विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

सूबे सिंह सुजान की ग़ज़ल

image

कुछ भी हो,अपने मसीहा को बड़ा रखता है
आदमी अपनी ही मर्जी का खुदा रखता है


वो सरेआम हकीकत से मुकर जायेगा
गिरगिटों जैसी बदलने की अदा रखता है


तुम गरीबी को तो इनसान का गहना समझो
जो फटेहाल है वो लब पे दुआ रखता है ।


जुल्म पर जुल्म जो करता है यहाँ दुनिया में
उसके हिस्से में भी भगवान सजा रखता है ।


मार के कुंडली,खजाने पे अकेला बैठा
हक गरीबों का यहाँ सेठ दबा रखता है


एक दिन मैं तुझे आईना दिखा दूंगा "सुजान "
मेरे बारे में जो तू ख्याल बुरा रखता है

 

सूबे सिंह सुजान
गाँव -सुनेहडी खालसा 
डॉ -सलारपुर,
जिला कुरूक्षेत्र ,हरियाणा
मोबाइल नंबर -09416334841

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget