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तपस्वी की योग साधना का परिणाम ‘विश्व योग दिवस’

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डॉ. दीपक आचार्य

 

योग ऋषि बाबा रामदेव की योग साधना का परिणाम है कि आज सारा विश्व योग की शरण में है। उनके अथक परिश्रम के कारण आज योग की विश्वसनीय संस्था के रूप में पतंजलि योगपीठ ने स्थान बनाया है। योगपीठ से जुड़े भारत स्वाभिमान, पतंजलि ग्रामोद्योग, प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी बुटी उद्यान ऐसे संगठन है जिसके कारण योग को मजबूती के साथ उठ खड़ा होने में मदद मिली 

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जीवन परिचय

स्वामी रामदेव भारतीय योग-गुरु हैं, जिन्हें अधिकांश लोग बाबा रामदेव के नाम से जानते हैं। उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया है। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें प्रायः हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं। रामदेव अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं। भारत से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये अभियान इन्होंने प्रारम्भ किया।

भारत में हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँव में गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर जन्मे रामदेव का वास्तविक नाम रामकृष्ण था। समीपवर्ती गाँव शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। योग गुरु बाबा रामदेव ने युवा अवस्था में ही संन्यास लेने का संकल्प किया और रामकृष्ण, बाबा रामदेव के नये रूप में लोकप्रिय हो गए।

स्वामी रामदेव के कार्य

स्वामी रामदेव ने सन् 2006 में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नाम से दो सेवा प्रकल्प स्थापित किये। इन सेवा-प्रकल्पों के माध्यम से स्वामी रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनके प्रवचन विभिन्न टी० वी० चौनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होते हैं। भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्जरलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग 400 लाख करोड़ रुपये के ‘काले धन’ को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव जी अनवरत लड़ाई जारी है और राष्ट्र निर्माण में भी वो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

इसके अलावा स्वामी रामदेव ने स्वच्छ भारत अभियान में भी भाग लिया। इतना ही नहीं उन्होने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋषिकेश को गोद लेने की घोषणा की।

बाबा रामदेव ने जब 27 फरवरी 2011 को रामलीला मैदान में जनसभा की थी उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुँचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर 5 अप्रैल 2011 से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। 4 जून 2011 को प्रातरू सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ। रात को बाबा रामदेव पांडल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड में घुस गये। 5 जून 2011 को सुबह 10 बजे तक बाबा को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रहा। यह सिलसिला दोपहर तब जाकर रुका जब बाबा ने हरिद्वार पहुँचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बच कर निकलने की पूरी कहानी सुनाई।

 

योग शिविरों का आयोजन

बाबा रामदेव समय-समय पर योग शिविरों का आयोजन करते रहते हैं। अपने योग शिविरों के माध्यम से बाबा रामदेव भारतीय संस्कृति और योग के महत्व को विदेशों में भी जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। अपने इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर भारतीय संस्कृति का और योग का प्रचार-प्रसार किया, जिससे वहाँ पर भी लोग उनसे काफी प्रभावित हुए।

ये मिलें सम्मान

बेरहामपुर विश्वविद्यालय द्वारा स्वामीजी को डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। इंडिया टुडे पत्रिका द्वारा लगातार दो वर्षों से तथा देश की अन्य शीर्ष पत्रिकाओं द्वारा रामदेव को देश के सबसे ऊँचे, असरदार व शक्तिशाली 50 प्रभावशाली लोगों की सूची में सम्मिलित किया गया। एसोचौम द्वारा स्वामीजी को ग्लोबल नॉलेज मिलेनियम ऑनर सहित देश-विदेश की अनेक संस्थाओं व सरकारों ने भी प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किये हैं। राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, आन्ध्रप्रदेश द्वारा स्वामीजी को महामहोपाध्याय की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। ग्राफिक्स एरा विश्वविद्यालय द्वारा योग गुरु बाबा रामदेव जी को ऑनरेरी डॉक्ट्रेट प्रदान की गयी। एमिटी यूनीवर्सिटी, नोएडा ने मार्च, 2010 में डी.एससी. (ऑनर्स) प्रदान की। डी०वाई०पाटिल यूनीवर्सिटी द्वारा अप्रैल 2010 में इन्हे डी.एससी. (ऑनर्स) इन योगा की उपाधि दी गयी। बाबा रामदेव को जनवरी 2011 में महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायण द्वारा चन्द्रशेखरानन्द सरस्वती अवार्ड प्रदान किया गया।

योगऋषि बाबा रामदेव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले आचार्य बालकृष्णजी ने योग व आयुर्वेद को प्रतिकूल परिस्थितियों में पुनः स्थापित करने में अतुलनीय सहयोग किया। योग को पुनर्स्थापित करने में कुछ ओर भी नाम है जिनके प्रयासों के कारण आज विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है।

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- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

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