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हिंदी दिवस विशेष हाइकु

 

शशांक मिश्र भारती 

 
एक-
स्वभाषा गिरा
आंग्ल को प्रतिष्ठा दी,
अपनों ने ही


दो-
पराजय है
मोह में अंग्रेजी से,
आज हिन्दी की।


तीन-
भाषा चिन्तक
जुबान उधार की,
बजाते गाल।   


चार-
बुधुआ घर
आके भारत सोता,
इण्डिया नहीं।


पांच-
सूर्य निकला
समय से पहले,
आंखें ही नहीं।


छः-
सामाजिकता
गिट-पिट करना,
अन्धानुकरण।


सात-
पराये गये
केंचुलियां पहने,
अपने लोग।


आठ-
बयान बाज
बोलरहे कुछ भी
दिन उनका।

--

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शशांक मिश्र भारती

संपादक - देवसुधा, हिन्दी सदन बड़ागांव

शाहजहांपुर - 242401 उ.प्र.

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