रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

असंभव को संभव बनाएं

image

डॉ. दीपक आचार्य

 

आम तौर पर हम सभी लोग उन्हीं कामों और गतिविधियों में हाथ डालना पसंद करते हैं जिन्हें करना आसान होता है।

हमारे भीतर बहुत कुछ पा जाने की तमन्ना तो होती है लेकिन उसे पाने तक के लिए जरूरी संयम, धैर्य और गांभीर्य हम रख नहीं पाते।

जल्द से जल्द सफलता पा जाने के चक्कर में हम सभी लोग धैर्य खो बैठते हैं, उतावलापन ले आते हैं और अपेक्षित गंभीरता रख नहीं पाते।

यही वजह है कि हम उन आसान से कामों को ही हाथ में लेते हैं जिनमें समय, धन या परिश्रम अधिक नहीं लगता लेकिन सफलता का ग्राफ सीधा और सामने दिखने लगता है।

यही कारण है कि अधिसंख्य लोग उन कामों से दूर भागते हैं जिन्हें वे नहीं करना चाहते हैं। इच्छा बगैर के काम सामने आ जाने की वजह से ही लोग तनावोें में आ जाते हैं और उद्विग्न होकर मायूसी ओढ़ लिया करते हैं। 

दुनिया में कई सारे काम ऎसे हैं जिन्हें हर कोई असंभव जरूर मानता है लेकिन एक बार उसमें रुचि जागृत हो जाने के बाद अपने आप उस काम में मन लगने लगता है और हम उसे अच्छे ढंग से कर पाने में खुद को सक्षम महसूस करने लगते हैं।

और धीरे-धीरे हम इतने अधिक रमने लगते हैं कि जो काम हजारों-लाखों लोगों को मुश्किल और असंभव लगता है, वह हमारे लिए बाँये हाथ का खेल होकर रह जाता है।

हमारी पूरी जिन्दगी में हम बहुत सारे ऎसे कामों के बारे में जानना या करना तक पसंद नहीं करते हैं जिनके बारे में हम अपनी यह पक्की और निर्णायक आत्म धारणा बना चुके होते हैं कि ये काम हमारे बूते में हैं ही नहीं बल्कि सर्वथा असंभव ही है। बस यहीं से हम इन कामों से सायास और पूरी सतर्कता के साथ दूरियां बना लेना आरंभ कर दिया करते हैं।

यह स्थिति हम सभी की बहुमुखी क्षमताओं को कम करती है, आत्महीनता लाती है और दुनिया के उन तमाम विषयों से दूर रखती है जिनसे हम अनभिज्ञ हैं तथा हमारे लिए और सृष्टि के लिए इनकी जानकारी का होना अथवा इनमें दक्षता पाना अत्यन्त लाभदायी सिद्ध हो सकता है।

कई बार हमारी असफलता के पीछे यह भी एक कारण होता है जिसकी वजह से रोजमर्रा की जिन्दगी या जीवन निर्वाह की गतिविधियां अभिशप्त भी हो सकती हैं।

दुनिया में ऎसा कोई काम नहीं है जो इंसान के लिए कठिन हो। हर काम में मुश्किलों का आना स्वाभाविक है। लेकिन यह भी सत्य है कि इन कठिनाइयों के दौर में भी निरन्तर अभ्यास और एकाग्रता से आदमी किसी भी मुश्किल से पार हो सकता है।

आज जरूरत इस बात की है कि हम किसी भी कार्य को कठिन और असाध्य न मानें बल्कि उसके प्रति रुचि जगाना आरंभ कर दें। इसी से  हमारे मन के वहम दूर होंगे और किसी भी कठिन कार्य को करने की ओर चित्त प्रवृत्त होगा।

इंसान वही है जो मुश्किलों को आसान कर दे और कठिन से कठिन कामों को अपनी इच्छाशक्ति व मेधा-प्रज्ञा से सरलीकरण कर पूर्णता प्रदान कर दे।

जो काम मुश्किल लगे उसे अपनाने की कोशिश करें और उसे हाथ में लें। यह इंसान के लिए चुनौती है जिसे स्वीकार करना हमारा फर्ज है।

एक बार किसी भी काम को हाथ में ले लिया जाए तब अपने आप भय और आशंकाएं दूर हो जाती हैं। यही स्थिति हमारे जीवन में डर और हिचक की है।

जिससे भय लगे, घबराहट हो उसके बारे में जानने का प्रयास करें, उसके करीब जाएं, भय के कारणों को समझें तथा मन-मस्तिष्क के भीतर से अज्ञात भयों को बाहर निकाल फेंके। जो अपनी किसी भी प्रकार की हिचक को दूर कर लेता है वह बिन्दास जीवन जीने का अधिकारी हो जाता है।

अपने भीतर समाहित महान ऊर्जा और परमाण्वीय शक्ति को जानें तथा कर्मयोग को सुनहरा आकार देने में आगे आएं। दुनिया को दिखा दें कि इंसान सब कुछ कर सकता है, वह मात्र हाड़-माँस का पुतला नहीं सर्वशक्तिमान का अंश है।

---000---

 

---000---

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

--

(ऊपर का चित्र - अमृतलाल वेगड़ की कलाकृति)

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget