गुरुवार, 17 सितंबर 2015

श्री गणेश जी की नई आरती

 

                   

(भक्तों-अभक्तों में, अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया... आरती बहुधा उपहासात्मक टीका-टिप्पणियों का पर्याय बनती है. प्रस्तुत है नई, मौलिक आरती, जिसे प्रस्तुत कर रहे हैं ‘‘सनातन’’ कैलाश यादव .)
                     

श्री गणेशाय नमः
हर हाल गजानन साथ मेरे..........

हर हाल गजानन साथ मेरे...
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।


    हर युग में सदा, हर काल सदा...
    कण-कण शुभता का भाव भरे...
      हर हाल गजानन साथ मेरे...
      हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।।


जनम के पाप मेरे,
तू सदकरमों से दूर करे।
   जन्मों का बिगड़ा भाग्य मेरा,
   तू पल भर में सौभाग्य भरे...
      हर हाल गजानन साथ मेरे...
      हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।।


हे गणनायक, सिद्धविनायक,
मेरे सब संताप हरे।
  भक्ति-भाव भर मेरे अंतर...
  मन का तम, पलभर में हरे।
     हर हाल गजानन साथ मेरे...
     हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।।


गौरी-पुत्र के संग शारदा,
माँ कमला भी साथ रहे।
  शिवशक्ति वरदान है तुझको,
  जग का सदा कल्याण करे...
   हर हाल गजानन साथ मेरे...
   हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।।


तुझको आज मनाते भगवन्,
हम-सब तेरे द्वार खड़े।
  दर्शन दे दे आज गजानन,
  तू ही अब कल्याण करे...
     हर हाल गजानन साथ मेरे...
     हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।।
 

                                        ‘‘सनातन’’ कैलाश यादव

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