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सीताराम पटेल की रचनाएँ - दुनिया की प्रथम प्रेम कहानी

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दुनिया की प्रथम प्रेम कहानी


1 :-
कितने पाकिस्तान में समय ही नायक, महानायक और है खलनायक
अदीब और विद्या के परस्पर आकर्षण से आरंभ होती है कहानी
खामोशी की गहराई ही शायद था लगाव का पैमाना
मिलन, प्रतीक्षा और साथ साथ सफर चलता रहा यह दो साल
फिर विद्या से अलगाव, विद्या द्वारा बिना नाम पता के खत लिखना
अगर भेजा जाए मन से खत, तो कई जन्मों के बाद भी
पहुँच ही जाता है पहुँचने वाले तक


2 :-
किसी कारण ब्राह्मण पुत्र की मृत्यु
उसे जोड़कर देखा गया, शुद्र शंबुक की तपस्या से
राजाराम द्वारा हत्या है एक जघन्य अपराध
जिसे किया है राजा राम ने


3 :-
वैदिक युग आसक्ति और व्यभिचार बलात्कार की है दास्तान
ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या है अपूर्व सुन्दरी
परियाँ भी उसके सामने पानी भरी
इन्द्र हो गया उस पर आसक्त
धारण कर लिया ऋषि गौतम का भेष
चैकसी के लिए उसने साथ लिया चंद्रमा
उसे नियुक्ति किया आश्रम के द्वार पर
और और ऋषि पत्नी अहिल्या के साथ तब
इन्द्र ने किया संभोग
ऋषि गौतम ने सुनाए तीनों को सजाएँ
इन्द्र को उन्होंने दिया शाप
ओ दुराचारी इन्द्र तेरा होगा पराभव
जिस आसक्ति के कारण तूने
मेरी पत्नी के साथ किया है दुराचार
ऐसे सहस्रों पाप प्रकट होंगे तेरे शरीर पर
और करते रहेंगे लज्जित तुझे जीवन भर
चन्द्रमा तेरे शरीर में हमेशा बने रहेंगे
मृगचर्म के दाग , तुझे लगेगा क्षयरोग
महीने में केवल एक दिन मिलेगी तुझे पूर्णता
बाकी दिनों में तू रूग्ण रूप में
बना रहेगा घटता बढ़ता म्लान
अरे तू कैसी है पतिव्रता पत्नी
तूझे पता नहीं चला किसी कपट का
तू नहीं जान पाई परपुरूष और अपने पति का भेद
रूप गर्विता हृदयहीना जा पत्थर की शिला बन जा


4 :-
युरूक के सम्राट गिलगमेश की गूंजती आवाज
मैं लड़ूँगा पीड़ा से सहूँगा यातना
कुछ भी हो मैं पराजित करूँगा मृत्यु को
मैं मृत्यु से मुक्ति की औषधि लाउँगा खोजकर
सदियाँ बीत गई मृत्यु से मुक्ति की औषधि लेकर मनुष्य
सम्राट गिलगमेश नहीं लौटा अभी
लेकिन देवदासी रुना और वन्य पुरूष एंकिदू
ने सहज ही कर लिया था
प्रेम नामक जिस संवेग का अन्वेषण
उन्हें नहीं था मृत्यु का भय
मनुष्य जाति में वह सदा सदा के लिए
स्थिर हो गया था जीवित और जाग्रत
उसे मार नहीं सकती मृत्यु
जला नहीं सकती थी अग्नि
उड़ा नहीं सकती थी वायु
उसे काट नहीं सकता था शस्त्र
उसे डुबो नहीं सकता था सागर
यह दुनिया की थी प्रथम प्रेम कहानी
उस कहानी में शामिल है
बूटासिंह और रेतपरी की कहानी
वर्जित प्यार ही होता है असली प्यार
जिस प्यार में वर्जना नहीं, वह है वेश्यावृत्ति
पर वह वृत्ति समाज द्वारा है स्वीकृत
तुम समाज को करो बहिष्कृत
मैनें अभी अभी सुना
तुम्हारी प्रेमिका ने चाहा है उसे जी लो
जो दिल चाहता है सुनो
दिमाग से जिओगे तो जी नहीं पाओगे
और यह दुनिया भी तुम्हें जीने नहीं देगी
अपनी वर्जना से उपर उठकर ग्रहण करो आसक्ति को
आसक्ति में ही है आनंद, आसक्ति ही है अंतिम
वह चाहे प्राप्त होती हो किसी शाश्वत मार्ग से
या नश्वर उपादन से
वर्जनारहित आसक्ति का करो वरण
इसे जिओ क्योंकि मनुष्य के सबसे
कोमल प्रतिबद्ध क्षण आसक्ति में ही होते हैं निहित
और प्रकृति बनाती है इन्हें पवित्र
सच्चाई यही है कि कुदरत ने बनाएँ है कुछ कानून
आदमी औरत के आपसी रिश्तों का है यही कानून
औरत कुछ देकर पाती है और आदमी कुछ पाकर देता है
शायद हम ही है सृष्टि
नश्वर होते हुए भी निरन्तर जी सकने की श्रृंखला की एक कड़ी
बड़ी संस्कृति का सूरज भी होता है बड़ा
हर औरत की शायद यही है कमजोरी
वह खोजती है एक चेहरे वाले आदमी को
और यह भूलकर कि तुम कौन हो
समा जाओ मुझमें और कर दो मुझे आजाद


5 :-
बाजारों के लिए बनते हैं साम्राज्य
और साम्राज्यों को जीवित रखने के लिए बनाए जाते हैं बाजार
साम्राज्यों की नाभि जुड़ी है बाजार से
पूंजीवादी प्रजातंत्रों को जीने के लिए
मुनाफे की बाजारों की जरूरत है बाजार
बाजार ! बाजार ! बाजार !
यही है औद्योगिक क्राँति को
सतत जीवित रहने की मजबूरी भरा सिद्धांत
यही है पूँजीवाद ! इसी का नाम है साम्राज्यवाद
तीसरा नाम है उपनिवेशवाद
आज दस्तक देती हुई नई सदी में इसका नाम है बाजारवाद


6 :-
किसी नेता को यह नहीं होता गवारा
जनता की भावनाओं को भड़काकर
पैदा किए गए आंदोलनों की यही ताकत
और है कमजोरी , एक बार जो कह दिया
पर बाद में चाहे लगने लगे अनुचित और गलत
पर उसे नहीं जा सकता बदला
नफरत और खौप की बुनियाद पर बनने वाली
कोई चीज नहीं हो सकती मुबारक
जैसे बापू कह रहे हो
गलत फैसलों से उपजती है हिंसा
और हिंसा से अपसंस्कृतियाँ और रक्तपात
दाराशिकोह का सिर कलम हुआ
उसी दिन हिन्दुस्तान की बनती
एक सहिष्णु और नई तहजीब का हो गया सिर कलम


7 :-
हिन्दू मिथ्या अहंकार का है शिकार
इसलिए गुरूनानक का वचन
कह रहा है बंजारे की तरह भटक भटक कर
इस दौर में जात पांत और ठीक झूठे
अभिमान से उपर उठा हुआ
और मोह लोभ से मुक्त नहीं है कोई व्यक्ति
ब्राह्मण तो कर्मकांड का सहारा लेकर
बाकी जनता पर कर रहा अत्याचार
आज हर सभ्यता, हर धर्म में पैदा हुआ है ब्राह्मणवाद


8 :-
इतिहास और भूगोल से अतिक्रमण करता कितने पाकिस्तान
बीसवीं सदी की महान उपलब्धि, एक अविस्मरणीय और महान कृति
हिन्दी के प्रथम विश्व उपन्यास
इन बंद कमरों में मेरी सांस घुटी जाती है
खिड़कियाँ खोलता हूँ तो जहरीली हवा आती है

 

 

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चालाक खरगोश


हम सबने शेर और खरगोश की कहानी सुनी है, जिसमें खरगोश अपनी चालाकी से जंगल के और जानवारों को बचा लेता है, हम सबने कछुआ और खरगोश की एक दूसरी कहानी भी सुनी है, जिसमें खरगोश कुएँ के जगत के पास सो जाता है और कछुआ से दौड़ प्रतियोगिता हार जाता है, दोनों कहानी में खरगोश कुएँ के जगत के पास सो जाता है, पहले कहानी में उसकी बुद्धि जाग जाता है,पर दूसरी कहानी में आलसी बनकर सो जाता है, पहली कहानी में चालाक और दूसरी कहानी में आलसी। खरगोश खरगोश है वह आलसी कहाँ होगा, खरगोश दो प्रकार का नहीं हो सकता, बच्चा भ्रम में पड़ जायेगा, वास्तव में खरगोश चालाक है या आलसी, हम दोनों कहानी को एक कहानी कहने पर वह चालाक नजर आता है, ये जो दो कहानियाँ हमें सुनाई जाती है, वास्तव में दो कहानियाँ न होकर एक ही कहानी है, हम सब यह जानते हैं, कछुआ और खरगोश की प्रतियोगिता में खरगोश ही जीतेगा, पर यह खरगोश की सोची समझी चाल थी, उसने अपनी पारी में कछुआ से दौड़ प्रतियोगिता रखी और वह जान बूझकर कुएँ के जगत के पास सो गया, जिससे कछुआ दौड़ जीत जाये और शेर के मुँह में चला जाये।

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शेर और खरगोश की एक नई कहानी


जंगल में एक शेर रहता है, वास्तव में शेर जंगल में ही रहता है और वह वहाँ का राजा रहता है, वहाँ जंगलराज करता है, वह कितना निर्दयी होता है, वह ही जाने,हम उसके बारे में कुछ भी नहीं कह सकते, हम भी उस जंगल के छोटे से जानवर हैं,वह कितनों को मारकर खाता है,कितनों फेंकता है, इसका पता नहीं चलता,जंगल के सब जीव जन्तु मिलकर उसके पास आते हैं और कहते हैं-आप हमें इतनी निर्दयता से हमें न मारे, हम आपके पास एक एक कर आते जायेंगे और आप बड़े प्यार से आहिस्ता आहिस्ता चबा चबा कर खायेंगे जैसे सिनेमा में खलनायक मुर्गा के टाँग को चबा चबा कर खाता है, जंगल के राजा को जैव विविधता के बारे में बताते हैं तो उसकी समझ में आता है और वह बड़ी मुश्किल से मानता है,फिर उसके पास सभी जानवर पारी पारी से आते हैं और वह उन्हें बड़ी बेरहमी से मारकर खा जाता है।
एक बार खरगोश की पारी आता है,तो वह सोचता है मरना ही है तो डरना क्या, वह कुएँ के जगत के पास सो जाता है,जब वह उठकर मुँह धोना चाहता है, तो कुएँ के पानी में अपना प्रतिबिम्ब दिखाई देता है, उसकी बुद्धि तुरंत जाग जाती है, वह जोर से चिल्लाता है, हिप हिप हुर्रे, कुएँ से फिर प्रतिध्वनि होता है हिप हिप हुर्रे।
वह खुश होकर राजा शेर के पास जाता है, राजा भूख से बेहाल है, उसे कुछ नहीं सूझता है,वह क्रोधित होकर जोर से चिल्लाता है- इतनी देर क्यों लगा दी?
खरगोश की सब हवा निकल जाता है, वह थर थर काँपते हुए कहता है- मैंने सोचा मरना है तो डरना क्या, कहकर कुएँ के जगत के पास सो गया। शेर कहता है-मुझे मालूम है , सब मुझे मालूम है, फिर तू उठा, कुएँ में अपना चेहरा देखा, चेहरा देखकर खुशी से चिल्लाया, हिप हिप हुर्रे, कुएँ से प्रतिध्वनि आई हिप हिप हुर्रे, तू खुश होकर मेरे पास आ गया, पर तुझे मालूम नहीं , ये कहानी मेरे पापा ने मुझे बताया था, हमारी पूर्वज ने वो गलती की थी, फिर वह गलती मैं कैसे दोहराउँगा, अब तुझे समझ आया।
बाकी आगे क्या हुआ होगा, आप सब जान गए होंगे,आज भी हमारे यहाँ जंगलराज चल रहा है।

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सीताराम पटेल

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