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सुर्दशन कुमार सोनी का आलेख - गणेश खान

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विगत दिवस का मुम्बई का वाकया है कि एक मुस्लिम महिला नूरजंहा को टैक्सी में जाते समय अचानक प्रसव वेदना होने पर टैक्सी वाले ने उन्हें सड़क पर इसलिये उतार दिया कि बार बार वे तेज और तेज टैक्सी को चलाने की बात कर रहे थे। क्योंकि लेबर पेन बढ़ते जा रहा था और हास्पिटल दूर था तथा उसके टैक्सी में प्रसव न हो जाए !

इस महिला का पति दूसरी टैक्सी लेने गया और इधर महिला की प्रसव वेदना इतनी बढ़ गयी कि पास में ही स्थित गणेश मंदिर में उपस्थित भक्त महिलाओं के एक समूह की नजर महिला पर पड़ी, तो मानवता का धर्म निभाते हुये आसपास के मकानों से चादर साड़ी इकटठा करके एक सुरक्षित कार्डन बनाकर महिलाओ ने पूरी स्थिति अपने नियंत्रण में रखी और मंदिर परिसर में ही उसका सुरक्षित प्रसव कराया ।

महिला ने एक सुंदर बच्चे को जन्म दिया और इस मुस्लिम कपल ने अपने बच्चे का नाम 'गणेश खान' रख दिया है ! नूरजहां ने कहा कि जब टैक्सी वाले ने सड़क पर ही उतार दिया तो उसकी हालत खराब थी लेकिन मंदिर पास में देखकर उसे लगा कि भगवान की कृपा उस पर है । भगवान के मदिर में यह अल्लाह का करिश्मा कहा जा सकता है या कि अल्लाह व भगवान जो कि मिलकर एक है और नाम ईश्वर कहा जाता है का यह इस धर्म के ठेकेदारों के गाल पर तमाचा है

 
उक्त घटना हमारी आंखें खोलने वाली है और धर्म की ठेकेदारी करने वालो के मुंह पर एक करारा तमाचा भी है । जो कि धर्म का उपयोग लोगो को जोड़ने नहीं तोड़ने में करते हैं। संकीर्णता को ऐसे तत्व बढा़वा दे रहे हैं । भारतीय संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर सहिष्णुता को खत्म करने पर तुले हैं।


मुझे तो अपने गृह नगर का हर साल का मोहर्रम के पर्व का समय याद आता है जहां कि सवारी के लिये हाले एक हिन्दू को ही आते थे और एैसा मैंने साल दर साल देखा है । धर्म के तथाकथित ठेकेदारों को यह सब क्यों नहीं दिखता है ?


भगवान इस देश के ऐसे लोगो को सदबुद्वि दे जो कि देश को तोड़ने वाले कामों को इस गलतफहमी में कर रहे है कि वे ही इसे जोड़ने के सबसे बड़े ठेकेदार हैं । और ऐसे ठेकेदार इस देश के हर प्रमुख धर्म में हैं।


उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जी का यह बयान तो उनके अंर्तमन की पीडा़ बताता है कि गौमाता के संरक्षक बंधु पांच सितारा होटलों के मीनू में यदि बीफ का जिक्र आये तो उसे उसी तरह जमींदोज कर दे जैसा कि बाबरी मस्जिद को उन्होने किया था । लेकिन दूसरी ओर देश की किसी घटना के बारे में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को चिटठी लिखना  तो सही नहीं कहा जा सकता ।नोएडा की घटना की एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या इस शक के आधार पर कर दी गयी कि गऊ माता का वध करके उसके मांस का सेवन किया गया है तो दूसरी ओर घटना है 'गणेश खान' वाली। यदि किसी ने कानून तोडा़ है तो भी कार्यवाही का अधिकार कानून को है न कि आम जनता को जिसे किसी के द्वारा भड़का दिया गया हो।


अब तो देशवासियो का सबसे बडा़ धर्म यदि कोई है तो यह विकास है और देश का संविधान है तो फिर इन छोटी छोटी बातों पर हम कब तक लड़ते रहेंगे आपस में कटते मरते रहेंगे।
यदि भारत को वास्तव में विश्व गुरू बनना है तो गणेश खान जैसी घटनाओं के लिये या कि गाय की रक्षा के लिये मुस्लिमों ने नमाज रोकी के लिये जाना जाना चाहिये न कि नोएडा की घटना के लिये जहां भीड़ कानून को हाथ में ले लेती है।


धार्मिक आधार पर वोटों की राजनीति के लिये ध्रुवीकरण सबसे खतरनाक चीज है और देश के समझदार लोग ही ऐसी किसी भी पार्टी के एैसे मनसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे और सारी ही पार्टियां इस काम को करने में अब गुरेज नहीं करती हैं । यही समय की सबसे बड़ी मांग है ।


sudarshan kumar soni 

D-37 , Char Imli , bhopal 

462016 , mob. 9425638352  

Email: sudarshanksoni2004@yahoo.co.in

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