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अखिलेश कुमार भारती की कविताएँ

जीवन- दर्शन की अभिव्यक्ति

 

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उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ

पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ ,

कुछ इन्द्रधनुष के रंगों को चुनकर

आसमाँ को छायांकित कर दूँ |

मन की अभिव्यक्ति को अपनी दिल से लिख दूँ

किरणों की अभिदिशा से जीवन दर्पण में नयी कविता लिख दूँ ||

चाँद सा मुखड़ा, बादलो में जान भर दूँ

गगन से बारिश के बूंदों से

पावन धरती को सींच दूँ ||

स्नेह, प्रेम की भाव मुग्धता, जिज्ञासा को हर इंसान में भर दूँ ,

जीवन- दीप प्रकाश को इस संसार में प्रज्वलित कर दूँ |

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उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,

जीवन आनंद को अपने आप से सींच लूँ ||

सागर की लहरों जैसी, जीवन संघर्ष को,

सूरज की रौशनी सा सुखमय कर दूँ,

जीवन पथ की कठिनता को,

इंसानियत की परिभाषा देकर,

संसार में खुशियों की दीप जला दूँ ||

जीवन दर्शन की रूपरेखा को,

इन्द्रधनुष के रंगों में रंग दूँ |

अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को दुनिया में भर दूँ,

उन्मुक्तता की अभिलाषा को हर कण -कण में सींच दूँ |

उन्मुक्त होकर गगन को छू लूँ,

पल भर में पावन धरती को नमन कर लूँ ||

----------

 

दृढनिश्चय एवं इक्छाशक्ति की परिभाषा

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हर रास्ते की मंज़िल एक नहीं होती

हर मंज़िल एक रास्ते से हमेशा नहीं बनती,

कुदरत का भी यही करिश्मा,

हर इंसान एक काम के लिए नहीं होता |

हर सफलता की वजह एक नहीं होता

सफलता उन्हें मिलती है

जो सपने देखना पसंद करते है

जिनके सपनों में जान होती है,

सफल होने वाले कोई अलग नहीं होते |

हौसलों से विजय गाथा परिभाषित होता है,

केवल वादों, इरादों से नहीं..

और ऐसा करने वाले भी एक नहीं होते.

बुलंदियों को छूने के लिए,

सपनों में जान डालनी पड़ती है |

हर सफल इंसान एक -सा नहीं होता,

और उन्हें बुलंदियों पर पहुँचाने वाले भी एक -से नहीं होते ||

अकेले मंजिल पाना कठिन-सा, पर असंभव- सा नहीं,

काटो पर चल कर मुस्कुराना भी एक जिंदगी है |

-------AKHILESH KUMAR BHARTI-----------------

-------------- ----- अखिलेश कुमार भारती ------------------------------

AKHILESH KUMAR BHARTI

JUNIOR ENGINEER(ELECTRICAL)

M.P.P.K.V.V.C.L., JABALPUR

Email ID: Akhilesh.bharti59@gmail.com

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