सोमवार, 31 अगस्त 2015

भारत में महिलाओं की वर्तमान स्थिति की सामाजिक विवेचना

नीलम यादव मनोवैज्ञानिक,इतिहास,संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों की प्रगतिवादी लेखिका नीलम यादव ने अपने लेखन के द्वारा हाशिए पर पड़े समाज को के...

संस्कृत में हास्य व्यंग्य - हिंदी भाषा टीका सहित

  एकविंशी शताब्दी समागता   इयम् एकविंशतिः शताब्दी पश्य सखे! आगता भारते।।   श्वानो गच्छति कारयानके मार्जारः पर्यङ्के शेते, किन्तु नि...

मांझी द माउंटेन मैन - सार्थक सिनेमा की बढ़ती जरूरत

सार्थक सिनेमा की बढ़ती जरूरत प्रमोद भार्गव     अब फिल्म देखने की इच्छा दिमाग में नहीं जागती। यही वजह रही कि पिछले ड़ेढ़ दशक से छविगृह में जाकर...

कहानी - इंतजार

रवि श्रीवास्तव   हर पल हर दिन उसका ख्याल मेरे दिमाग में रहता है। एक दिन बात न हो तो ऐसा लगता है कि सालों बीत गए हैं। उसे देखे बिना तो लगत...

अपनी ही धुन में हैं सारे

  डॉ0 दीपक आचार्य   कहा तो जाता है कि सभी को धुन का पक्का होना चाहिए। पता नहीं वे लोग कहाँ चले गए जो धुन के पक्के हुआ करते थे और वाणी के...

जहाँ सादगी वहीं संतोष

- डॉ. दीपक आचार्य   जीवनचर्या को आनंद से संचालित करना भी कला है। जो लोग इसे सीख जाते हैं वे निहाल हो जाते हैं। जबकि इसके प्रति नासमझी और ...

रविवार, 30 अगस्त 2015

नोबल पुरस्कार विजेता - विलियम फॉकनर की कहानी - एमेली के लिए एक गुलाब

अनुवाद - अनुराधा महेन्द्र मिस एमेली का जब निधन हुआ तो समूचा शहर उसके जनाजे में शामिल हुआ। एक जोर जहाँ पुरुषों में इसके पीछे एक ' स्तंभ...

सीताराम पटेल की रचनाएँ - दुनिया की प्रथम प्रेम कहानी

दुनिया की प्रथम प्रेम कहानी 1 :- कितने पाकिस्तान में समय ही नायक, महानायक और है खलनायक अदीब और विद्या के परस्पर आकर्षण से आरंभ होती है कहा...

कहानी - तारकोल का चोर

अजय ठाकुर “कहीं धरती हमेशा उबलती है, कहीं आसमां हमेशा झुकता है। कहीं भूख हमेशा सोती है, कहीं रोटी हमेशा लड़ती है”। यह सच है, भूख जब चरम पर ...

साफ कहें, सुखी रहें, नुगरों से बेपरवाह रहें

  डॉ0 दीपक आचार्य   कलिकाल के दुष्प्रभाव से घिरे वर्तमान समय में जात-जात के असुरों का बोलबाला है।  पिछले सारे युगों के तमाम किस्मों के अस...

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------