सोमवार, 10 अगस्त 2015

बाल कहानी - सच्ची मदद

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‘‘सच्ची मदद‘‘

अंजली अग्रवाल

गाँव के कुछ बच्चे खेतों के रास्तों से होते हुए अपने विद्यालय जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक भिखारी पर पड़ी। वह भूखा प्यासा लोगों से पैसे माँग रहा था। उसे देख सभी विद्यार्थी के मन में ढेरों सवाल उठने लगे। विद्यार्थी विद्यालय पहुँचते ही.......

उनके विद्यालय के अध्यापक जो सभी विद्यार्थीयों के चहेते थे तथा सभी विद्यार्थी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे।

उनके पास पहुँचें और बोल पड़े- सर भिखारी कौन होते हैं ?

लोग भीख क्यों माँगते है?

जैसे ढेरों सवाल अध्यापक के सामने थे

 

अध्यापक ने मुस्कुराकर कहा- मैं तुम सभी के सवालों का जवाब दूंगा। तुम सब अपने कक्ष में चलो।

सभी विद्यार्थी कक्ष में अध्यापक का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।

अध्यापक ने आते ही ब्लैक बोर्ड पर लिखा ‘‘सच्ची मद्द‘‘ और कहा-

‘‘ मैं आज आप सभी को एक कहानी सुनाना चाहता हूँ।

एक पिता अपने बेटे के साथ घर के बाहर खेल रहा था।

 

कि तभी उनके पास एक भिखारी आया जो कि 15-16 साल का एक बालक था उसने कहा- ‘‘ मालिक 3 दिन से भूखा हूँ कुछ पैसे दे दो.....रहम करो....भगवान आपका भला करेगा...आपका बेटा खूब नाम कमायेगा‘‘ ।

पास खड़े बेटे को जिसकी उम्र 10 वर्ष थी उसे भिखारी की ज्यादा बातें तो समझ नहीं आयीं पर वो इतना तो समझ गया कि भिखारी को भूख लगी है और उसे पैसे चाहिये...

बेटे ने अपने पिता से कहा - ‘‘पापा इसे पैसे दे दो न‘‘।

पिता ने मुस्कुराकर कहा- तुम पहले जाओ अपनी माँ से कुछ खाने का लाओ और इसे खाना खिलाओ।

बेटे ने भिखारी को खाना लाकर दे दिया।

 

भिखारी ने पेट भर खाना खाया और कहा- ‘‘ साहब आप तो अमीर हैं, खुदा की मूरत है, दयालु हैं, थोड़े पैसे और दे दो साहब।

पिता ने भिखारी को देखा फिर चारों ओर देखा और कहा-

‘‘ सामने मेरी कार खड़ी है तुम उसे साफ कर दो मैं तुम्हें 50 रूपये दूँगा।

भिखारी ने सोचा और कहा - ‘‘ पानी और कपड़ा कहां से लूं साहब।

उसने गाड़ी साफ की और 50 रू लेकर चला गया।

इस तरह अब वो रोज आता और सभी के घर जाकर कहता साहब मैं आपकी गाड़ी साफ कर दूँ।

बस इस तरह पैसे कमा कर वो अपना पेट भरने लगा और अब लोग उसे भिखारी नहीं कहते थे।

अध्यापक ने अचानक विद्यार्थियों की और देखा तो पाया कि सभी विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान है।

 

अध्यापक ने कहा - सुनो बच्चों

अगर पिता उस दिन भिखारी को पैसे दे देता तो....

भिखारी को लगता कि रोने से गिड़गिडाने से पैसे मिल जाते है और वो दूसरे दिन किसी ओर के पास जाकर भीख माँगता और जिन्दगी भर भिखारी ही कहलाता।

भिखारी वो इंसान होता है जो बिना मेहनत किये अपना पेट भरना चाहता है।

अगर किसी इंसान कि मद्द करना हो तो ऐसी करो जिससे वह सही रास्ते पर चल सके।

इसे ही कहते है - ‘‘सच्ची मदद‘

 

संदेश- इस समाज को भिखारी हम लोग देते हैं..

हमारे कारण ही एक इंसान भिखारी बनता है....

‘‘सच्ची मद्द‘‘ करना सीखिए।

 

 अंजली अग्रवाल

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