अनुपम सौंदर्य बिखेरता है पलायथा

- डॉ. दीपक आचार्य

image

कोटा संभाग नैसर्गिक सौंदर्य के मामले में कहीं उन्नीस नहीं है। नदियों, पहाड़ों, हरियाली, पानी और सेहतमंद आबोहवा से लेकर मुग्ध कर देने वाले रमणीय परिवेश के साथ ही ऎतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और बहुविध लोक सांस्कृतिक आयामों की दृष्टि से भी यह बेमिसाल है। 

image

हाड़ौती क्षेत्र अपने आप में साहित्य, संस्कृति और पुरातन परंपराओं का इतना बड़ा जखीरा समेटे हुए है कि यह हर मामले में बेमिसाल ही कहा जा सकता है।

कोटा संभाग का हर जिला अपने आप में कई विशिष्टताओं को लिए हुए है। इन्हीं में बाँरा जिला है जो कई पुरातन संपदाओं और परंपराओं को समेटे हुए प्राच्य धरोहरों की कीर्तिगाथा सुना रहा है

image

इन्हीं में कालीसिंध नदी के मुहाने बसा पलायथा प्राचीन महत्त्व का क्षेत्र है। प्रकृति और पुरातन इतिहास का मेल दर्शाने वाला यह कस्बा काफी पुराना है और यह सिद्ध करता है कि किसी जमाने में इस क्षेत्र में सामाजिक, सांस्कृतिक और ऎतिहासिक दृष्टि से कोई बड़ा गढ़ रहा है।

image

पलायथा के प्राचीन महल देखने लायक हैं। इनमें बेजोड़ शिल्प स्थापत्य का दर्शन होता है वहीं पलायथा की प्राचीन छतरियाँ भी कलात्मकता के साथ-साथ पूर्वजों की परंपरा से जोड़ती हैं और गौरव का अहसास कराती हैं।

image

दूर-दूर तक पसरी कालीसिंध नदी का वैभव हर क्षण प्रकृति की महिमा का जय गान करता नज़र आता है। कस्बे से लगा दोहरा पुल जहाँ आधुनिक विकास का स्पष्ट प्रतीक है वहीं कालीसिंध का जल सौंदर्य निहारते हुए इन समानान्तर सेतुओं पर से होकर गुजरना और तनिक देर सेतु पर रुके रहकर आक्षितिज पसरी नैसर्गिक छटा का विहंगम दृश्यावलोकन भी अपने आप में अलग ही छटा  दर्शाता है।

image

हाड़ौती क्षेत्र  भर में इसी प्रकार के ढेरों स्थल हैं जो बहुआयामी लोक जीवन के साथ सुनहरे परिदृश्य का दिग्दर्शन कराते हुए हर किसी को भीतर तक आह्लादित कर देने का सामथ्र्य रखते हैं।

image

---000---

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.