विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

अफवाहें - कितनी सही और कितनी गलत

image


     नीलम कुमारी   
                                         
सुबह की भीनी खुशबू के साथ ये मस्तानी हवा कितनी अच्छी लग रही है, जो चाहता है कि हाथ में चाय का प्याला लिये यूं ही खिड़की के पास बैठकर सुहानी सुबह का लुत्फ उठाती रहूं। दो महीने हुए, आकाश से शादी के बाद यहॉ आये हुए बस रोजाना का हमारा रूटीन बन गया है सुबह की सैर के बाद चाय पीना और फिर खाने की तैयारी करो, लंच पैक करो और आकाश को ऑफिस भेजो


          उसकी भी तो यही रूटीन थी, मेरे सामने वाले रॉ हाउस मे उपर किराये पर रहती है, वो भी हमारे तरह बस पति पत्नी ही थे, शायद हमसे ज्यादा साल हो गये उनकी शादी को, वो भी वैसे ही सुबह सुबह अपना काम खत्म करके अपने पति को ऑफिस भेजा करती है। आमने सामने तो हम बहुत बार हुए मगर एक दूसरे से बातें नहीं हुई। मन तो करता था कि उससे बात करूं क्योंकि एक तो ही थी जो मेरे हमउम्र थी।


         लेकिन पड़ोसियों से थोड़ी जान पहचान होने के बाद पता चला कि लोग उसके बारे में क्या सोचते है। 'नीता' नाम है उसका, वे लोग हमेशा मुझे मना करते रहे उससे दोस्ती करने को कहते है उसका चरित्र ठीक नहीं कैसे कैसे कपड़े पहनती है, इधर उधर धूमने जाती है।


         मगर मुझे तो कभी ऐसा नहीं लगा, मैने तो उसे हमेशा अच्छे कपड़ों में ही देखा है। फैशनेबल कपड़े में, खूबसूरत तो वो है ही अपने चुनिंदा कपड़ों में और भी अच्छी लगती है वो मेरा तो मन ही नहीं मानता था कि उसके चरित्र में कोई खराबी हो, क्या सिर्फ कपड़ों से किसी के चरित्र के बारे में बताया जा सकता है ? हम तो हमेशा खबरों में देखते रहते है कि जो लोग शरीफ बनते है उनके बारे में भी क्या क्या नही सुनने को मिलता।
        एक दिन शाम को अपनी अपनी बालकनी में हम दोनो खड़े थे बहुत झिझकने के बाद मैने उससे पूछा था 'आप क्या करती है' ? उसने जवाब दिया पढाई। वो भी मेरी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी। बस धीरे धीरे इन छोटी छोटी बातों से हमारे बीच दोस्ती बढी, उसके बाद मैने जाना कि लोग जैसा कहते है तो वैसी बिल्कुल नहीं है।


        आखिर गलती क्या है उसकी, बस ये कि वे अपनी जिन्दगी अपने मुताबिक नीति है, बिना किसी रोक टोक के अपने सपनों को पूरा करने की आजादी है उसे, उसके पति भी उसका कितना साथ देते है बिल्कुल आकाश की तरह। हम सभी तो ऐसा ही चाहते है ना।


        पड़ोस की भाभी आई हुई थी अपनी बच्चियों के साथ, चाय पीते वक्त अचानक ही नीता की बात आ गई भाभी मुझसे पूछने लगी कि क्या तेरी उस नीता से बात होती है? मैनें कहा हॉ, तो अच्छी लड़की है, तभी उनकी बेटी ने कहा ऑन्टी वो तो पहले बहुत मोटी थी और अब जब से वो पतली हो गई है तो जीन्स, कैपरी पहन कर धूमती है फैन्शी नाइटी पहनती है, मुझे ये सुनकर बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। मैनें उसे टोका और कहा कि इसमें गलत क्या है ? आज कल तो सभी शादी के बाद जीन्स, र्स्क्ट वैगरह पहनती है, अगर वो पहनती है तो उसमें बुराई क्या है? तुम बताओ, क्या तुम अपनी शादी के बाद सिर्फ साड़ी पहनकर रह सकती हो, अरे तुम लोगो को तो अब सलवार सूट भी जबरदस्ती या समझाकर पहनना पड़ता है। ऐसे में अगर उसे ये आजादी है कि वो कुछ भी पहन सकती है तो इसमे गलत क्या है? तो कौन सा मिनी स्कर्ट पहन कर घूम रही है, सिर्फ जीन्स पहनने से उसका चरित्र खराब हो गया क्या   ? और वो ही क्यों मैं भी तो आज भी शादी के जीन्स पहनती हॅू तो क्या मेरा  चरित्र भी खराब है?


        भाभी आप लोग क्यों नहीं समझते, जो लोग आज नीता के बारे में बोलते हैं, क्या वो कल हमारे बारे में बातें नहीं करेंगें इसका भरोसा है आपको। अरे काम पड़ने पर अगर तो किसी जान - पहचान वाले के साथ बाहर चलो गई तो क्या हो गया? आप बताइए कल को जब मुझे जरूरत पड़ेगी और मैं भैया के साथ कही बाहर गई तब ये लोग हमारे बारे में भी ऐसी ही बातें करेंगें, तब क्या आप उनकी बातों का यकीन कर लेगी।


        सिर्फ फैशनेबल कपड़े पहनने से या खुले मिजाज से बात करने से कोई बुरा तो नहीं हो जाता ना, एक बार खुद को उसकी जगह रखकर देखिए और बताइए यह सब कहॉ तक सही है। आखिर क्यों? हम बिना सोचे - समझे, सिर्फ दूसरों की बात सुनकर किसी अफवाह का हिस्सा बने। अरे लोगो का क्या है सभी अपने नजरिये से देखते है और जो समझ में आता है बोल देते है, दूसरा उसी बातों को दूसरी नजरिये से देख कर व्यक्त कर देता है और इसी तरह एक छोटी सी बात अफवाह बन कर सब जगह फैल जाती है, और उसे दूर करने के बजाए हम सब उसी अफवाह का हिस्सा बन जाते है। ऐसा क्यो न हो कि हम किसी भी बात का आकलन अपने नजरिये से कटे और फिर निर्णय ले कि ये अफवाहें कितनी सही है और कितनी गलत।

-----

image 

 

नीलम कुमारी

पता : कर्मचारी राज्य बीमा निगम , उप क्षेत्रीय कार्यालय , सूरत

गुजरात – 395001

ई मेल : neelam.kumari25@esic.in

नीलम कुमारी

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget