सोमवार, 20 जुलाई 2015

बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के शिवलिंग जैसे यूरोप में भी बर्फ के अजब-गजब शिवलिंग

- राजकुमार यादव

clip_image002[4]
प्रकृति के अद्भुत रहस्यों से अनजान आम श्रद्धालुओं में चमत्कारों को नमस्कार करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है | गौरतलब है कि ऊंचे-ऊंचे निर्जन शिखरों पर चरागाहों की खोज में सर्वप्रथम भेड़-बकरी आदि पहुंचे और इन्हीं पशुओं के पगों का अनुसरण करते हुए मानव ने चल-चलकर वहां पगडंडियाँ निर्मित की | भारतीय जीवन-शैली में प्रकृति प्रदत्त गुफाओं अथवा पहाड़ों की शिलाओं में स्व-निर्मित उभरी हुई उत्कृष्ट देव-स्वरूप प्रतिमाओं के प्रति बलवति होती अटूट अंधी धार्मिक आस्थाएँ और विश्वास इन्हीं पगडण्डी नुमा परम्पराओं को परिलक्षित करती है |

भेड़ों के झुण्ड जैसी भीड़ के साथ चलने में परम्परावादी मनुष्य अपने आपको सदा सुरक्षित पाता है, क्योकि उसे जीना-मरना तो इन्हीं के बीच है | किन्तु कुछ बिरले ऐसे भी होते हैं जो तथ्य को अपने विवेक से जाने बिना परम्पराओं के दल-दल में अपने पग नहीं बढ़ाते | प्रज्ञावान मनीषियों ने उचित ही कहा है कि – जो तथ्य को नहीं जान सकता, वह सत्य तक भी कभी नहीं पहुँच सकता | हालाँकि पौराणिक कथाओं में शिवालिक पहाड़ियों में शिव-महिमा का अलौकिक गुणगान बेशुमार है | किन्तु अमरनाथ की गुफा में प्रति वर्ष नियत अवधि की ऋतु में प्रकृति द्वारा निर्मित गोलाकार स्तम्भनुमा शिवलिंग के सन्दर्भ में वैज्ञानिक पहलुओं पर चिंतन भी विचारणीय है |


मित्रों, अपनी धुरी पर घूमती धरा का चुम्बकीय आकर्षणों से हलचल मचाता धधकता हुआ आंतरिक भू-गर्भ और अनेक गतिशील ग्रहों के सापेक्ष में गतिमान पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल रहस्य और रोमांच की विवधताओं से भरी जलवायुओं में अनेकों आवर्तन लिए हुए है | इसलिए प्रकृति के अद्भुत रहस्यों से मानव आज भी नत-मस्तक है | एक और जहाँ बर्फ और ग्लेशियर से ढंके ऊंचे-ऊंचे शिखर हैं तो दूसरी और अनंतहीन विशाल समंदर तो कहीं घने वनों से आच्छादित हरियाली तो कहीं दूर-दूर तक सपाट रेतीला रेगिस्तान |

clip_image002[6]
वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के अंतर्गत पृथ्वी के सम्पूर्ण वायुमंडल में हवाओं का प्रवाह ताप के अंतर से प्रभावित होकर ऊँचे वायु दबाव से निचले वायु दबाव की ओर विस्थापन से होता है | शीतल और गर्म वायु के गुण-धर्म के अनुसार पर्वतीय शीत प्रदेशों के वायुमंडल में जब आर्द्र हवा में तैरते जल-कण आपस में घनीभूत और भारी होकर रिक्त स्थानों में प्रवेश करते है | तब गुफाओं के प्रवाह मार्गो की कंदराओ और दरारों में समाई गर्म वायु जो कि हल्की होती है, आर्द्र हवाओं के भारी दबाव से वह स्वतः बाहर निकल जाती है | धीर-धीरे गुफा के बाहर की ऊपरी सतह भी शीतल होती जाती है |

हवाओं के निरंतर संचालन से दरारों से प्रवाहित होती शीतल वायु से गुफाओं की निचली सतह का क्षेत्र शून्य डिग्री अर्थात जमाव बिंदु से नीचे तक पहुँच जाता है | इस परिस्थिति में गुफा के ऊपरी छोर से नीचे की ओर प्रवेश करती ठंडी वायु के मिश्रित जल-कण जमाव बिंदु क्षेत्र पर हिम-कणों के रूप में एक के ऊपर बैठते जाते है और इस प्रक्रिया में स्वतः लम्बवत गोलाकार बर्फ का स्तम्भ बनता जाता है | बहरहाल चूँकि चक्रीय जलवायु ऋतु परिवर्तनों से प्रभावित होती है | अतः मौसम के मिजाज के अनुसार इसका गलना भी प्रारंभ हो जाता है |


गौरतलब है कि अमरनाथ की गुफा में जो बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग बनने का चमत्कार देखने को मिलता है, ऐसे पिंड और लम्बवत स्तम्भ स्वरूप शिवलिंग यूरोप में आस्ट्रिया के सेल्ज्बर्ग क्षेत्र की एस्त्रिसंवेल्ट और स्लोवाकिया में डिमेनोवस्का की अजब-गजब गुफाओं में सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं |


प्रकृति के प्रति प्रेम और पौराणिक कथा-प्रसंगों से प्रेरित परम्पराओं का ज्ञान और विज्ञानं के साथ उनका निर्वाह हमारी अर्वाचीन जीवन-शैली की सांस्कृतिक धरोहर है | दरकते पहाड़ों की लैंड स्लाइडिंग, पथरीले, उबड-खाबड़ रास्तों और भारी बारिश तथा अव्यवस्था से उत्पन्न जोखिमों से आपके हृदय में विराजमान बर्फानी बाबा आपके बुलंद हौंसलों और मुरादों को पूर्ण करे | इसी शुभकामना के साथ ....

clip_image002

राजकुमार यादव
डी-३७/२, आर. आर. केट कॉलोनी,
इंदौर-४५२०१३
ईमेल: rkysg5497@gmail.com
मोबा: ८१०९७४११३८, दूरभाष : ०७३१-२३२२०८६

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------