पांच हजार दो, पत्रकार बनो

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रवि श्रीवास्तव

जी हां आप सोच में पड़ गए होगें. पांच हजार देने पर कैसे पत्रकार बनेंगे. लेकिन पत्रकारिता के इस दौर में सब कुछ मुमकिन है. पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए लाखों का खर्चा आता है. अगर आप किसी प्राइवेट इंस्टीट्यूट से पढ़ाई करते हैं. लेकिन आज के इस दौर में इसकी पढ़ाई की जरूरत ही नहीं.

अगर आप के पास पैसा खर्च करने के लिए है. एक सच्चाई से आप को वाकिब कराना चाहता हूं. नौकरी बदलने के लिए मैने कई जगहों पर अपना बायोडाटा भेजा था. एक जगह से जिसका जवाब आया. नाम से तो लग रहा था काफी संस्कार भरा न्यूज चैनल हैं.

लेकिन फोन उठाते ही जब बात हुई तो मुझसे कहा गया कि आप हमारे साथ काम कर सकते हैं. जिसके लिए आप को पांच हजार रूपए डिपोजिट करने होगें. पैसे के डिपोजिट होते ही आप को लेटर, आईडी, चैनल की आईडी भेज दी जाएगी.

अगर आप रूपए नहीं दे सकते तो 5000 का विज्ञापन दे दीजिए. बात यही खत्म नहीं होती. मैने जब उनकी तरफ से हमें खबर का क्या मिलेगा पूछा तो साफ मना कर दिया. हम आप को कुछ नहीं देंगे. विज्ञापन का 20% आप को दिया जाएगा. अगर आप विज्ञापन देते है.

मैने फिर अपनी एक बात रखी. इतनी जल्दी ये संभव नहीं होगा. और हमें कुछ मिलेगा भी नहीं. तो क्या फायदा. तो जनाब ने कहा कि आप पुराने हैं तो कमाने का जरिया पता होगा. सब कमाने खाने का जरिया जानते हैं. मतलब उनका कहना साफ था पत्रकारिता का रौब दिखाकर वसूली कर अपना घर चलाओ, अपनी कमाई का जरिया बनाओ.

क्या संस्कार थे उस चैनल के ? ये तो साफ था कि लेटर और आईड़ी के दम पर वो अपनी दुकान चला रहे है. जो चैनल एक स्ट्रींगर को ऐसी सलाह देता है. वो खुद क्या करता होगा राम जाने ? वैसे ये कोई पहला चैनल नहीं था. जिसने ये बात कही है. ऐसा कई सारे न्यूज चैनल से सुन चुका हूं. कोई कम तो कोई इससे ज्यादा रकम की मांग करता है. महाशय को मैने बताया कि मैने दिल्ली में जहां काम किया था वहां ऐसा नहीं था.

मैने तो जॉब के लिए सोचा था. जवाब आया कि ये भी आप्शन है. बस आप अपने वेतन से 5 गुना ज्यादा विज्ञापन और 30 स्टोरी देनी पड़ेगी. पत्रकार बनने के लिए काफी अच्छी सौदेबाजी थी. शायद उनको पता नहीं था कि वो जिससे बात कर रहे है.

वो इस फील्ड में दिल्ली में 4 साल दे चुका है. कमाल है काश पहले पता होता तो लाखों खर्च कर पढ़ाई न करते हुए पांच हजार देकर पत्रकार बन जाते. जब आप अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकते तो ये तामझाम क्यों खोल रखे हो. अवैध पैसा वसूलने के लिए. दूसरों को ब्लैकमेल करने के लिए. हां इक बात तो बताना भूल गया. जिनका फोन आया था. देश के 16 राज्यों में उनका न्यूज चैनल और दो देशों में और चल रहा है. जब इतनी जगहों पर आप के चैनल को पसंद किया जा रहा है तो पैसे लेकर पत्रकार क्यों बना रहे हो.

मैने सोचा चलो इनकी वेबसाइट देख लेते हैं. तो उसमें लिखा पाया कि अगर चैनल के नाम से कोई पैसा वसूलता है तो आप इसकी शिकायत हमें कर सकते हैं. एक तरफ वसूलने की बात कर रहे हो, दूसरी तरफ पर्दा भी डाल रहे हो.

कितना अब और पत्रकारिता का स्तर गिराओगे. जिलों में देखता हूं एक एक स्ट्रींगर के पास 3 चार चैनल आईडी होती हैं. योग्य इंसान के पास एक भी नहीं. पैसा देने वालों के पास 3 से 4. वाह देश की मीडिया क्या खूब तरक्की की ? कमाने का एक बढ़िया जरिया है. एक वेब चैनल खोल लो और अपने आई बेंच दो. क्योंकि बहुत से लोग पैसा देकर पत्रकार बनना चाहते है.

उनका सिर्फ इतना सा काम होता है. गाड़ी में प्रेस लिखवा लो. गिरा दो जितना स्तर गिरा सकते हो. लोकतंत्र के चौथा स्तंभ कहलाने वाले को. दोष उन चैनलों का नहीं लोगों का है. जो पैसा देकर आईडी लेकर आते हैं. बढ़ावा तो खुद दे रहे हैं.

ऐसे चैनल साफ-साफ दलाली की ओर ढकेलते हैं. वसूली करते समय मार खाओ या मारे जाओ. लेकिन पांच हजार दो और लेटर आईड़ी ले जाओ.

रवि श्रीवास्तव

ravi21dec1987@gmail.com

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