शनिवार, 6 जून 2015

कहानी - ज्ञान का लाभ

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बख्त्यार अहमद खाँ

जीवन से डरे अधेड़ों का फिर ठिये पर जमावड़ा शुरू हो गया था।

हाय हल्लो की औपचारिकता को थकी मुस्कुराहट से पटखी देने के बाद राजनीति की वर्तमान दशा की टांग खिचाई शुरू हो गयी। ऐसे में कुछ ख़ामोश खड़े शर्मा जी को खान साहब ने चुटकी लेने वाले अन्दाज में नोटिस किया ।

अमां शर्मा जी ..... बड़े चुप चाप हो भई ..... सब खैरियत तो हैं शर्मा जी ने अपनी मोटी गर्दन घुमाते हुए बुझे अन्दाज में जबाव दिया ....

हां... भई वैसे तो सब ठीक है ..... पर ये तबीयत ठीक नहीं हो रही हैं।

डाक्टर को दिखाया .....? साहनी साहब ने सवाल दाग़ा।

इलाज तो चल ही रहा है..... कुछ उकताते हुए शर्मा जी बोले मगर शुगर कंट्रोल ही नहीं

होती.....

यार शर्मा अपना वजन घटाओ सबसे पहले..... खान साहब ने राय देते हुए शर्मा जी के बाहर निकले पेट में उॅगली घुसेड़ी।

पर कैसे यार .... कैसे करूं वजन कम शर्मा जी बोले।

खान साहब के परिजनों में कई डॉक्टर भी थे। अतः उनके यहाँ डायनिंग टेबिल पर चाहे न चाहे बीमारियों को लेकर बातचीत निकल ही आती थी।

खान साहब उसी आधे अधूरे चिकित्सीय ज्ञान से ओतप्रोत शर्मा जी को ज्ञान बांटने लगे....

देखो ऐसा है... मेहनत तो करनी पड़ेगी..... सुबह उठकर कम से कम 30 मिनट तेज़ क़दम चाल चलनी पड़ेगी.....ओर वो भी कन्सिसटेण्टली ये नहीं कि आज तो टहल लिये ..... और फिर ग़ायब ... फिर कुछ रूक कर खान साहब ने चेहरों का जायज़ा लिया ओर जब यक़ीन हो गया कि उन की बातों का असर हो रहा है तो फिर औेर समझाने लगे।

असल में डायट, मेडीकेशन और इक्सारसायज़ के काम्बो से ही आप इस डायबिटीज़ से लड़ सकते हैं।....

अब दवा तो आप ले ही रहे हो, उन्होने शर्मा जी को ऐसे देखा कि न कहने की शर्मा जी के पास कोई गुंजाइश ही नहीं थी।

फिर आगे बोले और खाने में .... खाने में लो ग्लाइसेमिक इण्डेक्स की चीज़ें लो,

लो ग्लाइसेमिक.....साहनी साहब और शर्मा जी ने प्रश्नवाचक अंदाज़ में देखा।

धाक जमती देख खान साहब ने आगे ज्ञान बघारा

मतलब ऐसी चीज़ें जिनके खाने से ब्लड में शुगर कम मात्रा में घीरे - धीरे रिलीज़ होती है इससे से शुगर की स्पाइक्स नहीं होती जो कि बाड़ी के लिए बहुत खतरनाक है।

अब तक शर्मा जी ज्ञान से ओतप्रोत हो चुके थे। वो तपाक से बोले बाबा जी ने जो जूस बताया है उस का सेवन तो रोज करता हूं।

पर इक्सरसाइज....? खान साहब ने प्रश्न किया।

अब मुझी को ले लो उन्होंने अपनी दुबली पतली कद काया की ओर इशारा किया।

स्पोर्ट पर्सन लाइक फिजीक है।

उन्होंने ज़बरदस्ती मनवाने वाले अन्दाज में पूछा । फिर बोले किसी को पता है लास्ट 20 सालों से डायबिटिक हूं। मगर बताऊं नहीं तो भला कोई समझेगा क्या ?

नहीं नहीं .....मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि तुम भी डायबिटिक हो।

शर्मा जी ने चौंकते हुए कहा ।

बस उसी काम्बो का कमाल है खान साहब ने मुस्कुराते हुए कहा।

पर वॉक के लिए कहां जाऊं शर्मा जी अटपटाते हुए बोले ।

अरे अपनी यह सड़क क्या बुरी है ?

खान साहब ने कॉलोनी की सड़क की ओर इशारा किया फिर मोटीवेट करने वाले अंदाज में डायलाग दागा नियत साबित तो मंजिल आसान अगर ठान लो तो भला क्या मुश्किल

खान साहब की बातें शर्मा जी के भेजे में गहरे तक उतर गई।

उन्हें लगा कि अन्जाने में ही उन्हें डायबिटीज से निपटने का रामबाण मिल गया बस फिर क्या था अगले ही दिन से शर्माजी काम्बो को पूरे मनोयोग से फॉलो करने लगे और टहलना तो उनका कभी छूटता ही नहीं सर्दी बरसात गर्मी आँधी बारिश तूफान मजाल क्या शर्मा जी टहलने ना निकले कॉलोनी की रोड पर बच्चा - बच्चा शर्मा जी की टहल कदमी का क़ायल हो गया।

खान साहब अपने घर की बॉलकनी से शर्मा जी को टहलते हुए पिछले 1 साल से देख रहे हैं। खुद की शुगर तीन बार इन्सुलिंन लेने के बाद भी जस की तस है और वजन भी डायबिटिज के अनियंत्रण की वजह से गिर गया है। मगर अपनी दुबली पतली काया को खान साहब शर्मा जी के आगे डींग मारने के लिए प्रयोग करते हालांकि सारा ज्ञान होने के बावजूद खुद खान साहब का खान पान दावा दारू और एक्सरसाइज का कोई रूटीन नहीं है। आलस्य को छोड़कर वे कभी अपने कम्फर्ट जोन से बाहर नहीं निकल पाये।

दूसरी ओर शर्मा जी ने काम्बो का अक्षरशः पालन किया और नतीजा यह कि विरले ही कभी उनकी शुगर अनियंत्रित होती है।

ज्ञान कितना भी क्यों ना हो अगर अमल ना किया जाए तो वह बेकार है

 

बख्त्यार अहमद खॉ

74 रानी बाग़ शमशाबाद रोड आगरा

9412262496

ba5363@yahoo.com

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