गुरुवार, 22 अक्तूबर 2015

दिनेश कुमार की कविता - सियासत से पहले सोच का उद्धार होना चाहिए।

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सियासी हो तो सियासती इकरार होना चाहिए,
आपको चेहरे से भी मक्कार होना चाहिए।

दोस्ती में भी भला कोई मजहब घुसाता है?
आपको तो धर्म का ठेकेदार होना चाहिए।

हर चीज को देखते हो मजहबी आईने में,
आपको तो वज़ीर-ए-सरकार होना चाहिए।

जानवरों को बचाना यदि है फिरकापरस्ती,
हर मजहबी को फिर तो तार-तार होना चाहिए।

'दीना' सियासत जितनी ही बुरी हमारी सोच है,
सियासत से पहले सोच का उद्धार होना चाहिए।

सियासी- राजनीतिक,Political

इकरार-करार, indenture,
वज़ीर-मंत्री, Minister,
जानवर-पशु और इंसान,
फिरकापरस्ती- communalism,
उद्धार-मरम्मत, correction.

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कवि परिचय

नाम-डी जे (दिनेश कुमार )

सम्प्रति- भारतीय वायु सेना में वायु योद्धा के रूप में कार्यरत 

तिथि - 10.07.1987

शिक्षा-  १. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कनिष्ठ शोध छात्रवृत्ति एवं राष्ट्रीय  पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण      २. समाज कार्य में स्नातकोत्तर उपाधि 

३. योग में स्नातकोत्तर उपाधिपत्र

लिखित पुस्तकें -  दास्तान ए ताऊ, कवि की कीर्ति एवं प्रेम की पोथी

पता-  मकान नंबर 1,बाडों पट्टी, हिसार (हरियाणा)- 125001

फेसबुक . www.facebook.com/kaviyogidjblog 

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