विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

ईबुक - हिंदी साहित्य की, अकल्पनीय तेजी से उभरती पत्रिका "मंतव्य" का अंक 3 पढ़ें

image

हरे प्रकाश उपाध्याय के संपादन में हिंदी साहित्य की पत्रिका मंतव्य ने अपने शुरूआती 3 अंकों में ही स्पष्ट सा कर दिया है कि किसी साहित्य की पत्रिका को किस संपादकीय कसावट में प्रस्तुत होना चाहिए. इसी वजह से इसके चर्चे चहुँओर हैं. मंतव्य को उत्तरोत्तर प्रगति की शुभकामनाएँ.

पाठकों की सुविधा के लिए हरे प्रकाश उपाध्याय ने इसे ईशू.कॉम पर निशुल्क ऑनलाइन पठन पाठन हेतु प्रस्तुत किया है. वहीं से एम्बेड लिंक प्राप्त कर इसे रचनाकार के पाठकों के लिए यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है. क्लिक टू रीड बटन पर क्लिक कर पढ़ने का आनंद लें. चाहें तो सीधे ही ईशू.कॉम के मंतव्य 3 पृष्ठ पर इस लिंक से जा सकते हैं -

http://issuu.com/mantavya5/docs/mantavya___3

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget