाता है
प्रेम का प्रकाश दोनों के दिल में प्रकाशित है
जिस प्रकाश को हम दोनों स्वर्ग से यहाँ लाये हैं
उस प्रकाश को बादल क्यों ढँक रहे हैं
आओ मेरी आराध्या मिलकर
इस बादल को दूर भगा दें
-----------.

अश्वत्थामा
मानस विहीन और मस्तिष्क विहीन होकर
आज भी जीवित है अश्वत्थामा
सूँघ रहा है सुलेशन
पी रहा है गाँजा और शराब
खेल रहा है सट्टा
किसी एड्स रोगी के साथ
सो रहा है फुटपाथ पर
मवाद और घाव से लथपथ तन
सिर पर जटाजूट
माथे पर बड़ा फोड़ा
लग रहा हो जैसे नाक का जोड़ा
हाथ पाँव हैं ठूँठ
माँग रहा है भीख गाड़ी पर
खाँसी से परेशान
कंकाल का ढाँचा मात्र
आँखे नारियल कटोरी सी गड़ी
माँस है थुलथुल थुलथुल
नजर से है लाचार
मृत्यु से डराता
फिर भी जीने को लाचार
कर रहा जीवन से प्यार
फेंके हुए माल के लिए
छीना झपटी कुत्तों सा
या फिर कुत्तों से ही छीना झपटी
बिलबिलाते नाली से बीन रहे हैं
रोटी का टुकड़ा
खाते ही मानव और पशुओं में भेद मिटा
शिश्नोदर के लिए जी रहे हैं लोग
खा रहे हैं छप्पन भोग
भोग रहे हैं छप्पन भोग
कर रहे हैं भोग
या फिर भोग रहे हैं मालूम नहीं
संवेदनाएँ सब शून्य
रख रहा सबको दायरा संदिग्ध
भाई भाई की लड़ाई
सभी कर रहे अपने को सही सिद्ध
लूट रहा है बेटी बहन माँ की अस्मत
अर्थ के पीछे भाग रहा है हर कोई
प्रकृति को नष्ट कर रहा हर भाई
पहन लिया है कोट पेंट टाई
लूट रहा है अपना सहोदर बहन भाई
मार रहा है अपने ही माँ बाप को
वह क्या समझेगा प्रकृति के श्राप को
आज घूम रहा है वह खुले आम
और कर रहा है अत्याचार
पति का काट दे रहा है लिंग
और पत्नी के योनि में घुसेड़ दे रहा कटार
आज बढ़ गया है यहाँ नशा का व्यापार
नशा ही करवाता है
सबसे निम्न कोटि का काम
फिर नशा वह चाहे किसी का भी हो
धन का, जमीन का, पद का,
ज्ञान का, विज्ञान का
गाँजा का, चरस का, भाँग का
पर करता है वह अत्याचार
धर्म अफीम की तरह बरगलाता है
और मानव में अधर्म फैलाता है
आज कोई भी किसी का नहीं है
किसी का नहीं है यहाँ आज कोई
भाग रहे हैं सभी नशा के पीछे
आज आपस में मची है लूट
जो जितना चाहता है उतना लूट
जल थल नभ में मची है लूट
धरा का कोश हो चुका है अब रिक्त
लूट ले रहा है बेटा माँ बाप को
तो माँ बाप भी कहाँ छोड़ रहे हैं बेटा को
अश्वत्थामा होकर जीने को मजबूर है हर भाई
देना नहीं चाहता बहन को माँ बाप की कमाई
आज लड़ रहे हैं यहाँ हर भाई
आज मीडिया में अश्वत्थामा ही छाया है
पिता द्रोण ने ही प्रक्षेपास्त्र बनाया है
सोते को मार काट करने में हैं माहिर
ये मानव को सुलाना ही जानते हैं
आज हमारा ज्ञान का मंदिर जा रहा किस ओर
विकास की ओर या फिर विनाश की ओर
वासना का मंदिर बना फँसे कुत्ता कुतिया सा
अश्वत्थामा पढ़ रहा है अपने ही छात्रा के साथ
पागल की किताब
पोर्न पिक्चर देख रहा है आग ताप
जो देखते है सिर्फ पोर्न पिक्चर
संसार में भरे पड़े हैं अनगिनत अश्वत्थामाएँ
जो समझ रहे हैं अपने को पहलवान गामाएँ
अश्वत्थामाएँ पैदा कर रहा है और अनेक अश्वत्थामा
अश्वत्थामा
गाड़ी हार्न बजाता है
पों ़़़़़़़़़़़
छुक छुक छुक छुक
पों ़़़़़़़़़़़
पास में खंडहर
अश्वत्थामा
दीवाल फाँदकर निकलता है
लंबे लंबे दाढ़ी बाल
सिर पर चुनरी का पगड़ी
पहना है पजामा और स्वेटर
जिसे देखकर हर कोई जाते डर
वह अपने में मगन
खोज रहा है कचरे के ढेर में कुछ
जो कीमती गया है गुम
आज गुम हो गया है
उसका अपना पहचान
कोई तो उसे बता दे
वह है द्रोण पुत्र अश्वत्थामा

------------.

उगाये हुये कुकुरमुत्ता
माली झूठ बोलता है
हमसे झूठ बोलता है
हम हैं नवाब    
कुकुरमुत्ता हम उगायेंगे
हम सब कुछ उगा सकते हैं
तो भला ये कुकुरमुत्ता क्या चीज है
हमीं ने उगाये हैं
बड़ी बड़ी झोपडि़याँ
क्रंकीट सीमेंट हमीं ने उगाये है
हमने जगह जगह शालायें उगाये है
जिनके द्वारा पूरा बेरोजगारों की टीम उगाये है
जगह जगह पूल उगाये है
जिसमें हमने दरारें उगाये है
हमीं ने गगनचुंबी इमारतें उगाये है
हमीं ने बोनसाई उगाये है
काटकर हमने पेड़ों को अपने महल फर्नीचर उगाया है
हमीं ने लालकिला उगाया है
तुम क्या जानों हमने ताजमहल उगाया है
जाकर पुआल ला
गेहूँ का हो या धान का
उड़द का हो या मूँग का
चना का हो या मटर का
तू जल्दी से जा और पुआल ला
पुआल को छोटा छोटा काट
उसमें डाल तू खाद और पानी
उसमें डाल दे कुकुरमुत्ता का बीज
फिर देख कुकुरमुत्ता कैसे नहीं उगेगा
साला हमसे झूठ बोलता है
बहार तो गोली के यहाँ खा ली
हमारा युवराज हमारे उगाये कुकुरमुत्ता खायेगा
अपने आप उगे कुकुरमुत्ते से ज्यादा स्वाद पायेगा
इसका पकौड़ा उसे बहुत ही भायेगा
या फिर इसको बना रसदार
जिसे खाकर रसना तृप्ति पायेगा
इसे किसी भी हाल में बहार को नहीं देना
वह गोली के यहाँ ही जाकर खाये
माली ने नवाब ने जैसे कहा वैसा किया
कुछ दिनों के बाद उसमें कुकुरमुत्ता उग आया
अब कुकुरमुत्ता उगता नहीं उगाया जाता है
उगाया हुआ कुकुरमुत्ता बहुत ज्यादा मिठाता है
यहाँ हर चीज बिकाउ है
तो कुकुरमुत्ता की भला क्या औकात है
नहीं खाये हो तो जरूर खा लेना
अब बाजार में उगाये हुये कुकुरमुत्ता बिकता है 

. 

Sita Ram Patel

sitarampatel.reda@gmail.com
07697110731

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