शनिवार, 26 सितंबर 2015

स्मृति शेष - गोपाल राय

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मेरे मित्र प्रोफेसर गोपाल राय का निधन

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

प्रोफेसर गोपाल राय के निधन का दुखद समाचार मिला। उनसे मेरी सबसे पहली मुलाकात मार्च, 1975 में पटना में हुई थी। सन् 1974 में, पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्कालीन प्रोफेसर एवं अध्यक्ष आचार्य देवेन्द्र नाथ शर्मा जी ने मेरे पास डॉ. कुमार विमल के शोध छात्र का शोध-प्रबंध परीक्षण के लिए भिजवाया था। मार्च, 1975 में उसकी मौखिकी के लिए पटना जाना हुआ। वहाँ डॉ. कुमार विमल के अलावा डॉ. गोपाल राय तथा डॉ. वचन देव कुमार से मुलाकात हुयीं थीं। ये मुलाकातें बाद को मित्रता में बदल गयीं। फरवरी, 1990 में मुझे जबलपुर से अपने एक पारिवारिक काम से पटना जाना था। इसकी सूचना मैंने डॉ. गोपाल राय को अपने दिनांक 15 जनवरी, 1990 के लिखे पत्र के द्वारा दी थी। उनका जो उत्तर मिला, वह पाठकों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है –

दिनांक 01 फरवरी, 1990

डॉ. गोपाल राय

प्रोफेसर, हिन्दी विभाग

पटना विश्वविद्यालय

पटना - 800005

बंधुवर,

आपका 15.01.1990 का पत्र तथा संगोष्ठी का विवरण प्राप्त हुआ, भारी हूँ। मैं आपको पटना वि.वि. से सम्बद्ध करने का इच्छुक हूँ। विशेष कर भाषा-विज्ञान सम्बन्धी गतिविधियों से। आप पटना आएँ तो मुझसे संपर्क करें। फोन नंबर मुद्रित है। मैं तो चाहता हूँ कि आप मेरे साथ ठहरते पर संयोगवश मैं 8/2 को मुरादाबाद के लिए प्रस्थान कर रहा हूँ। 11/2 तक वहाँ एक संगोष्ठी है। सम्भवत मैं 12/2 या 13/2 तक पटना पहुँच जाऊँगा। उस समय तो आप पटना में रहेंगे ही,यदि आपको पटना में रहने की कोई दूसरी व्यवस्था न हो तो मेरी अनुपस्थिति में भी मेरे घर में ठहर सकते हैं। मैं यह निर्देश देकर मुरादाबाद जाऊँगा कि आप आएँ तो आपको मेरे यहाँ ठहरने में कोई असुविधा न हो। आप स्टेशन से ही मेरे निवास पर आ जाएँ।

डॉ. बचन देव कुमार तो रांची मैं हैं। डा. कुमार विमल का पता है। 92 एम. आइ. जी. लोहियानगर पटना ;फोन -529440। मैं 21/1 से 30/1 तक पटना से बाहर था इसी कारण पत्र देने में विलम्ब हुआ है। आशा है सानन्द हैं।

आपका

गोपाल राय

(डॉ. अनूप सिंह द्वारा सम्पादित महावीर सरन जैन: पत्रों के दर्पण से शीर्षक पुस्तक, पृष्ठ 83)

यादें तो बहुत हैं। इस समय रात के 02 बजने वाले हैं। नींद भी आ रही है। उनकी स्मृतियों को नमन। इस समय इतना ही। शेष अबाध्य मधु स्मृतियों की पीड़ा और उनको वहन करने की विवशता।

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महावीर सरन जैन

(सेवा निवृत्त निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान)

123 हरि एन्कलेव

बुलन्द शहर - 203001

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