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ई-बुक : प्राची, जुलाई 2015 - मैंने अपनी रचनाओं को जब्त हो जाने से कैसे बचाया

 

मैंने अपनी रचनाओं को जब्त हो जाने से कैसे बचाया

अर्नेस्ट हेमिंग्वे

 

उस दिन मजाक के मूड में थे हेमिंग्वे. स्कॉच के कुछ पेग लेकर बोले, ‘‘हॉचनर, मेरे दिमाग में एक आइडिया आया है. अगर हमने उस आइडिया पर अमल किया, तो हम रातोंराम अमीन बन सकते हैं.

मैंने मुस्कराकर बताया कि उनका यह आइडिया जानने में ेरी गहरी दिलचस्पी है. हेमिंग्वे अन्दर गये और वहां से एक पुलिंदा लेकर लौटे. बाले, ‘‘ये हैं मेरी रचनाओं के प्रथम संस्करण की प्रतियां. और उन रचनाओं की पांडुलिपियां, जिन्हें ‘लायब्रेरी ऑफ कांग्रेस’ को देकर हम लोग काफी रकम कमा सकते हैं. काश मेरी अधिकांश पांडुलिपियां और रचनाओं के प्रथम संस्करण चोरी न हुए होते!’’

‘‘मुझे नहीं मालूम कि आपकी कुछ पांडुलिपियां चोरी हो गयी थीं,’’ मैंने कहा.

‘‘रचनाओं के प्रथम संस्करणों की चोरी तो बिन बुलाये मेहमानों और कृपालु चित्रों ने की, जिन्हें मैंने समय-समय पर अपना घर रहने के लिए उधार दिया था. तब से, मैं अपनी नयी रचनाओं के प्रथम संस्करण की प्रतियों को बहुत संभाल कर रखता हूं. मुझे पता चला है कि मेरे इन मेहरबानों, दोस्तों के हाथ बेचकर हजारों डालर कमाये हैं.’’

‘‘और पांडुलिपियां कैसे चोरी हुई?’’

‘‘कुछ तो मैं जब अमरीका से क्यूबा आया, तब क्यूबा के मोटे-मोटे चूहों और तिलचट्टों ने उप पेटियों में, जिन में उन पांडुलिपियों को क्यूबा भेजा गया था, घुसकर उन का सफाया कर डाला. ‘टू हैव एंड हैव नॉट’ की एक अधूरी पांडुलिपि का भी यही हश्र हुआ. मुझे फिर नये सिरे से उसे लिखना पड़ा. अपनी कई रचनओं को मैंने रष्ट हो जाने के बाद, दुबारा नये ढंस से लिखा है, और इससे मुझे लाभ भी हुआ.’

‘‘कैसा लाभ?’’

‘‘यह बाद में बताऊंगा. पहले यह सुन लो कि मेरी कुछ पांडुलिपियां कैसे चोरी गयीं. यह उन दिनों की बात है, जब तक मेरी कोई रचना पुस्तकाकार प्रकाशित नहीं हुई थी. मैं उन दिनों एक पत्रकार था और अपने पत्र की ओर से एक सम्मेलन की कार्यवाही की रपट लेने के इरादे से लूसन गया हुआ था. वहां का एक प्रकाशक मेरी रचनाओं को देखना चाहता था. मैंने अपनी एक परिचिता को फोन किया कि वह मेरे रहने की जगह से मेरी सब रचनाओं की पांडलिपियां लेकर फौरन वहां आ जाये. वह बेचारी एक सूटकेस में सब रचनाओं को भरकर रवाना हुई कि बीच में रेल में किसी ने वह सूटकेस चुरा लिया. जैसा कि मैंने कहा लाभ भी हुआ. लाभ यह हुआ कि उन अप्रकाशित रचनाओं के जिन मैंने अनेक जीवित व्यक्तियों के नाम पात्रों को देकर, मैंने उन जीवित व्यक्तियों के जीवन की ऐसी सच्ची घटनाओं के बारे में लिखा था, कारण मुझे यह सीख मिली कि अपनी आगामी रचनाओं में मैं ऐसा नहीं करूंगी. यदि वे मान-हानि का मुकद्दमा चलायें, और मुकद्दमा जीत जायें, तो आपको तो दंड मिलेगा ही, आपकी किताब को भी जब्त हो जाने का दंड मिलेगा. तब से मैंने लिखते समय हमेशा इस सीख पर अमल किया है.’’

‘‘चूके कब?’’

‘‘मेरी एक प्रारंभिक कृति है--‘आय ओल्ड मैप’, जब अप्रकाशित पांडुलिपियों से भरा मेरा सूटकेस गायब हुआ था, तब यह रचना इसलिए चोरी होने से बच गयी कि उसे मैंने प्रकाशनार्थ एक प्रकाशक के पास भेजा हुआ था. वह जिस जॉकी की कहानी है, वह मेरा अच्छा दोस्त बन गया था. जब मैं ‘स्नोज ऑफ किलिमंजारो’ लिख रहा था, तब इस जा।की ने उसकी अपूर्ण पांडुलिपि पढ़ी. उसने कई पात्रों को काल्पनिक नामों के स्थान पर जीवित व्यक्तियों के नाम दे दिये. वैसे, एक पात्र था, जूलियन जिसमें और स्कॉट फिजगेरल्ड में, जो एक ख्यातनाम उपन्यासकार होने के अलावा, मेरा मित्र भी था, बहुत साम्यता थी. जॉकी ने जूलियन नाम के इस पात्र का नाम स्कॉट फिजगेरल्ड कर दिया, और उपन्यास के पहले संस्करण में यही नाम प्रकाशित हुआ. लेकिन, दूसरे संस्करण में मुझे उस पात्र को उसका मूल नाम--जूलियन--देना पड़ा, क्योंकि स्कॉट बहुत नाराज था, और कानूनी कार्यवाही करने की धमकी दे रहा था. तब से मैंने फेसला कर लिया कि चाहे जितना भी छोड़ना पड़े, लेकिन अपनी रचनाओं के पात्रों को जीवित या वास्तविक व्यक्तियों से किसी भी रूप में नहीं जोड़ूंगा. ‘द किलर्स’ में मुक्केबाज का नाम तो थोड़ा भिन्न् है ही, उसके शहर का नाम भी भिन्न् है. ‘द किलर्स’ के अंतिम लेखन के दौरान, उसे एक सर्वथा काल्पनिक कहानी का रूप देने के लिए हालांकि असली घटना और कहानी की घटना में फिर भी काफी साम्यता है, लेकिन इतनी नहीं कि कोई उसे लेकर मुझ पर मुकद्दमा चला सकता, या वह कहानी जब्त हो सकती.’’

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