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जि‍स खबर को सबसे ज्‍यादा लोग देखना चाहें, वही मुख्‍य समाचार है।

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- डॉ. परितोष मालवीय

पि‍छले दि‍नों मीडि‍या में स्‍त्रि‍यों से जुड़े कई मसले मुख्‍यधारा में शामि‍ल रहे। रातोंरात राधे माँ, जसलीन कौर और इंद्राणी मुखर्जी सेलीब्रि‍टी का दर्जा पा गयीं। तीनों को सेलि‍ब्रि‍टी बनने की लख-लख बधाईयॉं। साथ ही मीडि‍या को धन्‍यवाद देता हूं कि‍ उन्‍होंने स्‍त्री वि‍मर्श के इन महत्‍त्वपूर्ण मसलों को तमाम अन्‍य खबरों से ऊपर माना। इलैक्‍ट्रॉनि‍क मीडि‍या द्वारा इतना बड़े त्‍याग की कल्‍पना नहीं की थी कभी मैंने। खैर.....

इनमें जसलीन कौर का मामला थोड़ा अलग है। शुरुआत में ये लगा कि‍ अब महानगरीय लड़कि‍यां छेड़छाड़ की घटनाओं पर चुप नहीं रहतीं तथा साहस का परि‍चय देते हुए इनके वि‍रोध में मुखर हो रही हैं। जसलीन कौर की फेसबुक पोस्‍ट रातोंरात लाखों लोगों द्वारा शेयर की गयी, परि‍णामस्‍वरूप छेड़छाड़ करने वाला अगले ही दि‍न गि‍रफ्तार कर लि‍या गया। स्‍त्री वि‍मर्श वि‍षय का थोड़ा बहुत ज्ञान होने तथा हमारे पुरुषवादी समाज में महि‍लाओं की वि‍षम स्‍थि‍ति‍यों के प्रति‍ सहानुभुति‍ होने के कारण मेरी पहली सहज प्रति‍क्रि‍या भी यही थी कि‍ सरेराह लड़कि‍यों को छेड़ने वाले के साथ ऐसा ही सलूक होना चाहि‍ए। जसलीन कौर को भी अभूतपूर्व समर्थन मि‍ला। सोनाक्षी सि‍न्‍हा जैसी कई रियल सेलि‍ब्रि‍टि‍यों ने भी उसके समर्थन में ट्वीट कि‍या। फि‍र परतें खुलनी शुरु हुईं। एक चैनल पर हुई लाइव डि‍बेट में प्रत्‍यक्षदर्शी के बयान तथा जसलीन की प्रतिक्रि‍या से यह समझ में आया कि‍ मामला छेड़खानी का नहीं, सड़क पर हुए सामान्‍य से वादवि‍वाद का है। जसलीन ने इसे बड़ी चतुराई से महि‍ला उत्‍पीड़न के मामले के रूप में प्रचारि‍त कर दि‍या। मैंने अब तक सैकड़ों लड़कि‍यों को सरेराह छेड़े जाते देखा है, और ज्‍यादातर को सि‍र झ़काये, रोते हुए आगे बढ़ जाते देखा है। मुझे नहीं लगता कि‍ जि‍स लड़की को छेड़ा जा रहा हो, उसके पास अपराधी की तस्‍वीर खींचने का समय और साहस होता है। इस तरह की अति‍श्‍योक्‍ति‍पूर्ण प्रति‍क्रि‍या से स्‍त्री समाज को बचना चाहि‍ए क्‍योंकि‍ ये उन्‍हें समाज के समक्ष और कमजोर बनाती हैं।

बाकी दो मामलों – राधे मॉं और इंद्राणी मुखर्जी – के कारण भी हम महि‍लावादी इन दि‍नों नि‍शाने पर रहे। जैसे ही मीडि‍या ने राधे माँ और इंद्राणी के कि‍स्‍सों को हर दस मिनट में ब्रेकिंग न्‍यूज शैली में प्रस्‍तुत करना शुरु कि‍या, पुरुषवाद को संजीवनी मि‍ल गयी। तुरंत कहा जाने लगा कि‍ ‘ति‍रि‍या चरि‍त्र, देवों न जानम...’। यद्यपि‍ इन घटनाओं का महि‍ला वि‍मर्श से कोई लेनादेना नहीं है, फि‍र भी पुरुषवादि‍यों को यह कहने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हो ही गया कि‍ महि‍लायें भी पुरुष के बराबर ही हिंसक हो सकती हैं। नि‍स्‍संदेह राधे माँ और इंद्राणी जैसी घटनायें सि‍र्फ ये बात सामने लाती हैं कि‍ महि‍लाओं में भी पुरुषों के ही समान कुछ प्राकृति‍क अवगुण पाये जाते हैं।

लेकिन यह पुन: उल्‍लेखनीय है कि‍ ऐसे दो-चार या सैकड़ों मामलों के उजागर होने का मतलब यह कतई नहीं है कि‍ हमारे समाज में महि‍लाओं को पुरुष के बराबर ही आजादी हासि‍ल हो गयी है। अब भी हमारे समाज की बनावट घोर पुरुषवादी है। व्‍यक्‍ति‍गत स्‍तर पर भले ही लाखों पुरुषों का महि‍लाओं के प्रति‍ आचरण प्रशंसनीय हो, समाज के स्‍तर पर यह अब भी गैरबराबरी वाला ही है। लेकि‍न फि‍र भी ऐसी घटनाओं के सामने आने से महि‍ला वि‍मर्श कमजोर हुआ है। महि‍ला आजादी का मतलब यह कतई नहीं है कि‍ महि‍ला के हर कृत्‍य का समर्थन कि‍या जाये और पुरुष के हर कृत्‍य की भर्त्‍सना की जाये। पुनश्‍च हम स्‍त्री-पुरुष समानता के पक्षधर हैं, स्‍त्रीसत्‍तावादी समाज के नि‍र्माण का हमारा कोई इरादा नहीं है। क्‍योंकि‍ हम जानते हैं कि‍ स्‍त्रीवादी समाज भी अपने स्‍वभाव में पुरुषवादी समाज की ही तरह अति‍वादी और गैरबराबरी को प्रोत्‍साहि‍त करने वाला होगा।

अब घूम फि‍र कर हम पुन: मीडि‍या की बात कर लेते हैं, जि‍सका चरि‍त्र इन दि‍नों पूर्ण रूपेण बाजार आश्रि‍त है। जि‍स खबर को सबसे ज्‍यादा लोग देखना चाहें, वही मुख्‍य समाचार है। बाज़ार ही इस युग की सबसे ताक़तवर शक्ति है। हमारे आसपास घटित होने वाली हर घटना का लाभ बाज़ार तत्परता से उठाता है। बाज़ार की शक्तियां जानती हैं कि इन दिनों देश को सबसे ज्यादा मज़ा इन्द्राणी के किस्सों को सुनने में आ रहा है। क्या पुरुष और क्या महिला, टीवी सीरियल जैसी इस स्टोरी के द्वारा सब अपनी लोलुपता को शांत कर रहे हैं। अत: मीडि‍या को इस लेख के पहले पैरा में दी गयी बधाई इस वचन के साथ वापस लेता हूं कि‍ जब कभी भी मीडि‍या खाप पंचायतों के स्‍त्री वि‍रोधी फैसलों और डायन घोषि‍त कर अपमानि‍त की गयी स्‍त्री से जुड़े समाचारों को इतनी व्‍यापकता से प्रसारि‍त करेगा, यह बधाई मैं सूद समेत पुन: प्रदान करूंगा।

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डॉ. परितोष मालवीय

39/3 डिफेंस कॉलोनी, गांधीनगर

ग्वालियर (म.प्र.)

 

malviyaparitosh@rediffmail.com

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