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बी.के.गुप्ता की कविताएँ

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''प्रेम''

अहसास ए मुहब्बत की सदा, दिल से लीजिए।,

करना है सच्चा इश्क तो फिर, दिल से कीजिए।।

1.महफिल में हो तन्हाई में हो ,जिक्र उसी का,

आंखों से उसके प्यार को महसूस कीजिए।

है प्रेम की बुनियाद तो विश्वास पर टिकी,

गहराई इसकी रूह से महसूस कीजिए।।

2.ये प्रेम इबादत है ,फिदाई की नजर में,

इकरार से इसके कभी मुकरा न कीजिए।

है सबसे एक बात मुझे कहना बस यही,

खेल नहीं प्यार ,बस एक बार कीजिए।।

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''आज''

1.आज सच्चे इंसान नहीं मिलते हैं,

लोगों के दिल से दिल नहीं मिलते हैं।

आज कल के इस जमाने में

सच्चे आइने कहां मिलते।।

2.दिखा करके सब झूठे सपने ,

दिल के अरमान तोड़ देते है।

मत जीना किसी के अहसानों तले,

लोग मजबूरियों में वार करते हैं।।

3.धोखे खाये हैं मैंने अपनों से,

मुझे अपने ही मात देते हैं।

लोग छोटों पर उगलियां उठाते हैं

गुनाह बड़ों के तो बेहिसाब होते हैं।।

3.वादा करके जो गया था कभी,

उसका आज भी इंतजार करते हैं।

वफा न मिली वफा करके ,

इसलिए आज भी तन्हा रहते हैं ।।

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कविता -''बेटी''

आने वाला कल है बेटी,

पावन गंगा जल है बेटी।

प्रेम,दया, ममता की मूरत,

शुभ कर्मों का फल है बेटी।।

मुश्किल में मुस्कान है बेटी,

दो-दो कुल की शान है बेटी।

जीती है संघर्ष का जीवन,

ईश्वर का वरदान है बेटी।।

माँ-बहना का रूप है बेटी,

पति के घर का दीप है बेटी।

बेटी माँ के दिल का टुकड़ा,

लक्ष्मी,दुर्गा का रूप है बेटी।।

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''गुनाह''

गुनाह करके बच तो जाओगे ,दुनिया की नजर से,

खुद को न बचा पाओगे खुदा की नजर से ।

1.मंदिर में तो लिखा दोगे नाम ऊँचे दाम से ,

खुदा न पडेगा तेरा नाम बिन अच्छे काम के।

मुसीबत में किसी को तूने एक आना न दिया,

किसी का न किया भला तू ने अपने हाथ से ।।

2.तेरे महलों से तो है उनकी झोंपड़ी भली ,

रहते हैं जहां मिलके सब आपस में प्यार से।

मतलब नहीं होता है उन्हें किसी गुनाह से ,

खुश हैं जहां पर सभी अपनों के साथ से ।।

--

'बेटी' हेतु गीत''

बेटी को न समझो तुम बोझ यारो।

बेटी रचती नया एक संसार यारो।।

बंद करो अब सब तुम भ्रूण हत्या,

हो जाने दो कन्या का अवतार यारो।

बेटी को भी है यह अधिकार यारो,

करलो-करलो तुम लाड़ली को प्यार यारो।।

बेटी मे होता है एक माँ का दिल,

पिता की छवि होती है अभिराम यारो।

कन्या का है ऐसा एक दान यारो,

जिसमें रमते हैं चारों-धाम यारो।।

देश का जब करेगी बेटी नाम रोशन,

होगा तुमको भी बेटी पर नाज यारो।

दो-दो कुल की है बेटी शान यारो,

बेटी होती है ईश्वर का वरदान यारो।

--

 

बी.के.गुप्ता

कैपीटल कम्प्यूटर आई.टी.एण्ड साइन्स

बिजली आफिस के पास बड़ामलहरा

जिला-छतरपुर .प्र. पिन-471311

मो.-9755933943

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