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चुनिन्दा आलमी शायरी

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मौलाना रूमी

मेरी मसनवी को मात्र अक्षर न समझो

देखो तो पुराने अक्षर के जिस्म में

कैसी न नई रूह समाई हुई है!

*

जब कोई सुनने वाला नहीं है

तब खामोशी बेहतर है

नासमझ से अगर किसी बात का अन्त

छिपा लिया जाय तो बेहतर है।

*

अगर सुनने वाला प्यासा और बेचैन होता है

तो फिर सुनाने वाला भले ही कमजोर क्यों न हुआ हो

फिर भी उठकर बतियाने लगता है।

*

सिर्फ सुनी सुनाई बातें

बयान करने वाले की ज़बान पर

सौ दलीलें व सौ किस्से होंगे

पर उनमें कोई जान न होगी!

*

कहा-‘”कौन कहता है दुनिया में सूरज भी है”

तो सूरज खुद आकार सामने खड़ा हो गया

अब भी अगर तुम्हें सूरज के वजूद का सबूत चाहिये

तो सूरज की ओर देखो।

*

जो ज़्यादा सचेत है, वह ज्यादा विषादी है

जो ज्यादा अनभिज्ञ है, उसका चेहरा ज्यादा फीका है

*

इश्क का सदा बहार गुलशन

बहार व ख़िज़ाँ की क़ैद से आज़ाद है

खुशियों व ग़मों से बे-न्याज़ है

उसमें सदा मीठे फल मौजूद होते हैं!

*

खुदा की नज़र में किसी

दुखियारे की आँख से गिरा हुआ आँसू

शहीद के खून सा पाकीज़ है

*

आशिक़ी दुख और सुख से बुलंद है

वह बहार और ख़िज़ाँ के बगैर ही

सरसब्ज़ और सदा बहार है।

*

मेरा जिस्म यूं सोया रहता है

जैसे वह बिलकुल अकेला है

पर हक़ीक़त में उस वक़्त

मेरे दिल में आठ जन्नतें आबाद होती हैं।

*

मेरे भाई! तुम्हारी हस्ती

तुम्हारी सोच है

बाक़ी तो सब हड्डियाँ और मात्र गोश्त है।

*

ख्वाहिशें ज़रूर रखो, पर हद के भीतर

घास का तिनका

पहाड़ का बोझ नहीं उठा पाएगा!

*

ईंट और पत्थरों से बनी मस्जिद

तो फ़क़त ज़ाहिरी दिखावा है

असली मस्जिद और असली हक़ीक़त तो

दिल वाले की दिल है।

 

 

सिन्धी से हिन्दी अनुवाद: देवी नागरानी

--

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Devi Nangrani
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