गुरुवार, 8 अक्तूबर 2015

अखिलेश कुमार भारती की कविताएँ

जीवन- दर्शन की अभिव्यक्ति

 

clip_image004

उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ

पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ ,

कुछ इन्द्रधनुष के रंगों को चुनकर

आसमाँ को छायांकित कर दूँ |

मन की अभिव्यक्ति को अपनी दिल से लिख दूँ

किरणों की अभिदिशा से जीवन दर्पण में नयी कविता लिख दूँ ||

चाँद सा मुखड़ा, बादलो में जान भर दूँ

गगन से बारिश के बूंदों से

पावन धरती को सींच दूँ ||

स्नेह, प्रेम की भाव मुग्धता, जिज्ञासा को हर इंसान में भर दूँ ,

जीवन- दीप प्रकाश को इस संसार में प्रज्वलित कर दूँ |

 clip_image002

उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,

जीवन आनंद को अपने आप से सींच लूँ ||

सागर की लहरों जैसी, जीवन संघर्ष को,

सूरज की रौशनी सा सुखमय कर दूँ,

जीवन पथ की कठिनता को,

इंसानियत की परिभाषा देकर,

संसार में खुशियों की दीप जला दूँ ||

जीवन दर्शन की रूपरेखा को,

इन्द्रधनुष के रंगों में रंग दूँ |

अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को दुनिया में भर दूँ,

उन्मुक्तता की अभिलाषा को हर कण -कण में सींच दूँ |

उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,

पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ ||

----------

 

दृढनिश्चय एवं इक्छाशक्ति की परिभाषा

 clip_image002[4]

हर रास्ते की मंज़िल एक नहीं होती

हर मंज़िल एक रास्ते से हमेशा नहीं बनती,

कुदरत का भी यही करिश्मा,

हर इंसान एक काम के लिए नहीं होता |

हर सफलता की वजह एक नहीं होता

सफलता उन्हें मिलती है

जो सपने देखना पसंद करते है

जिनके सपनों में जान होती है,

सफल होने वाले कोई अलग नहीं होते |

हौसलों से विजय गाथा परिभाषित होता है,

केवल वादों, इरादों से नहीं..

और ऐसा करने वाले भी एक नहीं होते.

बुलंदियों को छूने के लिए,

सपनों में जान डालनी पड़ती है |

हर सफल इंसान एक -सा नहीं होता,

और उन्हें बुलंदियों पर पहुँचाने वाले भी एक -से नहीं होते ||

अकेले मंजिल पाना कठिन-सा, पर असंभव- सा नहीं,

काटो पर चल कर मुस्कुराना भी एक जिंदगी है |

-------AKHILESH KUMAR BHARTI-----------------

-------------- ----- अखिलेश कुमार भारती ------------------------------

AKHILESH KUMAR BHARTI

JUNIOR ENGINEER(ELECTRICAL)

M.P.P.K.V.V.C.L., JABALPUR

Email ID: Akhilesh.bharti59@gmail.com

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------