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यात्रा संस्मरण - खूबसूरत ,बेमिसाल , अद्भुत तिलिस्म की दुनिया - शंघाई

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  - कामिनी कामायनी

शहर शंघाई ।

चीन का सबसे खूबसूरत ,बेमिसाल  ,शहर शंघाई अद्भुत तिलिस्म की दुनिया अपने आप में समेटे सागर तट पर आत्म मुग्ध सा खड़ा है ।

    एयर पोर्ट देखकर ,कुछ अजीब सा ,कुछ विशाल  मिलिट्री छावनी सा ,कुछ बंद सा माहौल लगता है  ,मगर वहाँ से बाहर की दुनिया वास्तव में चकाचौंध की दुनिया लगती है  ।कंक्रीट का अभिनव ,जटिल  महासाम्राज्य ।

न्यूयॉर्क से पाँच गुना बड़ा भरा पूरा  ,दैदीप्यमान  ,इसकी छवि देखते ही बनती है । चारों तरफ नूतन ,अत्याधुनिक तकनीकी का बोलबाला हैरान कर देने वाला लगता है । चौड़ी चौड़ी साफ सुथरी सड़कें ,जलेबी जैसे घुमावदार फ्लाईओवर ,पेड़ पौधे ,लता गुल्मों ,ताजे खिले फूलों से भरे सड़कों के किनारे इनके प्रकृति और काला प्रेम को दर्शाने के लिए स्वयम सिद्ध प्रमाण है ।

     सागर के करीब  बना हुआ यह  शहर प्राचीन काल से अपनी गुणवत्ता के कारण आक्रमणकारिओ के निशाने पर रहा है । जापानी समुद्री डाकुओं के हमले से बचाने के लिए पहली बार यहाँ एक विशाल दीवार सन 1554 में बनाया गया था । उन्नीसवी सदी से यह यूरोपिओं के व्यापार का माध्यम बनने लगा  ।अनेक देशों ,महाद्वीपों के निवासी धीरे धीरे यहाँ आकर  घिरी चारदीवारी के बाहर बसने लगे थे ।  ,बाद मे दीवार के बाहर भी शहर का विस्तार होता गया । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद काफी संख्या में यहूदी भी आकार यहाँ बस गए । सन 1950 से 1960 के मध्य शंघाई एक विशाल औद्योगिक केंद्र बन गया था । 1990 में डेंग जियाओपींग के आर्थिक सुधार के परिणामस्वरूप  इसका तीव्र गति से विकास होना शुरू हुआ ,और तब से इसका निरंतर विकास हो रहा है ।

      यह शहर चीन का सबसे उत्कृष्ट पर्यटन क्षेत्र है । इसका अपना प्रभाव शाली इतिहास वित्त ,संस्कृति ,कला साहित्य ,व्यापार के क्षेत्र में रहा है ।

यहाँ अनेक दर्शनीय  जगहें  हैं  ।शंघाई सेंटर ,म्यूज़ियम ,अनेक सुपर रिच मौल ,पेर्ल टीवी  टावर ,यू गार्डेन ,ओल्ड स्ट्रीट ,बंड, एक्वेरियम, बोटानिकल गार्डेन ,झांग जियांग कल्चरल सेंटर ,फेंजिंग टुरिस्ट एरिया ,मार्ट आदि देखने योग्य  हैं । अनेकानेक दर्शनीय पार्क , कृत्रिम वॉटर फ़ौल ,मूर्तियाँ ,ढांचे आदि प्रतिपल मन को मोहित करती रहती है ।

  चीन के अलावा विश्व के विभिन्न जगहों के  भांति भांति के लज़ीज़ व्यंजन यहाँ मिलते हैं । शंघाई के बहुत से पुराने इमारतों और विला को सुंदर रेस्त्रों में बदल दिया गया है ,जहां  अति मोहक सजावटों के मध्य बैठकर दिन अथवा रात मेँ चीन के  परंपरागत लज़ीज़  भोजन, परंपरागत ढंग से खाने का आनंद ही कुछ और है । अधिकांश दुकानें ,शौपिंग मौल शाम के 8 बजे तक बंद हो जाती हैं । करीब दो हजार साल पुराना  सिटी गौड मंदिर के खुलने का समय 8से 5 तक का है ।इसका पुनरुद्धार सन 1996 से सन 2006 तक चला , ताओ पुरोहित को पूजा की ज़िम्मेदारी दी गई । मंदिर परिसर मेँ प्रवेश करने के  लिए टिकट कटाना होता है ।सुंदर देवियो के साथ  बड़े बड़े देवताओं के दाढ़ी ,मूंछ वाले विशाल प्रतिमाओं की छवि देखते ही बनती है ,कहीं कहीं ऊपर लाल कपड़ों की कतरनें  बंधी लटकती दिखाई देती है  । मंदिर के  विशाल परिसर के मध्य भाग  में एक बक्से जैसा बना ,जहां लोग अगरबत्ती का पूरा बंडल जला जला कर डालते  हैं  ।मंदिर का प्रवेश द्वार बड़ा ही भव्य , और अति विशाल है ।   परिसर से लगे बाहर  करीब  सौ साल पुराने ,सौ दुकानें हैं जो धार्मिक प्रतिकात्मक सामाग्री के

साथ अन्य खाने पीने  का समान बेचते हैं ।इसके अतिरिक्त ढेर सारे अनेक दुकानें ,रेस्त्रों  ,ट्रेवेल एजैंसी ,  छोटे छोटे समान बेचने वालों का ठेला आदि पर  फेंगसुई के समान ,बुदधा की मूर्तियाँ ,घंटियाँ ,गले का हार ,पर्स चश्मे घड़ियाँ आदि विविध सामाग्री  दिख जाता है । वहाँ भी ,ग्राहकों के पीछे  कुछ छोटे दुकनवाले भागते दिख पड़ते हैं । बड़े बड़े ड्रैगन के शक्ल की कुछ दुकानें हैं जिन्हे छोटी बड़ी लाईट से यूं सजाया गया है ,बरबस किसी का भी ध्यान खींच ले । मंदिर के  करीब ही प्राचीन मनोरम युवान गार्डेन है ,जो अपनी भव्यता और ऐतिहासिकता के कारण पर्यटकों का प्रिय स्थल बना रहता है । गली से बाहर मुख्य सड़क पर भी अनेक बड़े बड़े दुकान हैं ।

  ओल्ड स्ट्रीट में सारे मकान ,दुकान प्राचीन पेगोडा शैली के बने हुए हैं ,जो रात में जगमग करती दिवाली की तरह मनोरम दिखती है ।वहाँ फुटपाथ पर उलटे हुए मटके की तरह पत्थर की शिलाएँ बनाई गई हैं जहां लोग बैठे भी नजर आते हैं  ।

  मंदिर से कुछ दूर सड़क के दूसरे ओर , बंड  जो ,हुयांपों नदी पर दो किलोमीटर लंबा जमीन के नीचे से सुरंग नुमा पुलहै ,जिसे साउथ कोरिया के मदद से 3डी तकनीकी से बनाया गया है ,बहुत ही मनोहारिणी है ।  यहाँ तकरीबन करीब 100,000 पर्यटक प्रतिदिन आते हैं ।रात के दस बजे यह बंद कर दिया जाता है ।  यह शंघाई के प्रथम दस ,साईन्स स्पोट्स मे,प्रथम दस नाइटसाईट ,और दस प्रथम विंडो मे शामिल है ।

वहाँ का पब्लिक ट्रांसपोर्ट बहुत ही अच्छा है । शहर के प्राय हर कोने मे सब वे स्टेशन ,बस स्टेशन है । टैक्सी पर्याप्त संख्या मे है। ट्रौली बस सेवा भी है ।बिजली से चलने वाली बसें हैं । ट्रेफिक व्यवस्था बहुत ही उत्तम है । अधिकांश जगहों पर दस सेकेंड की रेड लाईट देखा गया है । पुलिस प्रशासन काफी दुरुस्तऔर चौकन्नी है और पर्यटकों के लिए मदद गार भी  है । जगह जगह  फुटपाथ पर पाँच फुट चौड़े ,और इतने ही लंबे  लकड़ी के बक्से नुमा गमलों में बड़े बड़े पेड़ लगाए गए हैं ।

चाइना म्यूजियम से थोड़ी दूर चलकर ,विशाल भूमिगत पार पथ बना है जहां से अनेक रास्ते बाहर निकलते हैं , भीतर खूब बड़े बड़े टीवी स्क्रीन जैसा लगा है ,देर सारी दुकानें हैं ,जो अपने आप मे एक हाईटेक बाज़ार  जैसा दिखता है ।

यहाँ की महिलाएं आत्मविश्वास से लबरेज़ दिखाई देती हैं ।वे मेहनती हैं ,सजी धजी ,चुस्त ,छोटे वस्त्रों और खुले लहराते बालों वाली युवतियाँ बाज़ार ,मे दुकानों पर ,रेस्त्रोंमें,पारलर्स में ,हर जगह काम करती दिखाई देती हैं ।

शंघाई  विभिन्न क्षेत्रों के उच्च शिक्षा का भी केंद्र रहा है ।अनेक स्कूलों ,विश्वविध्यालयों {फूदान यूनिवर्सिटी ,ईस्ट चाइना नार्मल यूनिवर्सिटी , टोंजिल यूनिवर्सिटी आदि }के अलावा चाइना एक्ज़ेक्यूटिव लीडरशिप अकादेमी इन पुडोंग ,भी यहाँ अवस्थित है ।

   वैश्विक छवि  वाले इतिहास के कारण यहाँ धर्मांधता नहीं है । बहुत से लोग नास्तिक हैं ,कुछ बुद्ध को मानने वाले हैं ,कुछ कैथोलिक ,कुछ कुछ मुस्लिम ,कुछ अन्य । वहाँ चर्च ,मस्जिद ,और अन्य मंदिर भी अब बनने लगे हैं ।

  यहाँ विश्व के प्राय अधिकांश बैंक की शाखाएँ विशाल ,उतुंग काय इमारतों में अवस्थित  हैं । पोस्टल सेविंग बैंक की ऊंची इमारत ,टी प्लाज़ा ,बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अनेक गगन चुम्बी इमारतों से शंघाई सुशोभित है ।

यहाँ का मौसम सम शीतोष्ण है ।चार ऋतुएँ हैं,हरियाली देखकर अच्छी वर्षा का अनुमान लगाया जा सकता है ।  पड़ोसी साईबेरिया से आने वाली बर्फीली हवाओं की वजह से शरद ऋतु काफी कष्ट प्रद हो जाती है ।

   शंघाई चीन के  फिल्म और थिएटर की भी जन्मभूमि रही है । यह सिल्क और चाय के उत्पादन और व्यापार के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है ।प्राचीन काल से यहाँ टी हाऊस ,कौफ़ी हाऊस रहे हैं , जहां अभिनेता ,लेखक बैठ कर नाटक आदि केलिए ,मिलते जुलते ,बातचीत करते थे ।

शंघाई में नदी में सैर करना भी काफी लोकप्रिय शगल है ।इसके लिए अनेक रिवर क्रूज की सुविधाए हैं ।

शंघाई चीन को विश्व से और विश्व को चीन से जोड़ने का एक प्रवेश द्वार है ।

    गौरवमय इतिहास और भयंकर राजनीति को परे धकेल कर ,आज गगनचुंबी इमारतों ,हजारों ,लाखों लाल ,पीले ,हरे ,गुलाबी ,बल्बों ,नियोन लाईट्स मे थिरकती ,मचलती ,शंघाई पंख पसार विश्व पटल पर अपना जलवा दिखने के लिए उन्मत्त सी दिख रही है ।

   कामिनी कामायनी ॥ 

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