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हास्य-व्यंग्य : एक शिष्टाचार सप्ताह ....

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-  सुशील यादव

 

नत्थू ,रोनी सी सूरत लिए मेरे पास आया ,मैंने पूछा, क्या परजाई जी से खटपट हो गई है.....?

.....वो, .....,आप तो अन्तर्यामी है प्रभु, के भाव लिए ....’सही पकडे हैं’ के अंदाज में मेरे निकट कालीन पर बैठ गया |

मैंने कहा वत्स ....सविस्तार बयान करो ,बेखौफ कहो ....पत्नी की चढ़ी त्योरी को ध्यान में लाओगे तो सब कुछ ‘भीतर धरा’ रह जायगा |

यहाँ मै ‘प्रभु’ की भूमिका में खुद को रखकर टी वी से मिले अधकचरे धर्म ज्ञान की पोटली में से कुछ निकाल के, उसको देने की प्रक्रिया में लग जाता हूँ |.

 

यों तो ......”भीतर धरा रह जाएगा” ,केवल इस एक वाक्य के तहत पोथी भर का ज्ञान दिया जा सकता है परन्तु इसके लिए समय और सुपात्र की तलाश करनी पड़ेगी ,हर लाईट सब्जेक्ट पर ज्ञान को लुटाना लिटरेरी ठीक भी नहीं ......?

मेरी जगह दूसरा भी होवे तो, इस लाभ को दुल्लत्ती मारने की बेवकूफी नहीं कर सकता |

‘पत्नी-प्रताड़ित’ कम लोग ही खुल कर बयान देते देखे गए हैं|मन-मसोस कर रहने वाले घुटते- घुट जायेंगे, मगर जी से पत्नी के खिलाफ बोलने की हिम्मत जुटा पाने में, एक अघोषित-शर्मिन्दगी से दो-चार होते रहते हैं |

मगर नत्थू के साथ ऐसा नहीं था |उसका अडिग विश्वास मुझ पर था, कि इधर की बात उधर करने वाला ‘वायरस’ मुझमे नहीं है |

बोलो भी,चुप रहना था तो ,मेरा समय खराब करने काहे चले आये .....?

 

उसने, धरावाहिक ‘सास-बहु सीरियल’ में से , बहु वाला पार्ट रिलीज किया |

आपकी परजाई, पिछले कुछ दिनों से,अखबार में सोने के भाव कम होने की खबर क्या पढ़ रही है ,हाय-तौबा मचाये रहती है .....|

नत्थू जी,सिम्पल सी बात है ,आप अखबार लेना बंद काहे नहीं करवा देते ....?

आप भी.... सर जी .....? अखबार बंद करवाने से रोग मिटाता तो मिटा लेते ,ये टी वी और उनकी सहेलियों के व्हाट्स ऐप और सोशियल मीडिया का क्या करे.... पल-पल की खबरें ब्रेकिंग-न्यज माफिक चलाते फिरते हैं |

बीस-तीस रूपये दाम भी सोने के , गिरते-बढ़ते हैं, तो आफिस में मोबाइल घनघना दे हैं |बोलो सोने में बीस-तीस मायने रखता है भला .....?

आफिस से थके-हारे जो वापस आओ, तो चाय काफी के पहले ‘सराफा’ के उठाए चढाव पर तप्सरा चालु हो जाता है |

किस बहनजी के घर कितना ग्राम,.कितना तोला आया ,उन्हें एक-एक माशा-रत्ती का हिसाब मालुम होता है |

वे हमसे मुखातिब कहती हैं , मालुम .....शर्मा जी के यहाँ पुरषोंत्तम मॉस के बाद,किलो के हिसाब से खरीदा जाने वाला है, ऐसा अपनी कालोनी की लेडीज क्लब में चर्चा है .....?

 

मैं साश्चर्य पूछता हूँ .....साले की नम्बर दो की कमाई अब छलकने को आई ....|

मुझे बताना कब खरीदने वाले हैं ......ऐ सी बी .....वालो का रेड डलवा दूंगा .....?शरीफों की बस्ती में,तमीज नहीं है , रहने चले हैं ...नंबर दो वाले .....|

ये ल्लो ...आपको सही बात बताओ तो मिर्ची लग जाती है|जिनके पास है ,भाव गिरे तो हम आप कौन हैं रोकने वाले .....?

दूसरों के साथ लड़ने-भिड़ने की जुगाड़ चौबीसों घंटे लगाये रहते हैं आप |कहे देती हूँ ऐसे बहाने से मै डिगने वाली नहीं......?शादी के बाद एक रत्ती भर लिवाये हो तो कहो ....आपको जब भी बोलो कान की दिला दो,हाथ की खरीदो ,गला सूना लगता है ....तो अपनी शेरो शायरी में घुस जाते हो .....कहे देती हूँ सब आग में झोक दूंगी .....एक दिन ....बहुत हो गया देखेगे-देखेगे की सुनते ....|

सर जी ,पानी तो बादल फटने जैसा सर से उप्पर होने को है ...आपके पास ,’सोना नहीं खरीदने के हजार बहाने’; जैसी कोई किताब हो तो बताओ.....

नत्थू जी ,गृहस्थी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए पति का स्वर्ण-दान समारोह भी समय-समय पर होते रहना चहिये....समझदार पति इसे इन्कार करके कभी सुखी नहीं रह सकता ....|खैर ये सब तो सक्षम पति के चोचले हैं|तुम्हारे साथ अभी पत्नी-जिद से निपटने वाली समस्या का निदान होना पहली प्राथमिकता है ....?बोलो ऐसा ही है या ......

ठीक है ,दोनों तरफ देखते हैं .....|

 

तुमने परजाई से पूछा कितनी रकम है....?

हाँ पूछ देखा.... हमने कहा पैसे निकालो.... ,तो कहने लगी रकम,पैसा, तनखा कभी हाथ में दिए जो हिसाब मांग रहे हो ....?ठनठन गोपाल रखा है .....?आज तक मेरी हर ख्वाहिश मायके से पूरी होते रही .....होश है आपको .....?

जितने गिनवा के लाए थे, उसका चौथाई भी चढाये होते तो पाँव-आध किलो बदन पर फबते रहता ....|चार लोगो में शान से उठती-बैठती....... |

सर जी उनके मायका पुराण चालु हो जाने के बाद मेरे पास डिफेंसिव शाट खेलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प बचता नहीं ....?

सर दर्द,आफिस में ज्यादा काम ,थकावट जैसे आम-आदमी वाले बहाने सूझते हैं |

डाईनिग टेबल पर रखी दवाइयों के डिब्बे से एक-आध गोली दिखाने के नाम पर यूँ ही गटक लेता हूँ |

मेरे तरफ से घोषित मौन पर, युद्ध-विराम पर, रात, दस बजे समझौता-वार्ता की पहल के तहत खिचडी परसी जाती है मै चुपचाप खा के सो जाता हूँ .....|

 

नत्थू जी , नारी-हठ का गंभीर मामला है|

ये सोना जो है ना ,युगों से अपना खेल खेलते आया है |सीता मैय्या भी स्वर्ण मोह से बच नहीं सकी थी ,उनने न केवल अपने लिए, वरन अपने पति के लिए भी विपत्ति को बुलावा भेज दी |

न प्रभु स्वर्ण-मृग के पीछे भागे होते,न रावण सीता-मैय्या को उठा ले गए होते |खैर वे सब तो जैसे-तैसे मार-काट के निपट लिए ...अभी समस्या आपकी है .....?

कितनी रकम है आपके खाते में .....?उधर ख्वाहिश किस चीज की हो रही है ....?कितने तक आ जाएगी .......?

सर जी, डिमांड पांच-तोले की है ,लगभग डेढ़ लाख तक आ जायेगी ....|मैं चाहता हूँ वो अपनी चादर की हैसियत से पांव फैलाना जाने ......

ऐसा करो, तुम्हारी कार की सेकंड हेंड वेल्यू भी इतनी ही होगी, उसे मेरे गैराज में डाल दो ,कहना कि हार के लिए बेच दी....|पैसा दो तीन दिनों में मिलेगा ,फिर हार ले लेगे ....|

और हाँ ...कल से शिष्टाचार सप्ताह मनाना शुरू कर दो .....?

मतलब .....?

 

मतलब ये कि खाने में एक-आध रोटी कम कर दो|रात को आफिस का काम फैला लो |सुबह मार्निग वाक् चले जाओ ,अगर घूमना पसंद नही तो सौ कदम दूर, चाय की दूकान में बैठ के अखबार पढ़ के वापस चल दो ......आफिस मोटर सायकल से आने जाने लगो .....एक जी तोड़ के चाहने वाले धांसू पति की छवि बनेगी जो बीबी की इच्छाओं के पीछे अपने तन-मन-धन को जी जान से लगाये देये जा रहा है .....

सर जी,..... इन सबसे होगा क्या .....?

वो सारी...... कहके आगे-पीछे चक्कर लगाएगी .... जिद करेगी ,कार वापस ले आओ ....बिना कार के नाक कटती है .....जी .....|जब पैसे आ जायेंगे, नेकलेस की तब सोच्चेंगे ......|

भाई नत्थू ,,,,मेरे इस सुझाव को अमल में लाने के बाद संकट टल गया की मुद्रा में निश्चिन्त मत हो जाना ....|

वैसे, परजाई जी, का हक़ बनता है ,कहो तो आज ही किसी ज्वेलरी शाप चलें ,कल सोने का कहीं भाव न बढ़ जाएँ ....?

कार और ज्वेलरी दोनों पाके,उधर से अगाध प्रेम उमड़ेगा.... ,उसकी साक्षी बनने मै चाय पर जरुर आउंगा ,तब तुम्हारी काबलियत की तारीफ करके, सोने में सुहागा कर दूंगा ....

चमक किस-किस की दुगनी होती है ....देखें .......

 

सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)

susyadav7@gmail.com

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११/८/१५

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ऊपर का चित्र - रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति

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