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भारत के विश्व-योग के महासंयोग का दिन

डॉ.चन्द्रकुमार जैन

अंतर राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के ऐलान से बहुत पहले से एक डिफेंस लैब में कुछ विज्ञानी योग पर रिसर्च कर रहे हैं। ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर योग के पीछे का विज्ञान क्या है, इंसानी शरीर और बायोकेमिस्ट्री योग के प्रति कैसे रिएक्ट करते हैं? सेना अपने जवानों को सियाचिन से लेकर थार मरुस्थल में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ख़ास प्राणायाम करा रही है।

एनडीटीवी के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने इस डिफेंस लैब का जायज़ा लिया तो कई रोचक और ज्ञानवर्धक तत्व सामने आये। मसलन आज की तारीख में भारतीय सेना फिटनेस के लिए हिमायल से लेकर समंदर में मौजूद जंगी जहाजों तक योग का अभ्यास करती है। हालांकि इसके पहले कि योग को उनकी ट्रेनिंग में शामिल किया जाए इसकी अहमियत को वैज्ञानिक तरीके से परखा जाना जरूरी है। इसके लिए एक छोटी सी रक्षा शोध लैबोरेट्री योग के पीछे के विज्ञान को समझने की कोशिश कर रही है। यहां आधुनिक योगी से हाईटेक मशीने जुड़ी हैं और इसके जरिए योग के आसनों के दौरान दिल की धड़कनों, ईसीजी, सांस लेने के पैटर्न और तंत्रिकाओं पर होने पर असर पर नज़र रखी जा रही है। ये सारी कवायद पौराणिक जानकारियों से आधुनिक विज्ञान को जोड़ने की है।

वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जब कोई शख्स योग करता है तो उसे फिजिकल ट्रेनिंग के मुकाबले काफी कम ऊर्जा खर्च करनी होती है, जबकि इसका फायदा सामान्य एक्सरसाइज के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। योग खासकर उन सैनिकों के लिए ज्यादा मददगार हैं जो पनडुब्बियों पर तैनात होते हैं। क्योंकि उनके पास रहने और एक्सरसाइज के लिए ज्यादा जगह नहीं होती, इसके अलावा योग दिन और रात के शारीरिक क्रियाओं को बेहतर और सामान्य रखने में मददगार होता है क्योंकि बंद जगह में रहने की वजह से वे इसका फर्क नहीं कर पाते और लगातार ऐसे माहौल में रहने की वजह से कई तरह के भ्रम होना बेहद आम बात है। वैज्ञानिकों ने इस बारे में हुई कई शोधों के नतीजों में ये पाया है कि सैनिकों के लिए योग हर तरह से फायदेमंद है।

श्री बागला के मुताबिक डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज के वैज्ञानिक ने शोध के बाद उन आसनों की पहचान की है जिसकी मदद से ऊंचे हिमालय के माहौल का सामना किया जा सके। रक्षा विशेषज्ञों ने खास तरह के प्राणायामों का एक क्रम तय किया है जिससे सियाचिन में पाकिस्तानी खतरे का सामना कर रहे सैनिकों के फेफड़े की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा योग के कुछ चुने हुए आसनों की मदद से थार मरुस्थल सरीखे किसी बेहद गर्म जगह में खुद को उसके मुताबिक ढालने में भी आसानी होती है। वैज्ञानिकों की टीम जवानों के बायोकेमिकल मापदंडों की जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि सही तरीके से योग करने पर खून में फायदेमंद हारमोन्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

बहरहाल दो मत नहीं हो सकता कि विश्व योग दिवस के माध्यम से सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे योग को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। विश्वभर में योग के प्रति लोगों की बढ़ती जिज्ञासा और आकर्षण को देखते हुये भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने योग को वैश्विक मान्यता दिलाने की पहल की। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान श्री मोदी ने विश्व समुदाय के समक्ष 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 170 देशों द्वारा अप्रत्याशित रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन किया गया। बेशक एनडीटीवी पर श्री पल्लव बागला की यह प्रस्तुति योग विषयक अत्यंत महत्वपूर्ण और शोधपरक जानकारी देती है। उनका शुक्रिया अदा किया जाना मुनासिब है। 

उल्लेखनीय है कि भारत में योग का चलन प्राचीनकाल से चला आ रहा है। योग के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने की दिशा में खोज करते हुये एक शताब्दी से अधिक समय हो गया है। भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 साल पहले हुई थी। योग की सबसे आश्चर्यजनक खोज वर्ष 1920 के शुरुआत में हुई जब पुरातत्व वैज्ञानिकों ने सिंधु-सरस्वती सभ्यता की खोज कर संसार को आश्चर्य में डाल दिया। इस सभ्यता में योग की परम्परा होने के सबूत मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता को 3000 से 1700 ईसा पूर्व माना जाता है। 

मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग की एक जानकारी के अनुसार के अनुसार योगाभ्यास का प्रामाणिक चित्रण सिंधु घाटी सभ्यता के समय की मोहरों और मूर्तियों में मिलता है। योग प्रामाणिक ग्रंथ ‘योग सूत्र’ 200 ईसा पूर्व योग पर लिखा गया पहला सुव्यवस्थित ग्रंथ है। योग आसनों में जहां मांसपेशियों में तनाव-खिंचाव की क्रियाएं होती हैं जिससे शरीर की थकावट तो मिटती है ही मानसिक शांति भी मिलती है। योग से शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, जिससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ और सुदृढ़ बनता है। शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक सभी क्षेत्रों के विकास में योग महत्वपूर्ण है। अन्य व्यायाम पद्धतियां केवल बाहरी शरीर को ही मजबूत बनाने की क्षमता रखती हैं, जबकि योग मानव का चहुंओर विकास करता है।

कहना न होगा कि योग का महत्व बढ़ने का कारण है भागदौड़ भरी व्यस्त दिनचर्या, तनाव और अनियंत्रित खान-पान। योग न सिर्फ चित्त को एकाग्र करता है वरन् शरीर को कई बीमारियों से भी बचाता है। योग तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है साथ में इसे करने में कोई खर्च भी नहीं आता। योग के फायदे देखकर ही विश्व भर में लोग इसे अपना रहे हैं। भारत सरकार ने योग की इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इसे आधिकारिक पहचान दिलाई है। 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है इसलिये दुनिया के अधिकांश देशों में इसका विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन सूरज, रोशनी और प्रकृति का धरती से विशेष संबंध होता है। इसीलिए इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिये चुना गया है। 

योग अगर ज्ञान है तो विज्ञान भी है। मनुष्य अपने जीवन की श्रेष्ठता के चरम पर योग के माध्यम से आगे बढ़ सकता है। योग व्यायाम नहीं, योग विज्ञान है। निःसंदेह भविष्य में योग का महत्व और बढ़ेगा। ये हम सब भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि हमारे ज्ञान-विज्ञान के साथ योग का भी विश्व समुदाय ने लोहा माना है। यही तो भारत के विश्व-योग का महासंयोग है।

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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

लेखक दिग्विजय कालेज के प्राध्यापक,

प्रखर वक्ता और सुविज्ञ साहित्यकार हैं।

मो.9301054300

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