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डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम को रचनाकार के पाठकों व रचनाकारों के श्रद्धा-सुमन


स्वर्गीय श्रद्धेय डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम हर भारतीय के दिलों में रचे-बसे थे. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चहुँ ओर से उनके लिए श्रद्धा-सुमन अर्पित किए जा रहे हैं. रचनाकार के रचनाकारों-पाठकों ने भी अपने दिल के उद्गार प्रेषित किए हैं. उन्हें इस पृष्ठ पर संजोया गया है. जिन्हें आप नीचे पढ़ सकते हैं.

गुलजार साहब ने अपनी आवाज़ में कलाम साहब की जीवनी बताई है. आप नीचे दिए यू-ट्यूब वीडियो से इसे सुन सकते हैं -



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महावीर उत्तरांचली

एक युग का अवसानहे महान आत्मा !
आपको शत-शत नमन!!

अंततः आठ दशकों की
यह अनवरत यात्रा थम ही गई

आप भी हो गए चिरनिद्रा में लीन !!
यूँ  लगता है जैसे — एक युग का अवसान हो गया है!



सही अर्थों में आप भारत रतन थे!
आपका कद हर सम्मान से ऊँचा था;
"भारत रतन" आपके नाम के साथ
जुड़कर स्वतः ही
सर्वोच्च हो गया / सार्थक हो गया !
आपकी यात्रा भले ही थम गई है;
लेकिन क्या थम सकेगी कभी, अग्नि की उड़ान !
वह अग्नि जिसे पाकर देश—
गौरवान्वित हुआ / भयमुक्त हुआ


क्या कभी हो पायेगा राष्ट्र उऋण इस ऋण से !
धन्य वह राष्ट्र, धन्य वह माता जो ऐसे "लाल" जनती है।
     —
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क़ैस जौनपुरी
तुमने सुना?
दुनिया से एक नेक इंसान कम हो गया...
कौन?
कौन....क्या कहूँ...?
कलम की ताक़त कलाम
मुस्कुराने की आदत कलाम
बच्चों के प्यारे कलाम
ए पी जे अब्दुल कलाम

वो जो हमेशा मुस्कुराते रहे
आगे बढ़ना सिखाते रहे
आख़िरी दम तक भी वो
जीना क्या है बताते रहे
ऐसे थे वो नेक इंसान
पहुँचे उनको मेरा सलाम

गवाह है पूरा हिन्दुस्तान
थे वो राष्ट्रपति महान
काम था जिनका बाँटना ज्ञान
कर्मभूमि जिसकी विज्ञान
ऐसे थे वो नेक इंसान
पहुँचे उनको मेरा सलाम
 
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image
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इतिश्री सिंह राठौर
 
सलाम कलाम
ओ सपने बेचने वाले कहां चले गए तुम
छोटी-छोटी ख्वाहिशों को देकर नया आयाम
तुम्हारे संघर्ष की दास्तां से लेकर दिलेरी की कहानी
तक को करता है आज पूरा मानवता सलाम
दुआ करते हैं पूरी शिद्दत से  कि
भारत का हर बच्चा हो तुम जैसा,
कलाम
     -श्री
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मुकेश कुमार

लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
गाथा गायी तेरी अग्नि ने
समन्दर की रेत पर
यों ही चलते रहना अब्बा की नाव की तरह
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
बनकर एक नया जन्म लेना तुम
माँ के त्याग का गुणगान करना
रहकर अब्बा संग तुम परछाईं बनना
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
कलम के कलाम हों तुम
प्रकृति के रखवाले हो तुम
जूही के फूल हो तुम
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
इंसान के रूप में भगवान हो
कौन कहता हैं भगवान नहीं होते
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नही हैं मेरे पास
बताते जाओ मुझे मैं कहा मिलूँ तुम्हें
तुमने कहा था रातों के सपनों में नहीं
दिन के उजाले खुली आँखों के सपनों में
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
यही इंतज़ार करुँ रामेश्वरम के तट पर
मस्जिद की चादर पर या मन्दिर की गेट पर
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
कहते हैं की बंज़र जमी में पेड़ नहीं होते
गलत हैं कहने वाले मैंने तो तुम्हें फूल उगाते देखा।
एक आदर्श हों
जो तुम्हारे बताये  पथ पर चलें।
एक शिक्षक हो
जिनसे ये दुनिया सीखी हैं।
लिखना चाहता हूँ कागज़ पर
कलाम तुम्हारे बारे में...
शब्द नहीं हैं मेरे पास
तुम आत्मा हो परमात्मा की
तुम जीवन हो शून्य धरा की
कलम के कलाम हो तुम
--
मुकेश कुमार
राधाकिशन पुरा, सीकर,
राजस्थान,भारत
332001.

mukeshkumarmku@gmail.com
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कुलदीप ठाकुर
जय कलाम
जय कलाम
आज मेरी कलम भी
कुछ लिखना चाहती है
तुम्हारे बेदाग चरित्र पर।

तुम जैसे
पथ प्रदर्शक
पंडित और ज्ञानी
नहीं आयेंगे बार बार।

देखो आज तो
ये बच्चे भी
नहीं खेलना चाहते खिलौनों से
बस रोना चाहते हैं।
तुम्हारे द्वारा
एक साथ रखी हुई
गीता और कुराण  अब न अलग होगी कभी भी।

दिये हैं जब से
तुमने हमे वो उपहार
नहीं लगता है डर
किसी विश्व शक्ति से।

वर्षों बाद  आज फिर से
लगा यूं
गया है कोई युगपुरुष।

पर तुम्हारा
अनंत विस्तार लिखने के लिये
मेरी  कलम के पास  शब्द नहीं है।

मैं और मेरी कलम
आज दोनों मिलकर
तुम्हें शत शत
नमन करते हैं
कुलदीप ठाकुर
EmaiL: kuldeepsingpinku@gmail.com

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बलबीर राणा "अडिग" 
****कर्म कलाम बन जाए****
देखो हंगामा के स्क्युलरो या ओबेसी
आँशुं यूँ नहीं निकलते डर से या बेवसी।

सच्चे मुसलमान के लिए आज राष्ट्र रो रहा है
माँ भारती के आँखों का वो तारा जा रहा है ।

बात किसी हिन्दू मुसलमान की नहीं
बात किसी जाती धर्म सम्प्रदाय की नहीं।

बात राष्ट्र धर्म सर्वोपरि और ईमान की है
मानवता के जो लिए जिये उस इन्शान की है।

ऋषि योगी पैगम्बर जो सम्पूर्ण अवतार था
गीता कुरान का एक बंध एक सार था।

एक दिन धरती पर मिटटी सबको त्यागनी है
कर्म कलाम बन जाए सबको पढ़नी यही कहानी है।

#श्रधांजलि_डा_कलाम

@ बलबीर राणा "अडिग"


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