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मेरे गाँव व गोत्र जाति का इतिहास

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– इतिहासकार श्री आनन्द किरण

उर्फ करनसिह राजपुरोहित

"मैँ आज मेरे पैतृक गाँव शिवतलाव(तहसील-बाली, जिला-पाली,राजस्थान) के निकट अरावली पर्वतमाला की तलहटी मेँ स्थित बिलेश्वर महादेव मन्दिर(मगरा महादेव) गया था। वहां एक शिलालेख देखा। उस पर उलेखित लेख के अनुसार शिवतलाव ग्राम जालोर के सोनीगरा चौहान वंश के युवराज विरम देव द्वारा 13 वी सदी मेँ जगाजी मुथा राजपुरोहित को दिया गया। मुथा राजपुरोहितोँ के आदि पुरूष सोमाजी पालीवाल ब्राह्मण (पाली मारवाड) वंश के है। यह पेशे से लेखाकार (मुनिम) थे। इसलिए इन्हे मुथा पदवी दी गई। पाली के पतन के बाद यह नाडोल के सोनीगरा चौहान वंश के राज्य मेँ लेखा विभाग के प्रधान पद पर अपनी सेवाएँ दी थी। इस के एवज मेँ पांच गाँव घेनडी, पिलावनी, रुंगडी, वणदार व सिवास दिये गये

सोनीगरोँ के जालोर विजय अभियान मेँ सोमाजी उर्फ सोमचन्द्र का योगदान था। सोमाजी का एक पुत्र व सिवास जागीदार जगाजी जालोर राज्य सेवा मेँ रहे। कालान्तर मेँ मेवाड की सरहद पर सोनीगरोँ का एक सुबा या ठिकाणा स्थापित किया गया। जिसका अवशेष देसुरी व बाली तहसील के जुणा व सादडा ग्राम मेँ है। जो संभवतया राठौडो द्वारा खालसा घोषित किये गए। उसी युग मेँ जगाजी को शिवतलाव की जागीरी दी गई। जगाजी के वंशज सौसावत, ठडावत, रगावत, मनावत एवं सुरावत नामक पांच परिवार मेँ विभक्त है। मुथोँ की कुलदेवी रोहिणी माता है।

सौसावत, सुरावत एवं मनावतोँ ने कुलदेव के रूप मेँ परथिया धणी काठबेश्वर महादेव को अपनाया। सौसावतोँ ने वराह मांजी को कुलदेवी के रूप मेँ अभिग्रहण किया गया तथा मनावतो की एक शाखा बाहरोठियोँ ने ठडावत के साथ कुलदेव के रुप मेँ मेवाड के चारभुजा को अपनाया। जो शिवतलाव का सावरिया कहलाया। रगावतोँ ने अपने कुल देव शिवतलाव के महादेव को रखा गया। बिलेश्वर महादेव शिवतलाव वासियोँ के प्रधान आराध्य देव है। अलुणा सोमवार बिलेश्वर का दिन माना जाता है। अनुमान के आधार कहा जा सकता है कि शिवतलाव की स्थापना दिवस अलुणा सोमवार है।"

 

– इतिहासकार श्री आनन्द किरण

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