विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था में भाषाओं का योगदान

-अंकिता आचार्य पाठक, जबलपुर।

भाषा और समाज का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है। दोनों की अस्मिता एक दूसरे से बनती है। भाषा की उत्पत्ति समाज से होती है तथा उसका विकास भी समाज में ही होता है। समाज में भाषा शिक्षण का माध्यम भी भाषा होती है। देश का एक प्रमुख उद्देश्य है लोगों को शिक्षित करना जिससे एक अच्छे समाज का विकास हो सके। देश में कई शिक्षण संस्थान खोले गए हैं जिनमें से एक उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय नामक शिक्षण संस्थान पं. मदन मोहन मालवीय जी ने 1916 में स्थापित किया। इस विश्वविद्यालय में देश विदेश से छात्र-छात्राएँ शिक्षा ग्रहण करने आते हैं अतः काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में कई भाषाओं के माध्यम से शिक्षण कार्य सम्पन्न होता है। जिनमें हिन्दी अंग्रेजी माध्यमों का वर्चस्व है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन तक छात्रों को हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनो माध्यमों में शिक्षा दी जाती है, तथा पो.ग्रेजुएशन में शिक्षा का अधिकांशतः माध्यम अंग्रेजी हो जाता है। संस्कृत विभाग में छात्रों को संस्कृत भाषा पढ़ाई जाती है तथा बी.ए. तक के छात्रों के लिए यह सुविधा दी जाती है कि वे अपने लेखन का माध्यम हिन्दी तथा संस्कृत दोनों रख सकते हैं परन्तु एम.ए के विद्यार्थियों को संस्कृत में ही लेखन कार्य करना आवश्यक होता है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रत्येक विषय के अलग अलग विभाग हैं। हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, पाली, भाषाविज्ञान, तमिल, तेलुगु, मराठी, उर्दू, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, अरबी, पुरातत्वशास्त्र, बंगला इनके अलावा विदेशी भाषाओं का शिक्षण भी होता है जैसे फ्रेंच, जर्मन, जापानी भाषा, थाई, स्पेनी भाषा, इतालवी, पोलिश, हिब्रू (इजराइल), स्वाहिली (अफ्रीका), सिंहली (श्रीलंका) ।

बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले साधुओं (विद्यार्थियों) के लिए पाली भाषा सीखना आवश्यक है अतः काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पाली शिक्षण के लिए पाली विभाग भी है। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले देश-विदेश के लोगों के लिए भारत आना तीर्थयात्रा के समान है। यहाँ आकर ये लोग सारनाथ, कुशीनगर, लुंबनी, बोधगया, नालंदा, राजगीर आदि बौद्ध स्थानों पर अवश्य जाते हैं। इन स्थानों पर बौद्ध धर्म के अवशेष और स्मारक अवश्य पाए जाते हैं। पाली भाषा एवं बौद्ध धर्म के कारण इन देशों और भारत वर्ष के बीच अत्यंत सोहार्द्रपूर्ण संबंध हैं।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय भोजपुरी भाषी क्षेत्र में बसा है अतः भोजपुरी क्षेत्र में होने के कारण कई विद्यार्थियों की मातृभाषा भोजपुरी है तथा कई अध्यापक भी आपस में संवाद भोजपुरी भाषा में करते हैं। लेकिन छात्रों के पठन पाठन के लिए मानक हिन्दी तथा अंग्रेजी का प्रयोग किया जाता है। विदेशी भाषाओं को पढ़ाने के लिए अध्यापक भी विदेशों से आते हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए लाइब्रेरी की भी व्यवस्था है जहाँ हर भाषा में किताबें उपलब्ध हैं। लगभग सभी विषयों की किताबें छात्रों के लिए प्रति दिन उपलब्ध रहती हैं ताकि छात्रों को पढ़ने के लिए उचित साधन मिल सके।

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget