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हास्य-व्यंग्य : मामला मुन्नी बहन का

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-  प्रमोद यादव

‘ ऐ जी..एक बात कहूँ ? ‘ देर रात को टी.वी.न्यूज देखते पति से पत्नी बोली.

‘ एक नहीं ..दो कहो..बताओ कहाँ जाना है ? कल-परसों मेरी छुट्टी है..’

‘ अरे जाना कहीं नहीं जी...मैं कह रही थी कि मुझे अंग्रेजी में एम.ए. करना है..’ पत्नी झिझकते हुए बोली.

‘ अरे वाह..एकाएक ये क्या शौक चर्राया ? मालुम भी है कि एम.ए. के पहले बी.ए. करना पड़ता है ? ‘

‘ अरे कोई जुगाड़ करके सीधे ही एम.ए. करा दो न ? देखिये कैसे एम.पी. में लोग व्यापम से सीधे डाक्टर और डेंटिस्ट बनते हैं..’ पत्नी बोली.

‘ अरी भागवान.. रूपये भी तो अफरात लगते हैं...एक करोड़...दो करोड़.. तब जाकर बनते हैं..तुम्हारे पास क्या है ? बाबाजी का ठुल्लू ? ‘

‘ अच्छा चलिए..बी.ए.ही करा दीजिये..हजार-पांच सौ दे सकती हूँ..और पहले ही बताये देती हूँ.. पढ़ाई-लिखाई हमसे नहीं होगी..’ पत्नी चेताते हुए बोली.

‘ अरे..तो फिर पास कैसे होगी ? ‘ पति भौंचक हो पूछा.

‘ अरे जब रूपये देंगे तो परीच्छा में क्यों बैठेंगे ? हमारी जगह हमारी बहन बैठेगी..’

‘ यानी मुन्ना भाई के बाद अब मुन्नी बहन ? भई.. ये तो फर्जीवाड़ा होगा ..’

‘ तो क्या ? जब प्रदेश के शिक्छा मंत्री ही बाज नहीं आये..अपनी पत्नी को एम.ए. कराने अपनी साली को बिठाये तो आप क्यों नहीं कर सकते फर्जीवाड़ा ? ‘

‘ देवीजी.. फर्जीवाड़ा करने के लिए भी ताकत चाहिए.. हिम्मत चाहिए..मुझ जैसे लल्लू-पंजु के बस का काम नहीं.. हर फर्जीवाड़े के पीछे रसूखदार,पहुंचे हुए बाहुबली जैसे लोग होते है..पूरा अमला होता है तब जाकर सक्सेस होता है कोई फर्जीवाड़ा..उन्हें न किसी का डर होता है न किसी का खौफ..ये भी मंत्री हैं.. ताकतवर हैं..पर थोड़े भोले हैं.. “मुन्नी बहन” का रोल पूरे “सेटिंग” के साथ साली से करवा तो गए..पर अंतिम पेपर में फंस गए..इनके गृह-नक्षत्र शायद ठीक नहीं..दुर्भाग्य से भांडा फूटा और धरे गए..तुम उनकी नक़ल करोगी तो मिनटों में पकड़ी जाओगी.. और मैं तुम्हें छुड़ा भी न पाऊंगा..’ पति ने समझाया.

‘ अरे..क्यूँ पकड़ी जाउंगी..उनकी साली पकड़ी गई क्या ? परीक्छा हाल छोड़ भाग गई ना ? ‘

‘ अरी मूर्ख.. भागी नहीं..भगा दी गई..सब सोची-समझी साजिश के तहत हुआ..जब मीडिया और अखबार वाले पहुंचे तो वहां का पूरा अमला ही भाग खड़ा हुआ..न निरीक्षक न परीक्षक,,न केन्द्राध्यक्ष..न समन्वयक..सबके सब लापता..’

‘ऐसा क्यों ? ‘ पत्नी पूछी.

‘ सीधी सी बात यार.. जो इस मुद्दे पर बोलेगा वही तो मरेगा..और मरना किसे पसंद है ? इसलिए सब डर के मारे भाग गए..‘

‘ अरे भई..जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का ? ‘ पत्नी बडबड़ाई.

‘ कहती तो ठीक हो पर जब सैंया ही सहमकर..डरकर चुप्पी साध ले तो मातहत कैसे न डरे ? मीडिया और अखबार वालों ने उनसे फर्जीवाड़े की पुष्टि चाही तो बोले कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं..अजीब बात कि पति को नहीं मालूम कि पत्नी एम.ए. की परिक्च्छा दे रही..बोले कि मीटिंग में हूँ..मुझे कुछ नहीं मालुम..अब जिस मंत्री को अपने घर,अपनी पत्नी का ही हांलचाल पता नहीं वे भला इतने बड़े मंत्रालय के विभिन्न विभागों का क्या अता-पता रखते होंगे ? ‘

‘ हाँ जी..मैं भी टी.वी. पर देख रही थी..उनकी चुप्पी ने ही विरोधी दल को बैठे-बिठाए शानदार मुद्दा गिफ्ट कर दिया..केंद्र का रोग अब स्टेट को लग गया..इस सीरीज के सर्जक विदेश में बैठ गुलछर्रे उड़ा रहा.. कबड्डी-कबड्डी खेल रहा..कभी सत्ता पक्ष को मार रहा तो कभी विपक्ष को..सड़क से संसद तक का मजा ले रहा.. विरोधी दल तो केंद्र में चीख ही रहे अब स्टेट में भी चीख रहे.. इस्तीफा दो.. इस्तीफा दो..’ पत्नी एक सांस में बोली.

‘ गुड यार..अच्छी याददाश्त है तुम्हारी..पर इनके सी.एम. भी तो केंद्र के तर्ज पर रट रहे - “नहीं देंगे इस्तीफा..वो थोड़े ही एग्जाम दे रहे थे.. वे मंत्री बने रहेंगे..” इसके पूर्व भी एक बार नसबंदी काण्ड को लेकर..सम्बंधित मंत्रीजी के इस्तीफे को लेकर मचे बवाल पर बयान दिया था कि मंत्रीजी ने थोड़े ही आपरेशन किये..वे नहीं देंगे इस्तीफा..अब ये भी कोई बात हुई..पहले के मंत्री रेल-दुर्घटना होते ही नैतिकता के नाते बड़े ही विनय के साथ इस्तीफा पेश कर देते..पुराने किसी रेल मंत्री ने कभी नहीं कहा कि क्यों दें इस्तीफा ? मैं थोड़े ही रेल चला रहा था..और फिर ऐसी ही बात है तो उन केन्द्रीय मंत्री और मुख्य-मंत्रियों से तो इस्तीफा लेनी ही चाहिए जिन्होने सीधे-सीधे ही पर्सनली घोटाला किया..लेकिन वहां तो चोरी और सीनाजोरी का खेल चल रहा..जो इस्तीफे पे अड़े उन्हें निलंबन किया जा रहा..’ पति ने भी लम्बा भाषण जड़ दिया.

‘ पर ये तो गलत मैसेज जा रहा है जी..जिस मंत्री को छात्र-छात्राओं का रोल माडल होना चाहिए ,वही फर्जी रोल अदा कर रहा..हीरो की जगह विलन हुआ जा रहा..क्या होगा इस देश का और इस देश के बच्चों का भविष्य ? अच्छा हुआ.. शिक्छाविद कलाम साहब ये देखने-सुनने के पहले ही रुखसत हो गए..अन्यथा काफी दुखी होते..संसद के “डेड लाक“ से तो विछुब्ध थे ही..इसे सुन और परेशान हो जाते..अभी तक तो मुन्ना भाई ही सुनी थी..अब मुन्नी बहन भी आ गई..इसी के चलते मेरे जेहन में बी.ए.करने का ख्याल आया और ख्याल आया अपनी छोटी बहन का जो इसे अंजाम देती ..’

‘ अरी फर्जीमतीजी ..तुम्हारी मति मारी गई है क्या ? क्या बार-बार बताना पड़ेगा कि मैं एक सीधा-सादा आम आदमी हूँ..हाईस्कूल का साधारण सा टीचर हूँ.. पर बहुत ही स्ट्रिक्ट हूँ..कहो तोतुम्हारे लिए चाँद-तारे भी तोड़ लाऊँ पर तुम्हारी ये मंशा मैं पूरी नहीं कर सकता..तुम्हें मुफ्त की डिग्री नहीं दिला सकता..फर्जीवाड़ा मेरे खून में नहीं..’

‘ तो क्या है आपके खून में ? गरीबी ? गुलामी ? नाकामी ? ‘ पत्नी लगभग चीखती सी बोली.’

‘ अरे चीखो मत यार..बी.ए. करके बिहार की सी.एम. नहीं बन जाओगी..मुझे तो ये समझ नहीं आ रहा कि एम.ए. कराके के ये मंत्री जी क्या करते ? कद के अनुरूप कोई घोटाला करे तो समझ भी आये..इन्होने तो हद ही कर दी..ये तो ऐसा ही हुआ कि जैसे कोई चोर किसी बड़ी ज्वेलरी दूकान में घुसके केवल ताम्बे की अंगूठी चुरा लाये.. आज के डेट में तो इस डिग्री की कोई अहमियत नहीं..किसी को मुफ्त में भी मिले तो नकार दे..भला इस डिग्री से किसी का क्या भला होने वाला ? किसी को इसके बूते क्या नौकरी मिलने वाला ? अब चुप्पी भी ऐसे साध गए हैं कि पूछ भी नहीं सकता ..मुझे तो बस यही जानने की उत्सुकता है कि उनकी पत्नी इस डिग्री से क्या भाड़ झोंक लेती ? ’

‘ तो इसका मतलब ये कि मैं जिंदगी भर मैट्रिकुलेट ही रहूँगी..आप नहीं चाहते कि आपकी बीबी तरक्की करे ? ‘

‘ अरे.. करे..पर फर्जीवाड़े से नहीं..जब मंत्रीजी पकडे गए तो हम किस खेत के मूली ? और मुझे ऐसे छोटे और टुच्चे काम में पकडा जाना अच्छा नहीं लगेगा..मैं तो शर्मिंदगी से ही मर जाऊँगा..तुम मैट्रिक में ही अच्छी लगती थी..लगती हो और लगती रहोगी..बी.ए. का स्वप्न छोडो और फिलहाल बी बी की डिग्री से काम चलाओ..बीबी का फर्ज निभाओ..आओ..देखो..सुहानी रात ढल रही..’ इतना कहते पति ने बत्ती बुझा दी.

अँधेरे में फुसफुसाहट उभरी - ‘ एक बात पूछूं मीना..? ’

‘ हां..पूछो..’

‘ मैट्रिक की परीक्छा में मीना ही बैठी थी कि मुन्नी ? ‘

‘ अच्छा जी..मुन्नी वाली बात क्या छिड़ी आपको अब सब कुछ फर्जी लग रहा..जाइए..आपसे बात नहीं करनी मुझे ..मैं पप्पू के कमरे में सोने जा रही..अब सुहानी रात का जश्न अकेले ही मनायें..मुझे मनाने कतई न आयें..’ कहती गुस्से से पैर पटकते पत्नी चली गई..

पति ‘ मीना.. सुनो तो.. मुन्नी.. सुनो तो.. ओं मुन्नी रे..’ चिल्लाते रह गया.

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प्रमोद यादव

गया नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़

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