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रचना समय अक्तूबर 2015 - सुरजीत पातर की पंजाबी ग़ज़लें

सुरजीत पातर

पंजाबी ग़ज़लें

 

"एक दिन अरबी के एक कवि ने कहा मेरे सिर्फ़ अनुवाद ही पढ़े जाएँ। पर श्रोताओं को यह बात मंज़ूर नहीं थी। प्रत्येक कवि को उसकी मूल-भाषा में सुनना एक विलक्षण अनुभव होता है। मरकज़ी सहरा से आया मोहम्मद हवद हमेशा अपने कविता-पाठ की रिहर्सल करता रहता। वह जब अपनी कविता का उच्चारण करता था तो बहुत मुश्किल और अभी तक अनसुनी ध्वनियां निकालता था। वह कहता था कि मेरे उच्चारण के दौरान किसी शब्द में मेरा अंगूठा भी बोलता है, किसी में मेरे पैरों के तलवे भी, किसी में मेरे सिर के बाल। किसी लफ़्ज़ के अर्थ के जाने बिना उसकी ध्वनियों को सुनना एक अलौकिक अनुभव होता था। उसकी ध्वनियां अजीब भावनाएँ जगाती थीं, अकेलेपन की, रब की बेरहमी की, आधी रात के सहरा के सिर पर चमकते सितारों की।

कैनेडा से आया पाल दत्तो कभी कभी निरार्थक ध्वनियों से ही अपना कविता-पाठ करता था, वे ध्वनियां किसी भाषा के लफ़्ज़ नहीं थे, वह सिर्फ़ अजीबोगरीब ध्वनियां थीं। एक दिन कविता-पाठ का वैन्यू पागलख़ाना रखा गया। पाल दत्तो भी उस वैन्यू के कवियों में शामिल था। दूसरे दिन उसके कविता-पाठ के बारे में सुर्ख़ी थी, ‘‘पागलख़ाने में पागलों से भी बड़े पागल।’’

एक शाम जमायकिन कवि तौमलिन ऐल्लिस का कविता-पाठ एक बियर बार के सामने था। बहुत बड़ी गिनती में लोग जुड़े हुए थे तौमलिन ऐल्लिस अंग्रेज़ी में गा रहा था, उसके साथ एक साज़िंदा गिटार बजा रहा था, उसका अनुवादक स्पैनिश में गिटार पर गा रहा था। "

-- सुरजीत पातर की डायरी के पन्नों से

पंजाबी ग़ज़लें

कुछ किहा तां

कुछ किहा तां हनेरा जरेगा किवें

चुप रिहा तां शमादान की कहणगे

 

गीत दी मौत इस रात जे हो गई

मेरा जीणा मेरे यार किंझ सहणगे

 

इस अदालत च बन्दे बिरख हो गये

फैसले सुणदियाँ सुणदियाँ सुक गये

आखो एनां नूँ उजड़े घरीं जाण हुण

ए कदों तीक एथे खड़े रहणगे

 

की ए इंसाफ हउमै दे पुत करनगे

की ए ख़ामोश पत्थर दे बुत करनगे

जो सलीबां ते टंगे ने लथणए नहीं

राज बदलणगे सूरज चढ़न लहणगे

 

यार मेरे जो इस आस ते मर गए

कि मैं ओनां दे दुःख दा बणावांगा गीत

जे मैं चुप ही रिहा, जे मैं कुछ न कहा

बण के रुहां सदा भटकदे रहणगे

 

जो बदेसां च रुलदे ने रोज़ी लई

ओ जदों देस परतणगे अपणे कदी

कुछ ताँ सेकणगे माँ दे सिवे दी अगन

बाकीकबरां दे रुक्ख हेठ जा बहणगे

 

ए जो रंगां च चितरे ने खुर जाणगे

ए जो मरमर च उकरे ने मिट जाणगे

बलदे हत्थां ने जिहड़े हवा विच लिखे

हर्फ़ ओही हवा विच लिखे रहणगे

 

ए वी शायद मेरा आपणा वहम है

कोई दीवा जगेगा मेरी क़ब्र ते

जे हवा ए रही, कबरां उत्तो तां की

सभ घरां दे वी दीवे बुझे रहणगे

 

दिल च रह रह के

दिल च रह रह के किसे दा जो ख़्याल औंदा है

ए बुरी गल्ल ए ख्याल ए वी तां नाल औंदा है

 

मैं हाँ ओ नींद-नदी, जिस च ने ऐसे सुपने

ख़ौफ़ औंदा है जदों कँढे ते जाल औंदा है

 

की तेरा मन वी है बेसिदक मेरे मन वरगा?

कब जाँदा हाँ जदों मन च स्वाल औंदा है

 

है बहुत उच्चा सदाचार दा गुंबद फिर वी

डुब्ब ही जाँदा है जद मन च उछाल आउँदा है

 

अपणियां हत्थां दे ही लाए होए बूटे, बंदा

बाल लैंदा ए इक ऐसा वी सिआल औंदा है

 

इसतरां है जिसतरां दिन रात विचला फ़ासिला

मेरीआं रीझां मेरी औकात विचला फ़ासिला

 

लफ्ज़ तां साऊ बहुत ने, या ख़ुदा, बणया रहे

मेरिआं लफ़्ज़ाँ मेरे ज़ज्बात विचला फ़ासिला

 

हाँ, मैं आपे ही किहा सी, होंठ सुच्चे रक्खणे

हाय पर इस प्यास ते उस बात विचला फ़ासिला

 

जे बहुत ही प्यास है तांमेट देवां, उस किहा

रिश्तिआं ते रिश्तिआं दे घात विचला फ़ासिला

 

धर्म है, इख़लाक़ है, क़ानून है, ए कौण है

मेरियां बिरखाँ तेरी बरसात विचला फ़ासिला

 

उस दीयां गल्लां सुणो, की रंग, की की रौशनी

हाय पर किरदार ते गलबात विचला फ़ासिला

 

ज़हर दा प्याला मेरे होंठां ते आ के रुक गिआ

रह गिआ मेरे अते सुकरात विचला फ़ासिला

 

कू हू कू हू दे समझे अर्थ, अरे

बंसरी नाल बहस कौण करे!

 

मैं किहा रुक्ख नूं : कोई ऩज्म सुणा

डाली डाली चों पुंगरे हर्फ़ हरे

 

खड़क होवे जे डिग्गे पत्ता वी

ऐसी चुप है तां बिर्ख अर्ज़ करे

 

रात उत्तरी जिवें पहाड़ों नदी

चंद चढ़िया जिवें सरूर चढ़े

 

बूहा खुल्ला कि तारियां दी किताब

कोण हुण बन्द ए किताब करे

 

तेरे वियोग नूं

तेरे वियोग नूं किन्ना मेरा ख़्याल रिहा

कि सारी उम्र ही लग्गिआ कलेजे नाल रिहा

 

मैं ओनां लोकां चों हाँ, जो सदा सफ़र च रहे

जिनां दे सिर ते सदा तारिआं दा थाल रिहा

 

असीं तां मचदिआं अंगिआरिआं ते नचदे रहे

तुहाडे शहर च ही झांजरां दा काल रिहा

 

असाडे ख़ून चों कर के कशीद सभ खुशियाँ

असाडे शहर च ही वेचदा कलाल रिहा

 

मेरी बहार दे फुल मंडीआं च सड़दे रहे

इक अग दा लांबू हमेशा मेरा दलाल रिहा

 

सुरजीत पातर

46, आशापुरी, अगर नगर के पास

लुधियाना - 141012

मो. न. 09814504272

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