विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

लघुकथा - राज

image

डॉ. नन्दलाल भारती

क्या राज  है, मौन खिलखिलाहट का नरेंद्र  ?

हाशिये के आदमी की नसीब में कहाँ खिलखिलाहट सतेंद्र बाबू । 

चेहरा मौन खिलखिलाहट की चुगली कर रहा है,कोई ख़ास वजह तो है । 

कोई ख़ास नहीं बस एक मुर्दाखोर की याद आ गयी । 

मुर्दाखोर क्या बक रहे हो नरेंद्र ?

सच सतेंद्र बाबू । 

 

कौन है वो अमानुष ?

एक था सामंतवादी,शोषतो की नसीब का खूनी  विभागीय तुगलक विजय प्रताप । जिसके अघोषित फरमान  से हम और हमारे जैसो को तरक्की से दूर बहुत दूर फेंक दिया गया और तो और हम और हमारे के लिए विभाग का दरवजा बंद कर दिया गया  सिर्फ जातीय वैमनस्यता के कारण । 

ये तो ख़ुशी की नहीं शर्म की बात है  नरेंद्र। 

मुर्दाखोरो को कहाँ शर्म आती है सतेंद्र बाबू ? दैवीय चमत्कार ही मानो  एक दिन ऐसे मुर्दाखोरो का गुमान टूटता जरूर है । 

अमानुष विजय प्रताप का गुमान कैसे टूटा ?

उसकी औलादों ने मुंह पर जूते पर जूते दे मारा सतेंद्र बाबू । 

क्या .... ?

 

सच औलादों ने इतने गिन-गिन कर  जूते मारे कि  सामंतवादी,शोषितों  की नसीब का खूनी, तुगलक विजय प्रताप मुंह दिखाने लायक नहीं बचा । 

ऐसा औलादों ने क्या कर दिया नरेंद्र ?

भाग कर अन्तरजातीय ब्याह कर लिया | 

 

डॉ नन्द लाल भारती 

--

नन्दलाल भारती की अन्य रचनाएँ यहाँ पढ़ें

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget