सोमवार, 13 जुलाई 2015

सफलता पाने का मूल मंत्र - उचित मनोवृत्ति

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वर्तन-परिवर्तन

- हर्षद दवे

१४. मनोवृत्ति

सफलता पाने का मंत्र है: अविलम्ब निर्णय लेना. जल्दबाजी में नहीं, किन्तु यथासमय शांत चित्त से, अच्छी तरह सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए. और सरल व्यक्तित्व पाने के लिए घुमाफिराकर अस्पष्ट ढंग से बात करने के बजाय अपनी बात स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करनी चाहिए, अपने विचार स्पष्ट रूप से प्रकट करने चाहिए.

यदि आप सक्सैसफुल सेलिब्रिटी बनना चाहते हैं तो इन दो बातों का ध्यान रखिए क्यों कि ऐसा करने से कोई घाटा तो नहीं होता, हाँ फायदे ढेर सारे हैं. आईए एक उदाहरण से इस बात को ठीक से समझ लेते हैं: एक ऑफिस के कोर्पोरेट ऑफिस में प्रबंधक से मिलने कइं लोग आते हैं. कोई पहली बार मिलने के लिए आए हुए होते हैं. अपनी व्यस्तता के बीच भी समय निकालकर वह उस की बात सुनता है. मान लीजिए वह किसी काम से आया हुआ है. आम तौर पर प्रबंधक उसकी बात पर सोच विचार करने का कुछ समय चाहता है, पर यह प्रबंधक ऐसा नहीं करता यदि अत्यंत आवश्यक हो तो डिस्कसन के लिए कुछ वक्त जरूर लेता है. ऐसे किस्सों में भी उसे कुछ जवाब तो मिल ही जाता है. उचित निर्णय ले कर वह उसे बता देता है और शेष बात उस पर छोड़ देता है. उचित मनोवृत्ति से यहां बहुत फर्क पडता है.

सामनेवाली व्यक्ति भी तुरंत यस या नो कह कर बात खत्म कर देती है.

अब इस मनोवृत्ति के फायदे देखिए. प्रबंधक निर्णय ले लेता है इसलिए उसका काफी समय बचता है, दूसरी व्यक्ति को भी अपनी तरफ से कुछ सोचकर फैसला लेने में सरलता हो जाती है. मान लीजिए कि वह उसे दो-तीन दिन के बाद मिलने के लिए कहता है. फिर शायद, किसी भी कारण से व्यत रहने से वह पांच-छः दिन तक मिल नहीं पता है तो यह संभव है कि उस व्यक्ति के मन में प्रबंधक बारे में उलटे सीधे विचार आने लगे. शायद वह उसकी मजबूरी को समझे बगैर ही प्रबंधक के बारे में कोई गलत राय कायम कर ले यह भी संभव है. और एक बात, जिस निर्णय को प्रबंधक आज नहीं ले रहा, वही निर्णय उसे दो, पांच या दस दिन के बाद तो लेना ही पड़ेगा, तो फिर आज क्यों नहीं?

सफलता के लिए सही मनोवृत्ति आवश्यक है. केवल सही मनोवृत्ति और खुद पर भरोसा ही सफलता के पायदान हैं! सही मनोवृत्ति के अंतर्गत सही निर्णय लेना जरुरी हो ऐसी बात को अनिर्णीत न रहने दें और खुद स्पष्ट बने रहे. किसी को टरकाने से समय तो बर्बाद होता ही है और अपनी छवि भी खराब होती है. इस से तो अच्छा है 'कल करे सो आज कर'... इस से वक्त रहते कार्य सरलता से निपट जाता है और आप समय और सफलता के अधिकारी बन जाते हैं.

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हर्षद दवे

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