विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

धर्म-अध्यात्म और लोक संस्कृति की धुरी रहा है धुलेट

 

डॉ. दीपक आचार्य

dharm-adhyaatm aur lok snskRiti kee dhuree rahaa hai dhuleT hindi aalekh

कहने को तो यह हाड़ौती अंचल का छोटा सा गाँव है लेकिन प्राचीन महत्त्व के स्थलों, पुरा वैभव, लोक साँस्कृतिक परंपराओं और बहुरंगी जनजीवन की वजह से यह अपने आप में अलग ही छवि रखता है। धार्मिक परंपराओं की साक्षी देते कई प्राचीन मन्दिर और रीति-रिवाज यहां की खासियत है वहीं उत्सवी आयोजनों की दृष्टि से भी यह पीछे नहीं है।

image

कोटा जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर धुलेट गांव के बारे में कई किम्वदन्तियां हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह जागीरदार धूलसिंह के नाम से बसा जबकि कुछ का मानना है कि धूल भरा क्षेत्र होने से धुलेट नाम पड़ा।

गाँव में गणेशजी की प्राचीन प्रतिमा युक्त मन्दिर है। इसमें गणेशजी की मूर्ति एक छतरी में स्थापित है और इसी कारण इन्हेंं छतरी वाले गणेशजी के नाम से ख्याति प्राप्त है।  छतरी के पास ही पुराना शिलालेख है जो इसकी प्राचीनता का बोध कराता है।

image

लोक श्रद्धा का केन्द्र है लक्ष्मीनाथजी मन्दिर

यहाँ से कुछ कदम दूरी पर अन्य मन्दिर हैं। इनमें लक्ष्मीनाथजी का मन्दिर है जिसे पाँच सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।  इसमें एक अधिष्ठान पर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, लक्ष्मीजी और श्रीकृष्ण सहित विभिन्न मूर्तियां हैं जिनके प्रति ग्रामीणों में बड़ी ही श्रद्धा है। गणेशजी, बालकृष्ण आदि की मूर्तियाँ भी यहाँ प्रतिष्ठित हैं। भगवान को मिश्री-मेवे आदि का भोग चढ़ता है। साल में अनेक बार कथा, भजन, सत्संग आदि होते हैं।

मन्दिर के परिक्रमा स्थल में देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं तथा सामने गरुड़जी की मूर्ति स्थापित है। बाहर प्राचीन शिलालेख लगा है जो इसकी प्राचीनता का बोध कराता है। रामनवमी पर गांव के मैदान में करीब पखवाड़े भर तक चलने वाला मेला भरता है, रामजी की सवारी भी निकलती है।

image

कभी आबाद था ग्राम्य रंगमंच

गांव में पुरानी हवेली है जो अब जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। इसे श्रीनाथजी की हवेली कहा जाता है। किसी जमाने में यह हवेली और इसका परिसर लोक सांस्कृतिक और धार्मिक सामाजिक आयोजनों का केन्द्र हुआ करती थी जहाँ राम लीला, रास लीला आदि की परंपरा विद्यमान थी।  एक तरह से यह सामुदायिक उत्सवी केन्द्र हुआ करती थी। हवेली के पास ही मन्दिरों व प्राचीन भवनों के खण्डहर हैं। इनके पास संकटमोचन हनुमानजी का प्राचीन मन्दिर है तथा तेजाजी स्थानक एवं अन्य मूर्तियां हैं।

image

अभयदान मिलता था यहाँ

इस गांव को श्रीनाथजी की जागीर में गिना जाता है। पुराने समय में यहाँ श्रीनाथजी प्रबन्धन की ओर से तालुकेदार व पटवारी भी नियुक्त था। श्रीनाथजी की जागीर होने से इस गांव को पवित्र माना जाता रहा है। पुराने जमाने से यह मान्यता चली आ रही है कि कैसा भी अपराध कारित कर देने वाला इस गांव में आ जाए तो उसे यहाँ अभय प्राप्त हो जाता था। उसे कोई दण्ड नहीं दे सकता,उसे माफी मिल जाती।

रियासत काल में भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण था। कहा जाता है कि श्रीनाथजी की इस जागीर में आने पर दरबार यहां का पानी ग्रहण नहीं करते थे बल्कि अपने साथ लाए गए पानी का उपयोग करते थे। गांव में सप्तरंगी ध्वजा वाले वंशीवादनरत मुरलीमनोहर के प्राचीन मन्दिर में मुरली मनोहर की पुरानी मूर्ति तथा बाहर कई प्राचीन मूर्तियां व गणेश मूर्तियुक्त शिलालेख स्थापित है। मन्दिर सुन्दर मेहराबदार पुरातन शैली में बना हुआ है 

image 

झालावाड़ से आए रामजी

रामजी मन्दिर में राम लक्ष्मण की मूर्तियां हैं। इस मन्दिर के परिसर में एक पुरानी पत्थर घटी है जिसके बारे में बताया जाता है कि यह भगवान के लिए फलाहारी भोग बनाने में प्रयुक्त होती थी। इस मन्दिर में स्थापित मूर्ति झालावाड़ से आयी बतायी जाती है। कहा जाता है कि किसी धनाढ्य विजयवर्गीय मुनीम की बहन ने अकूत धन संपदा का उपयोग मन्दिर बनाने और मूर्ति प्रतिष्ठा करने में किया और शेष बची राशि से गणेशजी की छतरी का निर्माण करवाया। गांव के बाहर धार्मिक महत्त्व का प्राचीन कुण्ड है।

image

प्राचीन महत्त्व का धाम

image

ग्राम पंचायत के सरपंच नरोत्तम शर्मा बताते हैं कि धुलेट प्राचीन महत्त्व का गांव है जहां लोक संस्कृति, धर्म और अध्यात्म की कई मनोहारी परंपराएं विद्यमान हैं। इस क्षेत्र में बंजारों की बस्तियां हैं तथा यह पिछड़ा माना जाता है। शर्मा बताते हैं कि अत्यधिक ऊँचाई पर है और इस कारण से जलस्तर काफी नीचे रहता है। उनका सुझाव है कि नदी से दांता का तालाब में पानी लाए जाने और सतमूईया तालाब में पानी भरे जाने की स्थिति में धुलेट सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में जल और सिंचाई जल का बेहतर प्रबन्ध संभव है।

image 

---000---

- डॉ. दीपक आचार्य

 

dr.deepakaacharya@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget