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हास्य-व्यंग्य : प्रभाव बटरिंग वाइरस का

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- हनुमान मुक्त

 

प्रभाव बटरिंग वाइरस का

देश में बढ़ती शिक्षित बेरोजगारी से युवक-युवती और उसके परिवार जन ही नहीं काका कल्लन भी बहुत चिन्तित है। हर वर्ष खुलते स्कूल और हजारों की तादाद में खुलते कॉलेज जिनमें विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक पाठ्यक्रम चल रहे हैं। फिर भी पता नहीं यह महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती ही क्यों जा रही है। काका कल्लन काफी दिनों से इससे परेशान हैं, लेकिन इसका हल उन्हें दिखाई देता सा नहीं लगता।

कुछ औने-पौने युवक-युवती जो हाइली टेलेन्टेड हैं जिनमें प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है वे भी अपने कॅरिअर की शुरूआत के स्थान पर ही अपने आप को बनाए हुए हैं। आगे पहुंच पाने में स्वयं को असमर्थ महसूस कर रहे हैं। हालांकि वे काफी मेहनती व ईमानदार हैं। अपने काम के प्रति पूर्णतः सजग व कर्मठ भी हैं। लेकिन पता नहीं जाने क्यों? वे अपने आपको बहुत आगे तक ले जाने में असमर्थ सा महसूस कर रहे हैं।

काका कल्लन बड़े परेशान हैं उनके भविष्य से। उन लड़कों के कुछ साथी नवयुवकों को उन्होंने (स्वयं ने) जैक-जुगाड़ लगाकर नौकरी दिलाई थी। उन्हीं लड़कों से कहकर मुन्नाभाई स्टाइल में उनका पेपर हल करवाया था। लेकिन आज वे अपने कॅरिअर के ऊंचे पायदान पर पहुंच गए हैं। और ये हाइली टेलेन्टेड युवक वहीं रहकर अपनी कलम घिसाई कर रहे हैं। आखिर ऐसे कौन से कारण हैं जो उन युवकों को आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं और इनको आगे तक धकिया रहे हैं। काका कल्लन के मन में बार-बार यह समस्या उभरती जाती है। लेकिन पुनः-पुनः मन मसोस कर अखबार पर अपनी पैनी दृष्टि डालकर इस समस्या से मन हटाने का प्रयास करते हैं।

चूंकि काका कल्लन बचपन से ही युवाओं के हित चिन्तक रहे हैं इसलिए ज्यादातर युवक-युवती उनकी बात को अक्षरशः मानते भी हैं। येन केन प्रकारेण वे किसी ना किसी रास्ते से समस्याओं का हल निकाल ही लेते हैं।

काका कल्लन ने अपनी इस समस्या को सुलझाने के लिए अपने कुछ पुराने अनुभवी चेलों की एक मीटिंग बुलवाई और उसमें अपनी समस्या को सबके बीच रखा। ऐसे कौनसे गुण हैं, कौनसा पाठ्यक्रम है जो कुछ लॉ प्रोफाइल लोगों को हाइली प्रोफाइल बना देता है। इस बात पर विचार-विमर्श किया गया।

सर्वसमति से तय किया गया कि देश की आजादी के बाद से लेकर अब तक के राजनेताओं, मंत्रियों, मुख्य सचिवों विभिन्न सरकारी और अर्द्धसरकारी आयोगों के अध्यक्षों, आरपीएससी, यूपीएससी, साहित्य अकादमी, विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष एवं मनोनीत सदस्यों, मलाईदार विभागों के ऑफिसर्स, राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर्मियों, कलाकारों इत्यादि की सूची तैयार की जाए।

जीवित व्यक्तियों का स्वयं का एवं जो मर चुके हैं उनके बेटे-बेटियों, पोते-पोतियों, पुत्रवधु, प्रेमिका या अन्य निकट संबंधियों के खून के नमूने प्राप्त किए जाए। जिससे उनकी जांच पड़ताल हो सके कि वास्तव में इनमें अपेक्षाकृत इन्टेलीजेन्सी के क्या कारण रहे हैं। आवश्यकतानुसार ही डीएनए टेस्ट या अन्य कोई शारीरिक या मानसिक परीक्षण आवश्यक हो तो उसे भी कराने में कोई परहेज नहीं किया जाए। आखिर यह हमारे देश के नवयुवकों के भविष्य का सवाल है।

परीक्षण में किसी प्रकार का साम्य एवं परिणाम इन नवयुवकों को ही नहीं अपितु आने वाली संतति को भी आगे बढ़ने के लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगा।

काका कल्लन ने सभा में एक दृष्टि डालते हुए अपनी बात कही।

हालांकि काम काफी बड़ा था। बोरियत से भरा हुआ था लेकिन देश के भविष्य का सवाल था। काम होना था सो सभी लोग जी जान से मन से जुट गए।

ऐसे लोगों की लंबी सूची बन गई। उनके खून के नमूने भी ले लिए गए और आवश्यकतानुसार उनके शारीरिक और मानसिक परीक्षण भी मनोविश्लेषकों द्वारा करवा लिए गए। रिपोर्ट तैयार होकर काका कल्लन के पास आ गई। जैसा कि अंदेशा था वैसा ही हुआ। इनके खून के परीक्षण में एक बटरिंग वायरस सभी में कॉमन पाया गया। जो अन्य सामान्य व्यक्ति के ब्लड में नहीं पाया जाता। साथ ही डीएनए परीक्षण से भी यह बात सामने आई कि जिनमें यह वायरस था उससे संबंधित सभी में यह वाइरस मौजूद था। कुछैक लोगों ने इस बटरिंग वाइरस को इन्जेक्ट द्वारा अपने ब्लड में प्रवेश करवाया था। उनमें अपने काम की योग्यता से अधिक कम से कम एक गुण और पाया गया जिसका प्रयोग वे अपने बॉस को प्रभावित करने के लिए ईश्वर की पूजा करने के समान पूर्णतः समर्पण भाव से करते थे।

यदि बॉस की जूती में कहीं से मिट्टी भी लग जाए जो ये उस मिट्टी को ईश्वर का प्रसाद समझ कर जीभ से चाट जाते थे। इससे बॉस की जूती तो साफ हो ही जाती इनका कद भी बढ़ जाता। इसके अलावा ये अपने अतिरिक्त गुणों से बॉस को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से वैयक्तिक और सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावित करने में पीछे नहीं रहते थे।

इसी का परिणाम था ये स्वयं से अधिक योग्यताधारी व्यक्तियों की तुलना में अपनी उक्त प्रतिभा के बल पर उच्च स्थान पाने में कामयाब रहे। यदि देश के युवकों को इन जैसा बनाना है तो इनके रक्त नमूनों को प्रयोगशाला में सुरक्षित रखते हुए किसी भी क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवक-युवती में इस बटरिंग वाइरस को इन्जेक्शन द्वारा इनके खून में भेजा जाए। इससे निश्चित रूप से इनका ही नहीं अपितु इस देश का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। काका कल्लन ने रक्त नमूनों को सुरक्षित रखने का आदेश दे दिया।

 

Hanuman Mukt

93, Kanti Nagar

Behind head post office

Gangapur City(Raj.)

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