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पप्पू की पतंग

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एलिजाबेथ मैकडोनॉल्ड

हिंदी अनुवाद


अरविंद गुप्ता

पप्पू अपने घर के पास के टीले से पतंग उड़ा रहा था।
अचानक हवा का एक तेज झोंका आया। पप्पू को पतंग
की डोर दोनों हाथों से कसकर पकड़नी पड़ी।
हवा के झोंके ने पतंग को खींचा।
पतंग ने पप्पू को आसमान में खींचा।
पप्पू ने डर से आंखों को मींचा।
पप्पू की सू-सू ने धरती को सींचा।

पप्पू जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
पप्पू भी लिपटा उसके संग।"

दो आदमी सुबह-सुबह अपने कुत्तों
को घुमाने ले जा रहे थे। उन्होंने पप्पू
की मदद करनी चाही। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र,
पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब,
पतंग आएगी नीचे तब।"


फिर उन दोनों आदमियों ने, और
उन दोनों कुत्तों ने
पतंग की डोर को पकड़ा,
यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा,
उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग टीले से उड़ते हुए पार्क में पहुंची।

दोनों आदमी जोर से चिल्लाए
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

तीन औरतें बग्घियों में बच्चों को घुमाने ले जा रही थीं।
वे भी पतंग की डोर के पीछे-पीछे दौड़ीं और चिल्लायीं।
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन तीनों औरतों ने पतंग की डोर को पकड़ा,
यूं कहिए डोर को जकड़ा, पर हवा ने और जोर पकड़ा,
उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग उड़ते-उड़ते जंगल के
पास पहुंच गई थी।

अब उन दोनों आदमियों और तीनों औरतों
ने मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

चार घुड़सवारों ने भी पतंग का पीछा किया। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन चारों घुड़सवारों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग उड़ते-उड़ते नदी के किनारे पहुंच गई थी।

अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों
और चारों घुड़सवारों ने मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

नदी के किनारे पांच मछुआरों ने भी डोर का पीछा किया। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन पांचों मछुआरों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग उड़ते-उड़ते नदी के पुल के पास पहुंच गई थी।

अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों, चारों घुड़सवारों और पांचों मछुआरों ने
मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

छह किसान खेत में काम छोड़कर मदद करने के लिए पतंग की डोर की ओर
लपके। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन छहों किसानों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग पुल से होती हुई बड़े होटल के पास पहुंची।

अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों, चारों घुड़सवारों, पांचों
मछुआरों और छहों किसानों ने मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

सात वेटर मदद करने के लिए होटल से दौड़े-दौड़े आए। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन सातों वेटरों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग होटल से होती हुई बंदरगाह के पास पहुंची।

अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों,
चारों घुड़सवारों, पांचों मछुआरों,
छहों किसानों और सातों वेटरों
ने मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

आठ नाविक बंदरगाह से उनकी मदद के लिए दौड़े। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन आठों नाविकों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग बंदरगाह से होती हुई शहर के पास पहुंची।



अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों, चारों घुड़सवारों, पांचों
मछुआरों, छहों किसानों, सातों वेटरों और आठों नाविकों ने
मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

नौ ग्राहक उनकी मदद के लिए दौड़े। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन नौ ग्राहकों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
पर हवा ने और जोर पकड़ा, उन्हें भी अपने कब्जे में जकड़ा।
अब पतंग शहर से होती हुई फॅायर-स्टेशन के पास पहुंची।

अब उन दोनों आदमियों, तीनों औरतों, चारों घुड़सवारों, पांचों
मछुआरों, छहों किसानों, सातों वेटरों, आठों नाविकों और नौ
ग्राहकों ने मिलकर जोर से चिल्लाया,
"बचाओ-बचाओ, जल्दी आओ,
हवा ने खींची पप्पू की पतंग,
हमें भी लपेटा उसने अपने संग।"

दस फॉयरमैनों ने झट से अपनी सीढ़ी उठाई और मदद करने को दौड़े। उन्होंने कहा,
"हवा चले सर्र-सर्र, पतंग उड़े फर्र-फर्र।
हम डोर खींचेंगे जब, पतंग आएगी नीचे तब।"
फिर उन दसों फॉयरमैनों ने
पतंग की डोर को पकड़ा, यूं कहिए डोर को जकड़ा।
फिर उन्होंने पतंग की डोर को पूरा दम लगाकर खींचा।

तभी अचानक हवा चलना बंद हो गई।

कुछ देर बाद सब लोग उठकर खड़े
हुए। फिर सब लोग मिलकर पप्पू के
बगीचे में पार्टी के लिए गए। तब हवा
एकदम शांत थी


पर इस घटना को लोग कभी नहीं
भूले। वह दिन जब
हवा के झोंके ने पतंग को खींचा
पतंग ने पप्पू को आसमान में खींचा….
 

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(अनुमति से साभार प्रकाशित)

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