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हिंदी दिवस की कविताएँ

 

ओम प्रकाश शर्मा

 

हिन्दी का प्रयोग करें

हिन्दी का प्रयोग करें हम देश का मान बढ़ाएँ,
भाषा को उसका विश्व में उचित स्थान दिलाएँ
संस्कृत की वंशज है यह संस्कारों की है भाषा
स्वयं करें अन्यों से भी हम इसमें काम कराएँ।

भाषा रोचक अतिविशाल इसका शब्द भंडार,
संस्कृत पाली प्राकृत से पोषित ज्ञान संसार,
सत्रह बोलियों से घनिष्ठ जुड़ा है इसका नाता,
खड़ीबोली का रूप नया अब हिन्दी कहलाता।

बावन वर्ण वर्णमाला के इसमें सिखलाए जाते,
स्वर व्यंजन अन्तस्थ ऊष्म इसमें ही हैं आते,
चार संयुक्त व्यंजनों को अब इसमें जोड़ा जाता,
वर्णों का क्रम सरल सुगम हम सबके मन भाताI

तत्सम तद्भव देशी विदेशी शब्द इसने अपनाए,
पर्यायवाची मिल जाते इसमे हमें तो मन भाए,
नियमों की भाषा यह कठिनाई कोई न आती,
वर्तनी सरल सीखने पर कदापि भूल न पाती।

संस्कृत साहित्य का मिलता इसमें अनुवाद,
गद्य पद्य दोनों में मिलता साहित्यास्वाद,
संस्कारों की भाषा है नैतिकता है सिखलाती,
पाठकों को नित नूतन ज्ञान उपलब्ध करातीI

आओ हम सब इसे नित्य व्यवहार में लाएँ
स्वयं प्रयोग करें तथा अन्यों से भी करवाएँ,
हम भारत के वासी बनता यह फर्ज हमारा,
राजभाषा पद पर हमने ही इसको स्वीकाराI

                                       

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बात करनी चाहिए                                                                                                                   

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हिन्दी भाषा में ही परस्पर बात करनी चाहिए
अपने संस्कारों की शिक्षा हमको मिलनी चाहिए।
-
परिचय उससे होता हमारा घर में व बाहर सदा
हृदय में आदर की जगह उसे तो मिलनी चाहिए। 
-
विदेश में पहचान उसकी निरंतर बढ़ती जा रही,
अपनों के ओंठों पर वह निरंतर थिरकनी चाहिए।
-
पुरातन परंपरा इसकी अथाह ज्ञान भंडार है
धरोहर पीढ़ी दर पीढ़ी सदा ही मिलनी चाहिए।
-
बोलना लिखना सुगम वर्णमाला भी आसान है
विद्यालयों में भी इसे तरजीह मिलनी चाहिए।
-
देश की भाषा हमारी राजभाषा भी  हमारी यह
इसको सिंहासन इसका अपना अब मिलना चाहिए। 
-
आकर आगत और देशज शब्दों की संख्या बहुत
इजाजत नव शब्द मिलाने की भी मिलनी चाहिए।  

प्रकाश’ मातृभाषाओं को सदा जोड़ती परस्पर यह
बात इसमें ही घर पर हम सभी को करनी चाहिए।

------------


राजभाषा हिन्दी                                                                                                                       

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देश की सीमाओं को लांघ कर,
विदेश में पा रही पहचान है
यदि स्वयं नहीं इससे सब जुड़े
कहो  किस बात का गुमान है।

हिन्दी हैं हिन्दी ही पहचान है
भारतीयता की सभी जान लें
सीखना सिखाना सर्वप्रथम इसे
सभी कर्त्तव्य अपना मान लें।

हमारी संस्कृति का है कोष यह
सीख मिलती रहे इससे सदा।
इतिहास गौरव का इसमें भरा
प्रेरणा देता हमें वह यदाकदा ।

संस्कृत की वंशज सब जानते,  
वेदों का भरा इसमें तो सार है
दर्शन उपनिषद की व्याख्याएँ
ग्रंथ गीता से हमें तो प्यार है।

अपनी भाषा में बोध ज्ञान का
सरलता से प्राप्त हो जाए सदा
बोझ बनता नहीं मस्तिष्क पर
प्रयोग करके देख ले सब सर्वदा ।
इसे सीख सीख सकते अनेक
विश्व की भाषाएँ हम सदैव।
जानना चाहिए उन्हें भी हमें
सीखिए आप भी अवश्यमेव ।    

जान लें अपनी संस्कृति पूर्व में,
सभी संस्कृतियों का जो सार है,
आए सभी को तो हिन्दी अवश्य
निज राष्ट्र से जिनको  प्यार है।  
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ओम प्रकाश शर्मा हिंदी दिवस की कविताएँ

ओम प्रकाश शर्मा 

एक ओंकार निवास ।

छोटा शिमला -171002 

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