प्रेम कविताएँ - एक तलाश तो पूरी होगी

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सतीश कसेरा

एक तलाश तो पूरी होगी..............

मैंने इसलिये जन्म नहीं लिया है

कि मैं प्रेम करुं, दिल टूटे

मैं रोउं, रातों को जागूं, और

मोहपाश में बंधा-बंधा

बेबस सा होकर रह जाउं।

मुझे तो धरती के गर्भ तक जाना है

छूना है आसमानों को

कुछ बनना है वह, जिसके लिये जन्मा हूं मैं

इसलिये मुझे भटकने दो

ठोकरें खाने दो

रास्तों को जानने दो

मंजिलों को तलाशने दो।

मेरी प्रिय,मेरे पांव में

अपने प्रेम की जंजीर मत बांधो

या तो मेरे लौटने का इंतजार करो

नहीं, तो मेरे साथ चलो

दोनों मिलकर भटकेंगे

तो तुमको मेरी, मेरी तुमको

एक तलाश तो पूरी होगी

 

तू मेरा आधार है..............

है कठिन जीवन बहुत,

चहुं ओर हाहाकार है

बोझ घर का सर पे है,

हर चीज की दरकार है।

बहन शादी को है तरसे,

भाई तक बेकार है

मात-पिता चुप हैं दोनों,

थक चुके लाचार हैं।

मैं अकेला लड रहा हूं,

तीर ना तलवार है

खट रहा हूं, बंट रहा हूं,

घुट रहा घर-बार है।

हौसला देता है मुझको,

एक तेरा प्यार है

तू जमीं, तू आस्मां,बस,

तू मेरा आधार है।

 

मेरे दर्द को तो नहीं छुआ.......

अच्छा हुआ या बुरा हुआ

सब पहले ही से है तय हुआ।

कोई दूर से रहा ताकता

कोई पास हो के भी न हुआ।

मेरे दिल पे हाथ तो रख दिया

मेरे दर्द को तो नहीं छुआ।

मेरी बात वो समझा नहीं

जो कहा था मैंने बिन कहा।

मुझे अब भी उसकी तलाश है

जो मुझमें है कहीं गुम हुआ।

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सतीश कसेरा

अबोहर, पंजाब

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