बुधवार, 28 अक्तूबर 2015

प्राची - सितम्बर 2015 - शरदचन्द्र राय श्रीवास्तव की लघुकथा - शुभ मुहूर्त का बच्चा

शुभ मुहूर्त का बच्चा

शरदचन्द्र राय श्रीवास्तव

नीष की पत्नी गर्भवती थी. लेडी डॉक्टर ने जांच करने के बाद बताया कि डिलीवरी 25 नवम्बर को सम्भावित है, लेकिन मनीष चाहता था कि उसकी संतान का जन्म उस तारीख में हो जिसमें सभी ग्रह अनुकूल हों. उसने ज्योतिषी से अच्छा मुहूर्त निकलवाया. उसने लेडी डॉक्टर से कहा, ‘‘मैडम, आप मेरी पत्नी का ऑपरेशन 23 नवम्बर के 12 बजकर 25 मिनट पर कर दीजिए. मैंने वह मुहूर्त पंडित जी से निकलवाया है.’’ लेडी डॉक्टर ने निर्देशित समय पर आपरेशन कर डिलीवरी कर दी. बच्चे का जन्मोत्सव बड़ी

धूमधाम और हंसी खुशी से मनाया गया.

ग्रहों ने अपना प्रभाव दिखाया. अमित बड़ा ही प्रतिभाशाली बालक निकला. उसने एम.टेक. और एम.बी.ए. तक पढ़ाई की. उसे एक कम्पनी में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिल गई. धीरे-धीरे पदोन्नति पाकर वह जनरल मैनेजर बन गया. उसने खूब धन कमाया लेकिन वह एक दिन गबन के

अपराध में फंस गया. उस पर मुकदमा चला और उसे सात साल की जेल हो गई.

लोगों ने कहा कोई भले ही कितने शुभ मुहूर्त में बच्चा पैदा कर ले, परन्तु मां-बाप का असर बना ही रहता है. बाप भ्रष्टाचारी था, बेटा भी बाप से बढ़कर निकला.

संपर्कः विजयनगर, जबलपुर(म.प्र.)

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