अखिलेश कुमार भारती की कविता - श्रेष्ठ भारत

“श्रेष्ठ भारत”( संकल्प गीत)

कुछ तुम कहोकुछ मैं कहूं,

एक-साथ मिलकर हमसब कहें,

भारत राष्ट्र हमारा है,

दुनिया-भर मे सबसे न्यारा है,

कितना सुन्दर, कितना प्यारा,

भारत राष्ट्र हमारा है |


श्रेष्ठ भारत बनाना है,

जन-चेतनाजन-जागृति फैलाना है,

नैतिक-मूल्यों का सही उपयोग से,

श्रेष्ठ राष्ट्र में जन-भागीदारी बढ़ना है |


राष्ट्र उन्नतिश्रेष्ठ भारत,

जन-जन में यही जागृति लाना है |

राष्ट्र-हित सर्वोपरि धर्म है,

श्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है |


स्वच्छसुन्दर पर्यावरण बनाये,

यह संकल्प जन-जन को बताये,

राष्ट्र-शिक्षा से देश तरक्क़ी,

तन-मन में नये उमंग भरें,

सर्व धर्मसर्व हिताय  की सेवा राष्ट्र  भर में फैलाये,

यहाँ बहुल्य संस्कृति-सभ्यता का अनोखा मेल बनाये,

बहुल भाषाओ का प्रेम-मोल से राष्ट्र-हित को सर्वोपरि बनाये |


पर्वतनदियाँ और समंदर,

भारत राष्ट्र का  है धरोहर,

अखंडतासहिष्णु राष्ट्र प्रेम है,

हाथ थाम करएक होकर,

तन-मन में नये उमंग भर कर,

श्रेष्ठ भारत बनाने का संकल्प करे ।


राम-राज्य सा देश हो अपना,

यह संकल्प हमसब में हो अपना,

गौरवशाली जनसंकल्प से,

स्वर्णिम राष्ट्र बनाना है,

हिमालय के सरताज सिर पर,

भारत माँ की जयगाथा लिखना है |


भारत की पुण्य धरा पर,

रामायणमहाभारतगीता का नया सन्देश फैलाना है,

एकता ही भारतीयता है,

यह संकल्प हमसब से होकर,

स्वर्णिम राष्ट्र बनाना है |    

    -------AKHILESH KUMAR BHARTI------------------------------------

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