स्मृति लेख - डॉ. बालशौरि रेड्डी नहीं रहे

 
डॉ. बालशौरि रेड्डी
 
प्रोफेसर महावीर सरन जैन
आज दिनांक 15 सितम्बर, 2015 को अभी-अभी दुखद समाचार मिला है कि मेरे मित्र तथा दक्षिण भारत के अप्रतिम हिन्दी सेवी डॉ. बालशौरि रेड्डी का निधन हो गया। सन् 1992 में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद से आरम्भ हुई हमारे मैत्री सम्बंध प्रगाढ़तर होते गए। सन् 1992 में वे भारतीय भाषा परिषद्, कलकत्ता को अपना मार्ग दर्शन प्रदान कर रहे थे। मेरा जब जब मद्रास (चैन्नै) जाना होता था और उन दिनों यदि वे मद्रास में होते थे, तो उनसे मिलना अवश्य होता था। सन् 2001 में सेवा निवृत्त होने के बाद मैं अपने पैतृक नगर बुलन्द शहर आ गया। बुलन्द शहर जनपद के गुलावठी के साहित्यकार डॉ. देवकी नन्दन शर्मा अक्टूबर, 2001 में मुझसे मिलने आए। वे मुझको गुलावठी में उनके द्वारा प्रणीत आलोचनात्मक ग्रंथ आधुनिक हिन्दी कविता : स्वरूप और संरचना एवं काव्य संकलन कभी फूल कभी शूल का लोकार्पण करने के लिए आमंत्रित करने आए थे। मैंने उनको यह सुझाव दिया कि इस अवसर पर वे मेरे साथ-साथ दक्षिण-भारत के किसी हिन्दी सेवी को भी आमंत्रित करें। उनको मेरा सुझाव पसंद आया। उन्होंने इसके लिए साहित्यकार का नाम और पता बताने के लिए कहा। मैंने उनको डॉ. बाल शौरि रेड्डी का नाम सुझाया। मेरे आग्रह को डॉ. बालशौरि रेड्डी नहीं टाल सके। मुझे प्रसन्नता है कि 2 नवम्बर, 2001 को वे इस लोकार्पण उत्सव में पधारे। उस दिन की स्नेहिल यादें ताजा हो रही है। उनके साथ जुड़े हुए अनेक प्रसंगों की स्मृतियों का दबाब इतना अधिक सघन, आकीर्ण, सघन और पीड़ाप्रद हैं कि उनको व्यक्त करना दुष्कर है। मुझको उन्होंने जो पत्र लिखे, उनमें से दिनांक 01 अक्टूबर, 1992 को लिखा पत्र पाठकों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।
(पत्र- एक)
डॉ. बालशौरि रेड्डी
भारतीय भाषा परिषद्
आदरणीय जैन साहब,
सस्नेह नमस्कार।
मैंने समाचार -पत्रों में पढ़ा कि आपने केंद्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक का पदभार ग्रहण किया है। मुझे अत्यंत हार्दिक प्रसन्नता हुई। विश्वास है कि आप के मार्ग दर्शन में संस्थान पूर्वाधिक विकास को प्राप्त करेगा। कोई भी संस्थान कुशल नेतृत्व व मार्ग दर्शन पाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। इस प्रतिष्ठित पद पर सुशोभित होने के उपलक्ष्य में मेरी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं स्वीकार कर लीजिए।
ये पत्र-वाहक मेरे परिचित हैं। ये प्रशिक्षण संबंधी कार्य में आपकी सहायता के आकांक्षी हैं। कृपया इनकी मदद कीजिए।
सादर।
आपका
बाल शौरि रेड्डी
मेरा सुझाव है कि उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए चैन्नई में दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा अपने परिसर में उनके नाम से ग्रंथालय का निर्माण करे जिसमें उनकी समस्त रचनाओं एवं उनके साथ संपृक्त चित्र एवं पत्रादि का भी संग्रह हो। इसके लिए भारत सरकार संस्था को यथोचित अनुदान प्रदान करना चाहिए।
 

प्रोफेसर महावीर सरन जैन
सेवा निवृत्त निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान
123, हरि एन्कलेव
बुलन्द शहर – 203001
mahavirsaranjain@gmail.com





















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