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दस कवियों की दस अनूदित कवितायेँ

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अनुवाद- प्रतिभा उपाध्याय

1.

मर जाता है वह शनै: शनै:
(Muere lentamente)----पाब्लो नरूदा (Spanish)

मर जाता है वह शनै: शनै:
करता नहीं जो कोई यात्रा
पढ़ता नहीं जो कुछ भी
सुनता नहीं जो संगीत
हँस नहीं सकता जो खुद पर
मर जाता है वह शनै: शनै:
नष्ट कर देता है जो खुद अपना प्यार
छोड़ देता है जो मदद करनाI

मर जाता है वह शनै: शनै:
बन जाता है जो आदतों का दास
चलते हुए रोज़ एक ही लीक पर
बदलता नहीं जो अपनी दिनचर्या
नहीं उठाता जोख़िम जो पहनने का नया रंग
नहीं करता जो बात अजनबियों से I

मर जाता है वह शनै: शनै:
करता है जो नफ़रत जुनून से
और उसके चक्रवाती जज्बातों से
उनसे जो लौटाते हैं चमक आँखों में
और बचाते हैं अभागे ह्रदय को I

मर जाता है वह शनै: शनै:
बदलता नहीं जो जीवन का रास्ता
असंतुष्ट होने पर भी अपने काम से या प्रेम से
उठाता नहीं जो जोख़िम अनिश्चित के लिए निश्चित का
भागता नहीं जो ख़्वाबों के पीछे
नहीं है अनुमति जिसे भागने की
लौकिक मंत्रणा से ज़िंदगी में कम से कम एक बार I

जियो आज जीवन! रचो आज!
उठाओ आज जोख़िम
मत दो मरने खुद को आज शनै:शनै:
मत भूलो खुश रहना !!

-

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GERMAN

2.

आशा” (Hoffnung)
- फ्रीडरिश शिल्लर

बात करते हैं और सपने बहुत देखते हैं लोग
बेहतर भविष्य के लिए,
सुखी स्वर्णिम लक्ष्य के लिए,
देखा जाता है उन्हें दौड़ते हुए और पीछा करते हुए,
बूढा होता है और फिर युवा होता है संसार
लेकिन आदमी आशा करता है सदा सुधार की I

आशा उसे जीवन देती है,
हंसमुख बालक के आसपास मंडराती है वह
अपनी जादुई चमक से बाँध लेती है युवक को,
नहीं दफ़न होगी वह बूढ़े आदमी के साथ
क्योंकि वह काम करता है कब्र में अपनी थकान को भगाने का,
कब्र में भी लगाता है वह पौधा अपनी आशा का II

भ्रम नहीं है यह सिर्फ खाली मनुहार भरा
उपज नहीं है यह मूर्खों के दिमाग की,
दिल में होती है घोषणा यह जोर से,
हम हुए हैं पैदा इसी बेहतरी के लिए,
और कहती है जो अंतरात्मा की आवाज़ ,
नहीं देती धोखा वह आशावान आत्मा को III
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3.

हितार्थ (An die Günstigen)
--गोएथे

कवियों को नहीं पसंद चुप रहना,
चाहते हैं वे भीड़ दिखाना,
हाँ, होनी चाहिए तारीफ़ और आलोचना
मानता नहीं कोई गद्य में,
तथापि भरोसा करते हैं हम अक्सर एकांत में,
ख़यालों में शांत उपवन में.

यही गलत किया मैंने, यही प्रयास किया मैंने,
इसी पीड़ा को भोगा मैंने और इसे जिया मैंने,
यहाँ सिर्फ फूल हैं गुलदस्ते में;
और बुढापा जवानी की तरह,
और अवगुण सद्गुण की तरह,
छोड़ देता है स्वयं इन्हें गीतों में.

4.

कोहरे में

(Im Nebel) - Hermann Hesse

अनूठा है कोहरे में भटकना!
अकेला है हर झाड़ और पत्थर,
कोई पेड़ नहीं देखता किसी दूसरे को,
हर कोई अकेला है.

मित्रों से भरा था मेरा संसार,
जब रौशन था मेरा जीवन,
अब जब कोहरा छा रहा है,
कोई प्रकट नहीं होता.

सच में, कोई नहीं है समझदार,
नहीं जानता है अँधेरे को,
अंधेरा अपरिहार्य और निस्तब्ध है
यह उसे सबसे अलग करता है.

अनूठा है कोहरे में भटकना,
एकाकी होना ही जीवन है,
नहीं जानता कोई आदमी दूसरे को,
हर कोई अकेला है.

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5.

जब नाज़ी कम्युनिस्टों को खा गए (Als die Nazis die Kommunisten holten)- Martin Niemöller

जब नाज़ी कम्युनिस्टों को खा गए ,
मैं चुप रहा; क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था.
जब उन्होंने सामाजिक लोकतंत्रवादियों को कैद किया,
मैं चुप रहा; क्योंकि मैं सामाजिक लोकतंत्रवादी नहीं था .
जब वे मजदूर संघों पर झपटे,
मैंने कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि मैं मजदूर संघवादी नहीं था.
जब वे यहूदियों को खा गए,
मैंने कोई विरोध नहीं किया; क्योंकि मैं यहूदी नहीं था.
जब वे मुझे खाने आये,
तब विरोध करने के लिए कोई बचा ही नहीं था.

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6.

“कम और अधिक”

- Klemens Bretano

-

सोचो कम, सुनो अधिक;
बोलो कम, देखो अधिक;
सिखाओ कम, सीखो अधिक;
लिखो कम, पढ़ो अधिक;
कम पर रखो भरोसा, प्रयास करो अधिक;
डरो कम, बचाव करो अधिक;
झगड़ो कम, सहन करो अधिक;
ललचाओ कम, अनुभव करो अधिक;
आशा करो कम, पाओ अधिक;
घृणा करो कम, प्यार करो अधिक;
चिढो कम, प्रसन्न हो अधिक;
उपहास करो कम, शांत रहो अधिक;
दु:ख दो कम, सांत्वना दो अधिक;
निष्कर्ष निकालो कम, विचार करो अधिक;
आदेश दो कम, काम करो अधिक ||

-

7.

जो यह है (Was es ist)

- एरिष फ्रीड

विवेक इसे

मूर्खता कहता,

प्यार कहता

यह है,

वही जो यह है II

अनुमान इसे

दुर्भाग्य कहता,

डर कहता

दर्द के सिवा यह कुछ नहीं,

सहजबोध इसे

भविष्यहीन कहता,

प्यार कहता

यह है ,

वही जो यह है II

अहंकार इसे

हास्यास्पद कहता,

सतर्कता कहती

लापरवाह,

अनुभव इसे

असंभव कहता,

प्यार कहता

यह है ,

वही जो यह है II

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8.

संयुक्त मोर्चा गीत (DAS LIED VON DER EINHEITSFRONT)

n बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

चूंकि आदमी एक इन्सान है (हाड़ मांस का पुतला है)

चाहिए होगी उसे रोज़ी रोटी

भरेगा नहीं पेट उसका जुमलों से

क्योंकि जुमले कोई भोजन नहीं I

इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ

वही है स्थान तुम्हारा कॉमरेड,

हो जाओ शामिल कामगारों के संयुक्त मोर्चे में

क्योंकि हो तुम भी एक कामगार I

चूंकि आदमी एक इन्सान है (हाड़ मांस का पुतला है)

इसलिए ज़रूरत है उसे कपड़ों और जूतों की

जुमले देते नहीं उसे गरमाहट

और ही देता नगाड़ा उसे गरमाहट I

इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ !

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चूंकि आदमी एक इन्सान है (हाड़ मांस का पुतला है)

नहीं पसंद करता वह तमंचा अपने माथे पर

नहीं चाहता वह अपने पैरों तले कोई गुलाम

ही कोई मालिक अपने ऊपर I

इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ !

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और क्योंकि सर्वहारा है एक सर्वहारा

नहीं करेगा उसे दूसरा कोई आज़ाद

हो सकती है मुक्ति कामगार की

मात्र अपनी मेहनत से ही कामगार की I

इसलिए बाएँ कदम बढ़ाओ, तो बाएँ कदम बढ़ाओ

वही है स्थान तुम्हारा कॉमरेड,

हो जाओ शामिल कामगारों के संयुक्त मोर्चे में

क्योंकि हो तुम भी एक कामगार I

9.

मुझे बस इतना पता है

(Ich weiss nur)- रोज़ा आउसलेंडर

पूछते हो तुम मुझसे

क्या चाहती हूँ मैं

मुझे नहीं पता यह

मुझे बस इतना पता है

कि ख़्वाब देखती हूँ मैं

कि ख़्वाब जी रहा है मुझे

और तैर रही हूँ मैं

इसके बादलों में

मुझे बस इतना पता है कि

प्यार करती हूँ मैं इंसान को

पहाड़ बागान समुद्र

जानते हैं कि बहुत से मुर्दा

रहते हैं मुझमें

आत्मसात करती हूँ मैं अपने ही

लम्हों को

जानती हूँ इतना ही

कि यह समय का खेल है

आगे-पीछे .

ENGLISH

10.

मेरे पास नफ़रत करने का वक्त नहीं था (I had no time to hate )
-- एमिली डिकिन्सन

था नहीं वक्त मेरे पास नफ़रत करने का, क्योंकि
डाली होगी बाधा कब्र ने इसमें
और जीवन नहीं था पर्याप्त इतना
कि कर सकी होती मैं ख़त्म दुश्मनीI

न ही था वक्त मेरे पास प्यार के लिए, लेकिन चूंकि
होना चाहिए व्यवसाय कुछ,
सोचा मैंने, थोड़ी मशक्कत प्यार की
थी काफी बड़ी मेरे लिए II

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प्रतिभा उपाध्याय, एम. फिल (दिल्ली विश्वविद्यालय )

स्वतन्त्र जर्मन अनुवादक

ग्रेटर नोइडा, उत्तर प्रदेश , भारत

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