विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

सुदर्शन कुमार सोनी का व्यंग्य - कौन कहता है कि गरीबी बढ़ रही है

image
लोग कहते है विकास व उदारीकरण के साथ ही गरीब व अमीर के बीच की खाई बढ़ती जा रही है । गरीब पाई पाई बचाता है , वहीं अमीर दिल खोल कर खर्च करता है लेकिन फिर भी यही खाई बढ़ रही है। गंगू को इस बात में कभी कभी कुछ शंका होती है यदि गरीबी बढ़ रही है , गरीबों की संख्या बढ़ रही है , खाई और चौड़ी होती जा रही है । तो फिर ये चीजें कैसे बढ़ रही है दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कैसे कर रहे है ! देश तो दो डिजिट में विकास दर को ले आने के लिये न जाने कब से जूझ रहा है लेकिन अर्थशास्त्रियो को कुछ सूझ नहीं रहा है । अर्थशास्त्रियों को नेक सलाह है कि वे इन परिसरों का अवलोकन अध्ययन कर लें


दक्षिण के एक मंदिर की ही कहते है कि संपत्ति एक लाख करोड़ की है । देश में ऐसे कई मंदिर ट्रस्ट है जहां की डायटी  अमीर से अमीरे आजम होते जा रहे है और हमारे देश में धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा आकर्षित गरीब ही होता है । और दान वही देता है जिसके पास कुछ हो देने के लिये । सारे भगवानों के यहां चढा़वे में बढ़ोत्तरी होती जा रही है , तो इसका मतलब है कि बहुसंख्य गरीब भी इसमे अपना योगदान कर रहे है । और इसका आगे यह मतलब है कि उनकी स्थिति कुछ सुधरी है देने लायक बनी है ।

तीर्थ यात्रायें भी लोग खूब कर रहे है , अपने गांव से हजार किलोमीटर दूर भगवान के दरबार में सपरिवार जाने पर दिल खोल कर खर्च करना पड़ता है और दिल  खोल कर खर्च वही कर सकता है , जिसकी कुछ परचेजिंग केपेसिटी हो । फिर बात वही आ जाती है कि यदि गरीबी बढ़ रही होती तो तीर्थ यात्रायें कैसे बढ़ रही होती । लोगो की जेब में पैसा आ रहा है , इसलिये तो वे भगवान के दरबार में मोटा दान दे रहे हैं , और नहीं देते होते तो फिर ये सारे भगवान साधारण से मध्यम व उससे धनी कैसे हो गये होते !

अब तो सारे भगवान एयरकंडीशन्ड़ में रहते हैं जो नहीं रहते हैं उनकी मार्केट वेल्यू भी उतनी ज्यादा नहीं रहती है  , उनके भव्य परिसर है उनका दर्जनों पंडे पुजारी दिन भर पूजा आरती करते हैं । उसके नाना तरह के नामकरण कर दिये जाते है । कुल मिलाकर सुबह चार बजे से आप रात को बारह बजे तक भगवन के दर्शन कर सकते हैं । मुझे तो आश्चर्य होता है व भगवन पर तरस भी आता है कि बेचारे कितनी मेहनत कर रहे है , देश का प्रधानमंत्री पांच घंटे सोता है और वे चार घंटे भी नहीं सो पाते हैं । भगवन इतना लेबर आप क्यो कर रहे हो ? कुछ समय तो सुकून से रह सकते हो ?


अब तो विश्व बैंक की रिपोर्ट भी आ गयी है कि पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा गरीबी कम होने की दर भारत में रही है।


भगवन कहते है , कि मेरे भक्तगणों को मैं निराश कैसे करू ? वे जेब में पैसा डालकर इतनी दूर से आते हैं , तो भगवान का भी तो कुछ फर्ज बनता है ! और बस मैं वही पूरा कर रहा हूं। 
लेकिन भक्त तू ही सुधर जा भगवन को इतना क्यों एक्जर्शन करवा रहा है कि वे नींद भी ठीक से नहीं ले पा रहे है । उनकी हालत क्रिकेट खिलाड़ियों से भी बदतर हो गयी है जो कि एक टूर्नामेंट खेल के आते नहीं है कि दूसरा सामने आ जाता है । उन्हे बिना थकान को उतारे दूसरे टूर्नामेन्ट के लिये अपने को झोंकना पड़ता है । कहते है कि नेम फेम व दौलत के फेर में आदमी की थकान उतर जाती है वह हर समय अपने आप को तरोताजा महसूस करता है।


भगवन से तो गंगू की इतनी सी ही विनती है कि वे कम से कम पर्याप्त आराम जरूर करे। इससे भक्तगण भी आराम कर सकेंगे। उनके पास तो नेम फेम व सबकुछ पहले से ही है ।

--


सुदर्शन कुमार सोनी
भोपाल  मोबाईल :9425638352

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget